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त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही महज 10 दिन में साढ़े तीन फीसदी महंगी हुई चीनी

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अनुमान है कि, महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 2025-26 में पिछले सीज़न के 93.3 लाख टन की तुलना में बढ़कर 133 लाख टन हो जाएगा।

Last Updated- August 04, 2025 | 8:01 PM IST
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त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही चीनी की कीमतें भागना शुरु हो गई। पिछले महज 10 दिनों में चीनी साढ़े तीन फीसदी महंगी हो गई। त्योहारों  की वजह से अगस्त महीने में तेज मांग रहने वाली है जिससे कीमतें और बढ़ेगी, इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अगस्त महीने के लिए 22.5 लाख मीट्रिक टन चीनी कोटा आवंटित कर दिया ताकि बढ़ती कीमतों को काबू में रखा जा सके।

त्योहारी मांग के शुरु होते ही चीनी में महंगाई का रंग चढ़ना शुरु हो गया। शुक्रवार को शुगर -एस 30 के दाम 39 रुपये जबकि एम 30 के दाम 25 रुपये प्रति क्विंटल चढ़ गए। दा बॉम्बे शुगर मार्चेंट्स एसोसिएशन लिमिटेड के आंकड़ों के मुताबिक 21 जुलाई को शुगर – एस 30 की कीमत 3929 रुपये प्रति क्विंटल थी जो एक अगस्त को 132 रुपये बढ़कर 4061 रुपये प्रति क्विंटल हो गई, जबकि शुगर -एम 30 की कीमत 4012 रुपये प्रति क्विंटल से 100 रुपये बढ़कर 4112 रुपये प्रति क्विंटल हो गई।

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देश में चीनी की कमी नहीं होने के बावजूद इस साल में चीनी के दाम 13 फीसदी से अधिक बढ़ गए हैं। साल की शुरुआत में एक क्विंटल चीनी के दाम 3593 ( एस-30) और 3707 रुपये (एम-30) थे। इस तरह इस साल एम 30 के दाम 10.9 फीसदी यानी 405 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुके हैं जबकि ए-30 किस्म की चीनी 469 रुपये यानी 13.1 फीसदी महंगे हो गए हैं।

बाजार में चीनी की कमी न हो इसके लिए खाद्य मंत्रालय ने अगस्त 2025 के लिए 582 चीनी मिलों को 22.5 लाख मीट्रिक टन का मासिक चीनी कोटा आवंटित किया, जो अगस्त 2024 के लिए आवंटित कोटे से कम है। अगस्त 2024 में, सरकार ने घरेलू बिक्री के लिए 22 लाख मीट्रिक टन का मासिक चीनी कोटा आवंटित किया था। जुलाई 2025 के लिए भी चीनी कोटा आवंटन 22 लाख मीट्रिक टन था।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मांग के कारण जुलाई में कीमतों में 134 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि देखी गई। रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, श्रावण आदि जैसे त्योहारों के कारण अगस्त का कोटा अपेक्षित मांग से कम प्रतीत होता है । मांग अधिक होने के कारण बाजार में कीमतों में 100 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि होने की संभावना है। पिछले साल अगस्त में चीनी की खपत 25.20 लाख मीट्रिक टन थी।

भारतीय चीनी एवं जैव ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) द्वारा जारी अनुमान के अनुसार चीनी सीजन 2025-26 में भारत का चीनी उत्पादन पिछले सीज़न के 295 लाख टन के मुकाबले 18 फीसदी बढ़कर 349 लाख टन होने का अनुमान है। इसमें कहा गया है कि, बंपर उत्पादन को देखते हुए, सरकार को 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देनी चाहिए, 50 लाख टन एथेनॉल निर्माण के लिए उपयोग करना चाहिए और चीनी की अधिकता के जोखिम से बचने के लिए एथेनॉल की कीमतों में संशोधन करना चाहिए। चालू 2024-25 सीज़न (अक्टूबर-सितंबर) के लिए, चीनी उत्पादन 261 लाख टन होने का अनुमान है, और सरकार ने 10 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी है।

चीनी सीजन 2024-25 में गन्ने का रकबा 57.1 लाख हेक्टेयर से मामूली रूप से बढ़कर 57.2 लाख हेक्टेयर हो गया है, लेकिन गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में अच्छी बारिश ने उत्पादकता बढ़ाने और चीनी की रिकवरी में सुधार करने में मदद की है। अनुमान है कि, महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 2025-26 में पिछले सीज़न के 93.3 लाख टन की तुलना में बढ़कर 133 लाख टन हो जाएगा। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में भी उच्च उत्पादन दर्ज होने की उम्मीद है।

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First Published - August 4, 2025 | 7:55 PM IST

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