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रुपये में आई मजबूती, डॉलर के मुकाबले 10 पैसे बढ़कर 86.71 पर पहुंचा

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Dollar Vs Rupees: फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि घरेलू करेंसी की तेज बढ़त सीमित रही क्योंकि निवेशक बढ़ती वैश्विक व्यापार चिंताओं के संभावित आर्थिक प्रभाव से जूझ रहे हैं।

Last Updated- March 18, 2025 | 11:03 AM IST
rupees dollar
Representational Image

Dollar Vs Rupees: घरेलू शेयर बाजार में मजबूती के दम पर मंगलवार को भारतीय रुपये में मजबूत शुरुआत हुई। शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 10 पैसे बढ़कर 86.71 पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि घरेलू करेंसी की तेज बढ़त सीमित रही क्योंकि निवेशक बढ़ती वैश्विक व्यापार चिंताओं के संभावित आर्थिक प्रभाव से जूझ रहे हैं। सोमवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे बढ़कर 86.81 पर बंद हुआ था।

इंटरबैंकिंग फॉरेन एक्सचेंज में रुपया डॉलर के मुकाबले 86.71 पर खुला, जो पिछले बंद भाव से 10 पैसे मजबूत है। एशियाई करेंसीज में मामूली बढ़त हुई। CNH 7.2338, IDR 16395 और KRW 1445 पर पहुंच गया। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 103.56 पर रहा।

अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.21 प्रतिशत चढ़कर 71.22 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 4,488.45 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

इस बीच, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स, जो छह करेंसी की बॉस्केट मुकाबले डॉलर की ताकत को मापता है, 0.19 फीसदी बढ़कर 103.56 पर कारोबार कर रहा था। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.21 फीसदी चढ़कर 71.22 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने नेट 4,488.45 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Finrex Treasury Advisors LLP के हेड ऑफ ट्रेजरी और एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीतियों से व्यापक इकॉनोमिक मंदी शुरू होने की आशंकाओं ने डॉलर को कमजोर कर दिया है।

घरेलू मैक्रोइकॉनोमिक मोर्चे पर भारत का व्यापार घाटा साढ़े तीन साल के निचले स्तर पर आ गया, लेकिन चिंता की बात यह थी कि निर्यात में तेजी से गिरावट आई। भंसाली ने कहा कि आयात में भी 20 महीनों में सबसे अहम गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण तेल आयात और सोने के आयात में गिरावट थी।

भंसाली ने कहा, “ट्रंप के पारस्परिक व्यापार टैरिफ के खतरे के कारण निर्यात अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट और बढ़ती इकॉनोमिक अनिश्चितता उन्हें नकारात्मक बनाए रखती है।” इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की 2 अप्रैल को व्यापक पारस्परिक टैरिफ और क्षेत्र-विशिष्ट व्यापार प्रतिबंध लगाने की योजना से रुपये पर और दबाव पड़ सकता है।

इनपुट: एजेंसियां 

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First Published - March 18, 2025 | 11:03 AM IST

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