facebookmetapixel
Advertisement
मॉनसून की वापसी से लौटेगी रूरल डिमांड? इन सेक्टर्स पर रखें नजर12 महीने के नजरिये से पसंद ये 5 शेयर, 29% तक का रिटर्न संभव, चेक करें लिस्टनेपाल की बाढ़ का बिहार में असर, गंडक का जलस्तर घटा लेकिन अलर्ट जारीमाता-पिता को खोने वाले बच्चों के लिए सरकार की बड़ी मदद, ₹10 लाख का कॉर्पस और ₹5 लाख का हेल्थ कवर; जानें योजना के बारे मेंसुभाष चंद्रा पर ₹22,006 करोड़ का दावा, लेनदारों को मिलेंगे सिर्फ ₹6.5 करोड़! NCLT ने बताई वजहमल्टीबैगर PSU डिफेंस शेयर में बना खरीदारी का मौका? नवरत्न कंपनी को मिला ₹739 करोड़ का ऑर्डर, ब्रोकरेज बुलिशभारत में ChatGPT पर अब दिखेंगे ऐड, जानें किन यूजर्स पर होगा असर?बड़े ऑफिस के बजाय को-वर्किंग पर कंपनियों का जोर, 6 महीने में लीजिंग 68% बढ़ीमर्जर स्कीम में बदलाव के बाद देवयानी इंटरनेशनल और सैफायर फूड्स के शेयर 3% तक चढ़ेबारिश खत्म होने के बाद स्टील में आ सकती है अगली तेजी? ब्रोकरेज ने बताए पसंदीदा शेयर

डॉलर के मुकाबले स्थिर रहेगा रुपया

Advertisement

शुक्रवार को डॉलर सूचकांक में गिरावट के बाद रुपया मजबूत होकर 85प्रति डॉलर के स्तर से नीचे पहुंच गया था।

Last Updated- April 06, 2025 | 10:34 PM IST
rupees dollar

डॉनल्ड ट्रंप के जवाबी कर की नीति से अमेरिका में वृद्धि को लेकर बढ़ती चिंता के बीच डॉलर कमजोर हो रहा है। अगले कुछ महीनों के दौरान रुपया स्थिर रहने की संभावना है, जिससे भारत के केंद्रीय बैंक को अपना विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का बेहतर मौका मिलेगा। दिसंबर से फरवरी के दौरान कई बार सर्वाधिक निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अब मार्च से रुपये में उल्लेखनीय रिकवरी देखी जा रही है। डॉलर के मुकाबले रुपया 0.44 फीसदी मजबूत हुआ है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के एक पोल के परिणामों का माध्य निकालने से पता चलता है कि जून के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपया 85.50 पर और सितंबर के अंत तक 85.24 प्रति डॉलर पर कारोबार करने का अनुमान लगाया जा रहा है। शुक्रवार को रुपया 85.24 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि इसके पहले 85.44 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने कहा, ‘रुपये में गिरावट की रफ्तार धीमी रहने की संभावना है, क्योंकि अमेरिका की वृद्धि दर कम होने से डॉलर कमजोर होगा। ट्रंप द्वारा घोषित जवाबी कर अनुमान से बहुत ज्यादा है और साफतौर पर यह शुल्क में अंतर से जुड़ा हुआ नहीं है।’

शुक्रवार को डॉलर सूचकांक में गिरावट के बाद रुपया मजबूत होकर 85प्रति डॉलर के स्तर से नीचे पहुंच गया था। बाजार को उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक डॉलर खरीदकर बाजार में हस्तक्षेप करेगा, लेकिन केंद्रीय बैंक की अनुपस्थिति ने बाजार को चकित किया। इस कैलेंडर वर्ष में पहली बार रुपया 85 रुपये प्रति डॉलर से नीचे आया और 18 दिसंबर 2024 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। पिछले वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपये में 2.42 फीसदी की गिरावट आई है।

भारत पर चीन, वियतनाम और थाईलैंड जैसे क्षेत्रीय पड़ोसियों की तुलना में 26 फीसदी का कम जवाबी शुल्क लगाया गया है, इसकी वजह से भी बाजार की धारणा को बल मिला है।

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी हेड और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘इस समय बहुत अनिश्चितता की स्थिति है। जोखिम से बचने की धारणा बढ़ रही है। ट्रंप के अहंकार और चल रहे व्यापार युद्ध के कारण दर का पूर्वानुमान लगाना बहुत कठिन है। हालांकि मुझे अगले 3 से 6 महीने में शांति की उम्मीद है और मैं अनुमान लगा रहा हूं कि एशिया के अन्य देशों की तुलना में भारत पर सबसे कम शुल्क लगेगा। ’

मार्च में रुपये ने डॉलर के मुकाबले फिर मजबूती हासिल कर ली। साल की शुरुआत में निचले स्तर पर पहुंचने के बाद विदेशी पूंजी प्रवाह के कारण ऐसा हुआ। रुपये में बहुत उतार चढ़ाव को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में लगातार हस्तक्षेप किया और खरीद-बिक्री स्वैप नीलामियों का आयोजन किया। इन कदमों से बैंकिंग व्यवस्था में रुपये डालने में मदद मिली और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रुपये को समर्थन मिला। परिणामस्वरूप मार्च में रुपये में उल्लेखनीय रूप से मजबूती आई और यह करीब 88 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर से ऊपर आया और इस कैलेंडर वर्ष में आई गिरावट की भरपाई हो गई।

Advertisement
First Published - April 6, 2025 | 10:34 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement