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सीमांत किसानों पर पड़ी मौसम की मार, आधी खड़ी फसलें हुई बर्बाद

सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक सीमांत किसानों में ऐसे किसान शामिल होते हैं, जिनके पास 1 हेक्टेयर तक कृषि भूमि है, चाहे व उनकी अपनी हो, या उन्होंने बटाई पर ली हो।

Last Updated- June 25, 2024 | 10:24 PM IST
farmer

भारत के 50 प्रतिशत से ज्यादा सीमांत किसानों की कम से कम आधी खड़ी फसलें मौसम की उग्र स्थिति के कारण खराब हो गई हैं। एक ताजा सर्वे में यह सामने आया है। मौसम की उग्र स्थिति में बहुत ज्यादा या बेमौसम बारिश, लंबे समय तक चली जाड़े की स्थिति, सूखा और बाढ़ शामिल है।

संबोधि रिसर्च और ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (टीआरआईएफ) के सहयोगी संस्थान डेवलपमेंट इंटेलिजेंस यूनिट (डीआईयू) द्वारा ‘भारत के सीमांत किसानों की स्थिति 2024’ कराए गए दूसरे वार्षिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में यह सामने आया है।

इस अध्ययन में कुल 6,615 सीमांत किसानों ने हिस्सा लिया, जो पूरे भारत से चुने गए थे। पहला सर्वे 2023 में कहाया गया और प्रतिक्रिया देने वालों का चयन उन किसानों की भूमि के आकार के हिसाब से किया गया। 21 राज्यों के किसानों से टेलीफोन पर बातचीत की गई।

सरकार के रिकॉर्ड के मुताबिक सीमांत किसानों में ऐसे किसान शामिल होते हैं, जिनके पास 1 हेक्टेयर तक कृषि भूमि है, चाहे व उनकी अपनी हो, या उन्होंने बटाई पर ली हो। भारत के कृषि क्षेत्र में सीमांत किसानों की बड़ी संख्या है, लेकिन फसल के कुल रकबे में उनकी हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत है। सीमांत किसानों के पास औसतन प्रति व्यक्ति 0.38 हेक्टेयर जमीन है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि पिछले 5 साल के दौरान इन किसानों ने औसतन एक तिहाई से आधी फसल गंवाई है।

अध्ययन में कहा गया है कि 50 प्रतिशत धान किसानों और 40 प्रतिशत से ज्यादा गेहूं किसानों को मौसम की मार के कारण पिछले 5 साल के दौरान आधी से ज्यादा फसल गंवानी पड़ी है। वहीं अन्य फसलों के मामले में 45 से 65 प्रतिशत किसानों को 50 प्रतिशत से ज्यादा फसल गंवानी पड़ी है।

सर्वे से संकेत मिलता है कि अगर वास्तविक नुकसान का हिसाब किताब करें तो खरीफ के मौसम में सिर्फ धान उगाने वाले सीमांत किसानों को 72 प्रतिशत नुकसान हुआ है।

First Published - June 25, 2024 | 10:24 PM IST

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