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मंदी की तपिश में पिघलने लगे सराफों के गहने

Last Updated- December 15, 2022 | 5:12 AM IST

मंदी की तपिश झेल रहे आभूषण निर्माताओं ने अपने पास जमा गहनों का भंडार कम करने के लिए उन्हें पिघलाना शुरू कर दिया है। अभी तक सराफ और सुनार ग्राहकों से मिले पुराने गहने ही गलाते थे मगर अब नए गहने की पिघलाए जा रहे हैं। इससे गहने बनाने में आए गढ़ाई के खर्च की चपत लग रही है मगर सराफ उसके लिए भी तैयार हैं। कई आभूषण निर्माता ग्राहकों की पसंद के मुताबिक अलग-अलग तरह के गहने लंबे समय तक अपने पास रखते थे। लेकिन बिक्री नहीं होने की वजह से अब उन्हें लंबे समय तक रखना मुश्किल हो गया है।
मेटल फोकस में दक्षिण एशिया के प्रधान सलाहकार चिराग सेठ ने कहा, ‘पिघलाने के सोने का दो तरह का कबाड़ आ रहा है। पहले केवल पुराने गहने ही पिघलाए जाते थे मगर अब कई आभूषण निर्माताओं ने गहनों का नया स्टॉक भी पिघलाना शुरू कर दिया है। इससे 2020 में सोने के कबाड़ी की आपूर्ति बढ़कर 140 टन हो सकती है, जो पिछले साल 119 टन थी।’
सेठ ने कहा कि पहले कम मात्रा में गहने पिघलाए जाते थे, इसलिए दुकानों और आसपास के केंद्रों में ही पुराना सोना पिघला दिया जाता था। मगी अब पिघलाने का काम इतने बड़े स्तर पर हो रहा है कि उन्हें गोल्ड रिफाइनरियों में भेजा जा रहा है।
ग्राहकों ने सराफा बाजार से दूरी ही बना ली है और जो लोग आ रहे हैं वे भी बहुत नापतोल कर खरीदारी कर रहे हैं। सराफों और आभूषण निर्माताओं के पास पहले ही अच्छा खासा स्टॉक था और शादी-ब्याज के सीजन की आस में उन्होंने गहने बनाने के लिए अच्छा खासा स्वर्ण ऋण भी लिया था। इसके ब्याज का बोझ उन्हें परेशान कर रहा है। इसीलिए छोटे सराफ ही नहीं बड़ी संगठित आभूषण शृंखलाएं भी पुराने गहने बेच रही हैं। छोटे सराफ अब गहने पिघलाना शुरू कर सकते हैं ताकि सोने की ऊंची कीमत की वजह से गढ़ाई की चोट कुछ हद तक कम
हो जाए। सोने और हीरे की आभूषण शृंखला ‘ऑरा’ के प्रबंध निदेशक दीपू मेहता ने कहा, ‘कोविड लॉकडाउन के दौरान हमें अपनी रणनीति पर फिर विचार करने और कोविड के बाद ही वास्तविक मांग के हिसाब से गहने रखने पर विचार करने का मौका मिला। हालांकि अपने गहनों के भंडार को नए चलन और ग्राहकों की मांग के मुताबिक बदलना हमारे लिए नया नहीं है।’
बड़ी आभूषण शृंखलाएं पहले ही कम गहने रखने लगी थीं। उनके लिए सहूलियत यह थी कि एक स्टोर पर कोई खास डिजाइन नहीं होने पर वे दूसरे स्टोर से मंगा लिया करती थीं। मगर छोटे सराफा स्टोर वालों के पास यह सुविधा नहीं होती है और उन्हें भारी मात्रा में गहने रखने पड़ते हैं। ऐसे सराफों ने जरूरत से ज्यादा गहनों को पिघलाने का काम शुरू कर दिया है।
सोने की रिफाइनिंग के क्षेत्र में 8-9 बड़ी इकाइयां काम कर रही हैं, जो पुराने गहनों के साथ ही आभूषण निर्माताओं से मिले नए गहने भी गला रही हैं।

First Published - July 6, 2020 | 10:52 PM IST

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