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पैकेजिंग के लिए मांग घटी, जूट मिलें उत्पादन में 30-50% तक कटौती करेंगी

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सितंबर में ही मांग 2.5 लाख गांठ रहने का अनुमान है जबकि अनुमान 3.21 लाख गांठ का था। इसका कारण महाराष्ट्र से मांग कम होना है।’’

Last Updated- September 19, 2023 | 9:10 PM IST
केंद्र 16 और खाद्य वस्तुओं की थोक, खुदरा कीमतों पर रोजाना के आधार पर निगाह रखेगाCenter will monitor wholesale, retail prices of 16 more food items on daily basis
Shutterstock

जूट उद्योग विभिन्न राज्यों से खाद्यान्न के लिए पैकेजिंग सामग्री की मांग घटने से चिंतित है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नवंबर तक तीन माह की अवधि के दौरान विभिन्न राज्यों से खाद्यान्न के लिए पैकेजिंग सामग्री की मांग घटना एक बड़ी चिंता का विषय है, जिससे जूट उद्योग को उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ सकती है।

चालू जूट सत्र में वास्तविक मांग 30 से 40 प्रतिशत कम

भारतीय जूट मिल संघ (IJMA) ने केंद्र से खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी छठी (संशोधित) आपूर्ति योजना में संशोधन की अपील की है। खाद्यान्न उत्पादकों को एक निश्चित सीमा तक पैकेजिंग सामग्री के रूप में जूट का उपयोग करना पड़ता है। IJMA के अध्यक्ष राघव गुप्ता ने बताया, ‘‘सितंबर से नवंबर, 2023 तक चालू जूट सत्र में वास्तविक मांग 30 से 40 प्रतिशत कम है। सितंबर में ही मांग 2.5 लाख गांठ रहने का अनुमान है जबकि अनुमान 3.21 लाख गांठ का था। इसका कारण महाराष्ट्र से मांग कम होना है।’’

उन्होंने कहा कि अक्टूबर और नवंबर के लिए मांग दो लाख गांठ से अधिक के अनुमान के मुकाबले लगभग 1.48 लाख गांठ रहने की संभावना है। गुप्ता ने कहा, ‘‘यदि मांग में सुधार नहीं आता है, तो क्षमता इस्तेमाल के संदर्भ में हमारे उत्पादन में कटौती 30-50 प्रतिशत तक होगी।’’

कच्चे जूट की कीमतों में अस्थिरता किसानों के लिए खतरा

IJMA ने सरकार को अपनी प्रस्तुति में दावा किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अक्टूबर और नवंबर के लिए अचानक रद्द किए गए मांग पत्र से उद्योग को गंभीर झटका लगा है। IJMA के पूर्व अध्यक्ष संजय कजारिया ने कहा कि जूट मिलों में कम क्षमता उपयोग के परिणामस्वरूप निर्माताओं ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। इससे कच्चे जूट की कीमत पर प्रभाव पड़ सकता है, जो वर्तमान में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के स्तर से नीचे चल रही है। उन्होंने कहा कि कच्चे जूट की कीमतों में अस्थिरता किसानों के लिए खतरा पैदा करती है। इससे उन्हें उनकी उपज खासकर आगामी नई जूट की फसल के लिए पर्याप्त दाम नहीं मिलेंगे।

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First Published - September 19, 2023 | 9:10 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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