एचसीएलटेक के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक सी विजयकुमार ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि हाल में किए गए बड़े अधिग्रहण अगले वित्त वर्ष के दौरान राजस्व में लगभग 1.5 प्रतिशत का योगदान देंगे। कंपनी कमजोर वृहद आर्थिक माहौल में राजस्व के नए क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है।
भारत की तीसरी सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता ने पिछले महीने दो कंपनियों को खरीदने के लिए लगभग 40 करोड़ डॉलर खर्च किए। उसने ह्यूलिट पैकर्ड एंटरप्राइजेज (एचपीई) का टेलीकॉम सॉल्युशंस बिजनेस और क्लाउड सॉफ्टवेयर ग्रुप की इकाई जैस्परसॉफ्ट का अधिग्रहण किया। ये अधिग्रहण 5जी नेटवर्क ट्रांसफॉर्मेशन और डेटा तथा आर्टिफिशल इंटेलिजेंस इकाइयों में क्षमताएं बढ़ाने के लिए किए गए।
विजयकुमार ने मंगलवार को बिजनेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, ‘अधिग्रहण चौथी तिमाही या अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2026-27) की पहली तिमाही में पूरे हो जाएंगे। हमें लगता है कि इनसे अगले वित्त वर्ष के राजस्व में 1.5 प्रतिशत मदद मिलेगी।’
आईटी कंपनियां डाइवर्सिफाई करने और पारंपरिक राजस्व खंड से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही हैं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि धीमी रही है। इसका नतीजा यह भी हुआ है कि उन्होंने उसी समय कमजोर एक अंक की वृद्धि दर्ज की है। टीसीएस भी डेटा सेंटर में डाइवर्सिफाई कर रही है जबकि इन्फोसिस और दूसरी कंपनियां एक वर्टिकल के तौर पर साइबरसिक्योरिटी या भौगोलिक क्षेत्र के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में विस्तार करने पर जोर दे रही हैं।
उन्होंने बताया कि ट्रेडिशनल या पुराने एरिया में खर्च स्थिर रहा है और बिगड़ा नहीं है। कुछ इंडस्ट्री में बहुत ज्यादा तेजी दिख रही है। एक समय बाद खर्च की फिर वापसी होगी। हम ग्रोथ के नए रास्ते खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
एचपीई के साथ यह समझौता एचसीएल टेक को वैश्विक संचार सेवा प्रदाताओं के लिए अपनी इंजीनियरिंग और एआई-आधारित नेटवर्क पेशकश को मजबूत बनाने में मदद करेगा। दूरसंचार व्यवसाय ने राजस्व में 12 प्रतिशत का योगदान दिया और यह 11.7 प्रतिशत की सबसे तेज गति से बढ़ा। दूसरी ओर जैस्परसॉफ्ट को खरीदने से एचसीएल सॉफ्टवेयर के डेटा डिवीजन एक्टियन को अपने मेटाडेटा मैनेजमेंट, डेटा कैटलॉग और डेटा गवर्नेंस सॉल्युशंस की बढ़ती मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।
गार्टनर के विश्लेषक डीडी मिश्रा ने कहा, ‘क्षेत्रीय बाजार में पैठ बनाने और ग्राहक-केंद्रित बदलावों पर एचसीएल टेक का रणनीतिक फोकस डिजिटल बदलाव के प्रति लंबे समय की प्रतिबद्धता की ओर इशारा करता है, जो सिर्फ मजबूत राजस्व वृद्धि पर निर्भर नहीं है।’