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2034 तक ₹190 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा भारतीय खुदरा बाजार; कैसे कंज्यूमर और विक्रेता दोनों इसका उठाएंगे लाभ?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का खुदरा बाजार 2024 में 82 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया, जो 2014 में 35 ट्रिलियन रुपये था।

Last Updated- March 02, 2025 | 4:18 PM IST
Retail market
फोटो क्रेडिट: Pexels

भारतीय खुदरा बाजार 2034 तक 190 ट्रिलियन रुपये से अधिक पहुंचने की उम्मीद है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो खुदरा विक्रेता देश की बढ़ती जनसांख्यिकी और कंज्यूमरओं की लगातार बढ़ती पसंद को अपनाएंगे, वे इससे सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। हर शहर में अलग-अलग तरह के कंज्यूमर होते हैं, जिनकी जरूरतें भी अलग-अलग होती हैं। खुदरा विक्रेताओं को इन अवसरों को पहचान कर यह तय करना होगा कि वे ‘भारत’ और ‘इंडिया’ में कहां और कैसे सफल होना चाहते हैं। यह रिपोर्ट बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा मिलकर तैयार की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का खुदरा बाजार 2024 में 82 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया, जो 2014 में 35 ट्रिलियन रुपये था। यह पिछले एक दशक में 8.9 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है, जो भारत की आर्थिक प्रगति और कंज्यूमर्स की बढ़ती विविधता के चलते संभव हुआ है। भारत में उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति आमतौर पर स्थिर रही है, केवल कोविड-19 महामारी के दौरान इसमें गिरावट आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2034 के बीच उपभोग में सबसे तेज बढ़ोतरी होने की संभावना है।

इस रिपोर्ट में कहा गया, “भारतीय खुदरा बाजार बहुत बड़ा और लगातार बढ़ रहा है, 2034 तक यह 190 ट्रिलियन रुपये से अधिक होने की संभावना है। इस बढ़ोतरी से इस क्षेत्र की मजबूती और तेजी का पता चलता है।”

इस बढ़ोतरी के केंद्र में एक समझदार और अलग-अलग कंज्यूमर्स हैं। लोग अब आर्थिक रूप से संपन्न हो रहे हैं, लेकिन साथ ही, “वैल्यू फॉर मनी” यानी पैसे की कीमत का ध्यान रखना भी उनकी प्राथमिकता बनी हुई है। इसलिए, खुदरा विक्रेताओं को आकांक्षाओं और किफायती दाम के बीच संतुलन बनाना होगा।

हालांकि खुदरा बाजार में अपार अवसर हैं, लेकिन सफलता पाने के लिए कंपनियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

भारतीय खुदरा बाजार की मुश्किलें

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन इसकी आबादी में कई प्रकार के अंतर हैं। यहां एक ओर बढ़ता हुआ मध्यम वर्ग और आर्थिक समृद्धि है, तो दूसरी ओर कीमत को लेकर संवेदनशील कंज्यूमर भी मौजूद हैं। एक ओर डिजिटल रूप से समझदार जनरेशन Z है, तो दूसरी ओर 45 वर्ष से अधिक आयु का एक बड़ा कंज्यूमर वर्ग भी मौजूद है। इसके अलावा, कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या नए खरीदारी व्यवहार को आकार देने में मदद कर रही है।”

कौन से खुदरा विक्रेता सफल हो रहे हैं?

रिपोर्ट के अनुसार, सफल खुदरा विक्रेताओं ने स्पष्ट रूप से उन कंज्यूमर्स को चुना है, जिन पर वे ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।

इसमें कहा गया, “कुछ कंपनियां बड़े पैमाने पर किराना और फास्ट फैशन में बेहतर काम कर रही है और किफायती दामों के चलते सफलता हासिल कर रही हैं, जबकि कुछ अन्य प्रीमियम श्रेणी में स्पेशल प्रोडक्ट, बेहतर इन-स्टोर अनुभव और उन्नत डिजिटल टूल्स के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही हैं।”

First Published - March 2, 2025 | 3:38 PM IST

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