facebookmetapixel
भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच आज रुपया और बॉन्ड खुल सकते हैं कमजोरDMart के शेयरों पर निगाह: पुराने स्टोर और प्रतिस्पर्धा से रेवेन्यू पर असरStocks To Watch Today: Q3 नंबर, ऑर्डर और IPO की खबरें, बाजार खुलते ही आज एक्शन में रहेंगे ये स्टॉक्सवेनेजुएला संकट: भारत के व्यापार व तेल आयात पर भू-राजनीतिक उथल-पुथल से फिलहाल कोई असर नहींसोमनाथ मंदिर: 1026 से 2026 तक 1000 वर्षों की अटूट आस्था और गौरव की गाथाT20 World Cup: भारत क्रिकेट खेलने नहीं आएगी बांग्लादेश की टीम, ICC से बाहर मैच कराने की मांगसमान अवसर का मैदान: VI को मिलने वाली मदद सिर्फ उसी तक सीमित नहीं होनी चाहिए1985–95 क्यों आज भी भारत का सबसे निर्णायक दशक माना जाता हैमनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बना, विकसित भारत-जी राम-जी मजदूरों के लिए बेहतर: शिवराज सिंह चौहानLNG मार्केट 2025 में उम्मीदों से रहा पीछे! चीन ने भरी उड़ान पर भारत में खुदरा बाजार अब भी सुस्त क्यों?

कैंसर से निपटने की तैयारी, पीपीपी से सेहतमंद होंगे अस्पताल

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन साल के भीतर सभी जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर केंद्र स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है और 200 केंद्र साल 2025-26 में खोले जाएंगे।

Last Updated- February 03, 2025 | 8:23 AM IST
Cancer
Representative image

भारत अगले तीन साल के दौरान जिला अस्पतालों में 4,500 से ज्यादा कैंसर डेकेयर बेड जोड़ने की तैयारी में है। इससे इनमें भी लगभग निजी क्षेत्र जितने ही बेड उपलब्ध हो जाएंगे। हालांकि विशेषज्ञों ने चेताया है कि इन बेड के प्रबंधन के लिए मानवशक्ति चुनौती हो सकती है। इसके लिए सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) और हब-ऐंड-स्पोक डिलिवरी मॉडल विकसित किया जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीन साल के भीतर सभी जिला अस्पतालों में डेकेयर कैंसर केंद्र स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है और 200 केंद्र साल 2025-26 में खोले जाएंगे।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि हर जिला अस्पताल में करीब छह बेड की योजना है। जून 2024 तक भारत में करीब 759 जिला अस्पताल हैं जिससे तीन साल में कुल बेड संख्या 4,554 पहुंच सकती है। साल 2025-26 में ही लगभग 1,200 डेकेयर बेड चालू हो जाएंगे। यह संख्या काफी बड़ी है और प्रभावशाली हो सकती है क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर का लगभग 70 प्रतिशत इलाज डे-केयर तरीके के जरिये किया जा सकता है।

हेल्थकेयर ग्लोबल एंटरप्राइजेज (एचसीजी) के कार्यकारी चेयरमैन डॉ. बीएस अजय कुमार ने कहा कि फिलहाल निजी क्षेत्र में करीब 6,000 कैंसर बेड हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई मल्टी-स्पैशलिटी अस्पतालों में विशेष रूप से निर्धारित कैंसर बेड नहीं हैं और अधिकांश उपचार बाह्य-रोगी वाले तरीके में होता है। इसलिए निजी क्षेत्र की क्षमता वास्तव में बदलती रहती है और इस समय यह 8,000 बेड तक हो सकती है। बाजार की अगुआ एचसीजी के पास लगभग 2,000 बेड हैं।

भारत को प्रति 1,00,000 लोगों पर मोटे तौर पर 100.4 मामलों की दर के साथ कैंसर उपचार के बुनियादी ढांचे की सख्त जरूरत है। अनुमान है कि देश में लगभग नौ में से एक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर के निदान का सामना करना पड़ता है। साल 2020 की तुलना में साल 2025 तक कैंसर के मामलों में अनुमानित रूप से 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होने के आसार हैं। आईसीएमआर-एनसीडीआईआर (नैशनल सेंटर फॉर डिजीज इन्फॉर्मेटिक्स ऐंड रिसर्च) के अनुसार अनुमानित रूप से देश में कैंसर का बोझ साल 2021 के 2.67 करोड़ डिसेबिलिटी एडजस्टेड जीवन वर्ष (घटना के लिए समायोजित मृत्यु दर) से बढ़कर साल 2025 में 2.98 करोड़ होने के आसार हैं। गैर-संचारी रोगों में हृदय रोग की मृत्यु दर (63.3 प्रतिशत) में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी रहती है। इसके बाद कैंसर (18.1 प्रतिशत) का स्थान आता है।

First Published - February 3, 2025 | 8:23 AM IST

संबंधित पोस्ट