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लेखक : सुरिंदर सूद

आज का अखबार, लेख

सागौन बना किसानों की कमाई का नया सहारा, दौलत बढ़ाने वाली फसल पर बढ़ा भरोसा

सागौन के वृक्ष जो आमतौर पर जंगलों में उगते हैं, अब कृषि वानिकी के केंद्र में आ रहे हैं। उन्हें किसानों के लिए एक दीर्घकालिक संपदा तैयार करने वाला विकल्प माना जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसकी मांग बहुत अधिक है और तेजी से बढ़ रही है। इसकी कीमतें भी बहुत अधिक हैं […]

आज का अखबार, लेख

Mission SEHAT: पोषण सुरक्षा के लिए कृषि और स्वास्थ्य को जोड़ेगी नई पहल

देश में भरपूर खाद्यान्न उत्पादन से खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के बाद अगला अहम कदम पोषण सुरक्षा पर ध्यान देना है। इसका मकसद खराब या कुपोषण से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं दूर करना है। इसके लिए कृषि और स्वास्थ्य मंत्रालयों की नीतियों और कार्यक्रमों को एक साथ लाने और दोनों के बीच तालमेल बैठाने की जरूरत […]

आज का अखबार, लेख

अरबों वर्ष पुराना प्राकृतिक सुपरफूड स्पाइरुलिना, तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

संपूर्ण पोषण का एक अद्भुत स्रोत वास्तव में न तो कोई अनाज है और न ही मांसाहारी खाद्य पदार्थ। इसमें सभी आवश्यक अमीनो अम्ल, महत्त्वपूर्ण विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह एक जलीय जीव है, जो सूर्य की ऊर्जा से प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार करता है। यह […]

आज का अखबार, लेख

चूल्हे से आगे: भारत के कृषि भविष्य में महिला किसानों की अहम भूमिका को पहचान देने की जरूरत

संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किया है। इसका उद्देश्य कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में महिलाओं द्वारा निभाई जाने वाली विविध भूमिकाओं को रेखांकित करना है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इसका उद्देश्य उन असमानताओं की ओर ध्यान आकृष्ट करना भी है जिनका सामना महिलाओं  को मजदूरी की दरों, संसाधनों […]

आज का अखबार, ताजा खबरें, लेख

खेती में बड़ा बदलाव: फसलों से आगे निकला पशुपालन और बागवानी, दूध बना देश की सबसे बड़ी ‘कैश क्रॉप’

भारतीय कृषि हरित क्रांति के बाद से निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। वह धीरे-धीरे, लेकिन लगातार बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और कृषि-वानिकी जैसे उच्च मूल्य वाले और संभावित रूप से अधिक लाभकारी संबद्ध क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। फसल खेती की तुलना में इन क्षेत्रों की उच्च […]

आज का अखबार, लेख

भूख के साथ पोषण की समस्या का भी हो निदान: फंडिंग और नीतिगत प्रोत्साहन बेहद जरूरी

अ​धिक उपज वाली अनाज की आधुनिक किस्में पारंपरिक देसी फसलों की तुलना में क्या कम पौष्टिक होती हैं? यह एक आम धारणा है जो काफी हद तक सही है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इस धारणा का समर्थन किया गया है। हरित क्रांति के बाद के शुरुआती कुछ दशकों में अ​धिक उपज वाली फसलों की […]

आज का अखबार, लेख

भूली-बिसरी फसलें बन सकती हैं भारत की फूड सिक्योरिटी और क्लाइमेट चैलेंज का जवाब

दुनिया में लगभग 7,000 पादप प्रजातियों का इस्तेमाल मानव भोजन के रूप में होता रहा है। मगर अब उनमें केवल लगभग 150 प्रजातियां ही बड़े पैमाने पर उगाई जा रही हैं और केवल 30 प्रजातियां लोगों की पोषण से जुड़ी अधिकांश जरूरतें पूरी कर रही हैं। वास्तव में कुल आहार में 60 फीसदी से अधिक […]

आज का अखबार, लेख

भारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयार

भारत का निर्यातोन्मुख झींगा उद्योग अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्कों से उत्पन्न चुनौती को अवसर में परिवर्तित करने के लिए तैयार दिख रहा है। वह अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने और अमेरिका से इतर बाजारों में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास में लग गया है। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति पहले ही हो चुकी […]

आज का अखबार, लेख

दलहन उत्पादन बढ़ाने की इच्छा कम: प्रतिस्पर्धी फसलों के मुकाबले कमजोर मुनाफा

दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना दशकों से एक काफी चर्चित मगर पहुंच से दूर लक्ष्य रहा है। दलहन फसलें देश में लोगों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन दलहन की जरूरत एवं मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। मांग और आपूर्ति […]

आज का अखबार, लेख

कृषि को लाभदायक बिजनेस बनाने के लिए ज्यादा ऑटोमेशन की आवश्यकता

कृषि उपकरणों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को 12-18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिए जाने के कारण इनकी कीमतें कम हो गई हैं। इससे भारतीय कृषि में मशीनीकरण को आवश्यक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। खेतों में काम हाथ से करने के बजाय मशीनों से करना मानव श्रम पर निर्भरता कम करने […]

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