खेती में बड़ा बदलाव: फसलों से आगे निकला पशुपालन और बागवानी, दूध बना देश की सबसे बड़ी ‘कैश क्रॉप’
भारतीय कृषि हरित क्रांति के बाद से निरंतर परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। वह धीरे-धीरे, लेकिन लगातार बागवानी, पशुपालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और कृषि-वानिकी जैसे उच्च मूल्य वाले और संभावित रूप से अधिक लाभकारी संबद्ध क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। फसल खेती की तुलना में इन क्षेत्रों की उच्च […]
भूख के साथ पोषण की समस्या का भी हो निदान: फंडिंग और नीतिगत प्रोत्साहन बेहद जरूरी
अधिक उपज वाली अनाज की आधुनिक किस्में पारंपरिक देसी फसलों की तुलना में क्या कम पौष्टिक होती हैं? यह एक आम धारणा है जो काफी हद तक सही है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में भी इस धारणा का समर्थन किया गया है। हरित क्रांति के बाद के शुरुआती कुछ दशकों में अधिक उपज वाली फसलों की […]
भूली-बिसरी फसलें बन सकती हैं भारत की फूड सिक्योरिटी और क्लाइमेट चैलेंज का जवाब
दुनिया में लगभग 7,000 पादप प्रजातियों का इस्तेमाल मानव भोजन के रूप में होता रहा है। मगर अब उनमें केवल लगभग 150 प्रजातियां ही बड़े पैमाने पर उगाई जा रही हैं और केवल 30 प्रजातियां लोगों की पोषण से जुड़ी अधिकांश जरूरतें पूरी कर रही हैं। वास्तव में कुल आहार में 60 फीसदी से अधिक […]
भारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयार
भारत का निर्यातोन्मुख झींगा उद्योग अमेरिका द्वारा लगाए गए जवाबी शुल्कों से उत्पन्न चुनौती को अवसर में परिवर्तित करने के लिए तैयार दिख रहा है। वह अपने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने और अमेरिका से इतर बाजारों में आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास में लग गया है। इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति पहले ही हो चुकी […]
दलहन उत्पादन बढ़ाने की इच्छा कम: प्रतिस्पर्धी फसलों के मुकाबले कमजोर मुनाफा
दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना दशकों से एक काफी चर्चित मगर पहुंच से दूर लक्ष्य रहा है। दलहन फसलें देश में लोगों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत हैं। लेकिन दलहन की जरूरत एवं मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता कम होने के बजाय बढ़ती ही जा रही है। मांग और आपूर्ति […]
कृषि को लाभदायक बिजनेस बनाने के लिए ज्यादा ऑटोमेशन की आवश्यकता
कृषि उपकरणों पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को 12-18 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिए जाने के कारण इनकी कीमतें कम हो गई हैं। इससे भारतीय कृषि में मशीनीकरण को आवश्यक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। खेतों में काम हाथ से करने के बजाय मशीनों से करना मानव श्रम पर निर्भरता कम करने […]
भारतीय मसालों का अतीत और वर्तमान: ग्लोबल बाजारों में जगह बनाने के लिए और प्रयास करें
भारत का मसाला क्षेत्र लंबे समय से काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। वर्ष 2024-25 में इसने न केवल उत्पादन बल्कि निर्यात में भी नया रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन इस क्षेत्र के और विस्तार के लिए अभी कुछ कमियां दूर करने की जरूरत है। पिछले एक दशक में मसालों का उत्पादन करीब 60 लाख टन […]
2026 को सोया वर्ष बनाने का अनुरोध, सोयाबीन क्षेत्र को नया जीवन देने की तैयारी
सोयाबीन उद्योग ने सरकार से 2026 को ‘सोया वर्ष’ घोषित करने का अनुरोध किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के निकायों एवं अनुसंधान संगठनों सहित सभी हितधारकों ने इसका समर्थन किया है। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब सोयाबीन क्षेत्र मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सोयाबीन का वार्षिक उत्पादन लगभग […]
मिट्टी से जुड़ा दूध: विवादों के बावजूद ‘वीगन मिल्क’ की बढ़ रही लोकप्रियता
सामान्य दूध की तरह दिखने वाला वनस्पति आधारित अनूठा पेय, जिसे आमतौर पर वीगन मिल्क भी कहा जाता है, आजकल भारत सहित पूरी दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लेकिन डेरी किसान इसे गाय के दूध की तरह पोषक मानने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि गौवंश के दूध में ऐसे […]
लहलहाती रहे चावल की फसल: भारत की सफलता में तकनीक और नीतियों की भूमिका
भारत ने 14.9 करोड़ टन से अधिक के अनुमानित चावल उत्पादन के साथ दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक के रूप में अपनी जगह बनाई है और इस कारण चीन दूसरे स्थान पर आ गया है। सबसे ज्यादा खपत होने वाले अनाज में चावल शुमार है। भारत वर्ष 2012 से ही चावल का शीर्ष निर्यातक […]









