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लेखक : शंकर आचार्य

आज का अखबार, लेख

चार फीसदी घाटे के साथ व्यापार समझौतों पर ध्यान

नया वर्ष शुरू हो गया है और कुछ ही दिन में केंद्र सरकार का बजट भी आने वाला है। 2025-26 का बजट गजब के अनिश्चित वैश्विक माहौल में तैयार किया जा रहा है। डॉनल्ड ट्रंप जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेंगे। अमेरिका दुनिया की इकलौती महाशक्ति हैं, जिसकी वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद […]

आज का अखबार, लेख

नब्बे के दशक में मनमोहन सिंह के आर्थिक सुधार

भारत में आर्थिक सुधारों की बुनियाद रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर सभी क्षेत्रों के लोगों ने गहरा दुख जताया। अर्थशास्त्रियों के साथ राजनेताओं, अधिकारियों और पत्रकारों ने भी सिंह की असाधारण प्रतिभा को नमन किया और शोक प्रकट किया। प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव का पूरा समर्थन मिलने पर सिंह ने […]

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म्यांमार के हालात और भारत की भूमिका…

पड़ोसी देश म्यांमार में छिड़े गृह युद्ध के हालिया रुझान यह बताते हैं कि भारत को वहां की सैन्य शासन विरोधी ताकतों के साथ अपने संपर्क को मजबूत करने की आवश्यकता है। बता रहे हैं शंकर आचार्य म्यांमार और भारत के बीच करीब 1,600 किलोमीटर की साझा सीमा है। यह पूर्वोत्तर के चार राज्यों मणिपुर, […]

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चुनौती से भरा होगा तेज वृद्धि को बरकरार रखना

हाल के महीनों में हमें भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के बारे में काफी कुछ सुनने को मिला। यह निश्चित तौर पर बहुत महत्त्वपूर्ण लक्ष्य है जो न केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य सामने रखता है बल्कि समग्र सामाजिक विकास के कई अन्य पहलू भी इससे जुड़े हुए हैं। आर्थिक विकास के संकीर्ण […]

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Opinion: आबादी और आय में फर्क पर विकासशील का तर्क

ग्लोबल साउथ (विकासशील या अल्पविकसित देशों का समूह) जुमले का पहला इस्तेमाल कार्ल ऑग्लेस्बी ने कॉमनवील नामक पत्रिका के सन 1969 के विशेष अंक में किया था जो वियतनाम युद्ध पर केंद्रित था। इसे सन 1980 में जर्मनी के पूर्व चांसलर विली ब्रांड की रिपोर्ट ‘नॉर्थ साउथ: अ प्रोग्राम फॉर सरवाइवल’ से ख्याति मिली। इस […]

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दुनिया 2024 में अधिक मुश्किलों से घिरी होगी?

जैसे-जैसे आर्थिक चिंताओं और भू-राजनीतिक तनावों में इजाफा हो रहा है वैसे-वैसे हमें जलवायु, राजनीति और अन्य मोर्चों पर मुश्किल हालात के लिए तैयार रहना चाहिए। बता रहे हैं शंकर आचार्य लगातार तीसरे वर्ष वैश्विक आर्थिक वृद्धि पिछले वर्ष से कमजोर रहेगी। कम से कम अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अक्टूबर और आर्थिक सहयोग एवं […]

आज का अखबार, लेख

सबसे खुशकिस्मत था 1940-50 का दौर

सन 1940-50 के दौर में जन्मे लोग शायद उस दौर के लिए सबसे खुशकिस्मत रहे होंगे। जरा विचार कीजिए कि उस समय विश्व स्तर के सकारात्मक रुझानों ने उन्हें किस कदर लाभान्वित किया होगा। दूसरे विश्व युद्ध के समापन के बाद 78 वर्षों तक कोई वैश्विक संघर्ष नहीं हुआ। आधिकारिक तौर पर यह विश्व शांति […]

आज का अखबार, लेख

अफीम के इतिहास से झांकता अर्थशास्त्र

लगभग 50 वर्ष पहले तक पश्चिमी जगत में पारंपरिक सोच यह थी कि उनके देशों में सन् 1700 से हुई आर्थिक प्रगति में मुख्य रूप से वैज्ञानिक अन्वेषण, तकनीकी नवाचार, उद्यमशीलता और वस्तु, पूंजी, श्रम के निर्बाध आदान-प्रदान की प्रमुख भूमिका रही है। हालांकि, पिछले 50 वर्षों के दौरान हुए नए तथ्यपरक अध्ययन से यह […]

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वैश्विक पटल पर कितनी मजबूत स्थिति में है भारत?

पिछले कुछ महीनों में कई विदेशी एवं घरेलू पत्रिकाओं, समाचारपत्रों और टीकाकारों ने आर्थिक वृद्धि और भू-राजनीतिक दोनों संदर्भों में भारत की सराहना करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इसका एक प्रमुख उदाहरण लंदन इकॉनमिस्ट का 17 जून, 2023 को प्रकाशित अंक था, जिसमें लगभग आधा दर्जन पृष्ठ भारत से जुड़े इन दोनों विषयों […]

आज का अखबार, लेख

Opinion: वर्ष के मध्य में वैश्विक परिदृश्य

तेजी से बदलती परिस्थितियों के बीच दुनिया में आर्थिक एवं सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। बता रहे हैं शंकर आचार्य दिसंबर में इस समाचार पत्र में मैंने अपने स्तंभ में अनुमान जताया था कि कैलेंडर वर्ष 2023 वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था दोनों के लिए 2022 से भी बदतर साबित होगा। वर्तमान […]

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