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रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया: डॉलर के मुकाबले 91 के पार फिसली भारतीय मुद्रा, निवेशक सतर्क

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दिन के आ​खिर तक रुपया मामूली सुधार के साथ पिछले बंद स्तर 90.73 प्रति डॉलर के मुकाबले 91.03 प्रति डॉलर पर स्थिर हो गया

Last Updated- December 16, 2025 | 10:33 PM IST
Rupee vs Dollar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

लगातार विदेशी पूंजी की निकासी और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में हो रही देरी के दबाव में रुपया आज 91 प्रति डॉलर के स्तर को पार करते हुए 91.09 के नए निचले स्तर तक लुढ़क गया। महज 9 कारोबारी सत्रों में रुपया 90 प्रति डॉलर से लुढ़ककर 91 प्रति डॉलर पर आ गया।

दिन के आ​खिर तक रुपया मामूली सुधार के साथ पिछले बंद स्तर 90.73 प्रति डॉलर के मुकाबले 91.03 प्रति डॉलर पर स्थिर हो गया। ए​शियाई मुद्राओं के बीच रुपया का प्रदर्शन फिलहाल सबसे खराब है। साल 2025 में अब तक रुपये में 5.95 फीसदी की गिरावट आई है। दिसंबर के पहले दो सप्ताह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की है।  

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि वै​श्विक स्तर पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि के साथ-साथ बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत दर में वृद्धि की बढ़ती उम्मीदों के कारण येन-फंडेड कैरी ट्रेड में कमी आई है। इससे रुपये सहित उभरते बाजार की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।

कोटक सिक्योरिटीज के प्रमुख (मुद्रा एवं कमोडिटी अनुसंधान) अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ‘रुपया 91 के स्तर को पार करते हुए नए सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया है। इससे रुपया दुनिया की सबसे कमजोर प्रमुख मुद्राओं में शामिल हो गया और यह एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा बन गया है। मुख्य तौर पर तीन कारणों यानी धारणा, पूंजी प्रवाह और वृहद आर्थिक परिदृश्य से मुद्रा पर दबाव होता है।’ उन्होंने कहा, ‘विश्व स्तर पर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और बैंक ऑफ जापान द्वारा दर में वृद्धि की उम्मीदों के कारण येन कैरी ट्रेड में कमी आई है। इससे इक्विटी, ऋण, क्रिप्टो और कुछ कमोडिटी में जोखिम से बचने की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे रुपये सहित उभरते बाजार की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया है।’

बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि निकट भविष्य में रुपये के लिए 90 प्रति डॉलर का स्तर महत्त्वपूर्ण रहेगा जबकि 91.25 प्रति डॉलर एक महत्त्वपूर्ण प्रतिरोध के रूप में काम करेगा। ऐसा लगता है कि आरबीआई ने जानबूझकर अब तक अपेक्षाकृत संयमित हस्तक्षेप किया है। दमदार वृद्धि और मुद्रास्फीति में ​लगभग स्थिरता के साथ नीति निर्माता मुद्रा में कुछ हद तक गिरावट को सहन करने में सहज हो सकते हैं। 

आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयनका ने कहा, ‘जब तक पोर्टफोलियो प्रवाह में स्पष्ट बदलाव या व्यापार एवं वैश्विक जोखिम के मोर्चे पर कोई सकारात्मक उत्प्रेरक नहीं दिखेगा, तब तक डॉलर बनाम रुपये पर दबाव बने रहने की आशंका है।’

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First Published - December 16, 2025 | 10:33 PM IST

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