Editorial: नाटो की 75वीं वर्षगांठ, परीक्षा की घड़ी
वॉशिंगटन में आयोजित उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित शिखर सम्मेलन में तीन मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी। परंतु वहां चीन का मुद्दा ही केंद्र में रहा। यह बात शिखर बैठक के बाद की गई घोषणा में भी नजर आई जहां चीन का अभूतपूर्व जिक्र देखने को […]
संपादकीय: गरीबी से निजात
हाल के वर्षों के विभिन्न अनुमानों से यह संकेत मिलता है कि देश में गरीबी के स्तर में काफी कमी आई है। अगर गरीबी के दायरे में आने वाले परिवारों को बचाया जा सका तो परिणाम और बेहतर होंगे। नैशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च ने इस बारे में एक नया शोध पत्र प्रकाशित किया […]
संपादकीय: देश में रोजगार की स्थिति
देश की अर्थव्यवस्था (Economy) में रोजगार (Job) और आय हमेशा से अहम मुद्दे रहे हैं। रोजगार एक जरूरी राजनीतिक मुद्दा है और सरकारों का पर्याप्त रोजगार तैयार नहीं कर पाना उन्हें चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है। इस संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी केएलईएमएस (पूंजी, श्रम, ऊर्जा, पदार्थ और सेवा) डेटाबेस एक नई […]
संपादकीय: किसानों को सक्षम बनाना
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने हाल ही में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को लेकर राष्ट्रीय मसौदा नीति जारी की। इसका लक्ष्य मौजूदा एफपीओ को मजबूत बनाना और नए एफपीओ के निर्माण और उन्हें प्रोत्साहन देने का काम करना है। एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने का इरादा है जहां बेहतर आय दिलाने वाली खेती और […]
संपादकीय: उपभोक्ताओं का सशक्तीकरण
गत सप्ताह एक स्वागतयोग्य घटनाक्रम में भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य संरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और प्रदर्शन) नियमन 2020 को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके तहत खाद्य पदार्थों में नमक, शक्कर और संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) के बारे में मोटे अक्षरों में जानकारी देनी होगी। ऐसा नहीं है कि पैकेटबंद खाद्य […]
संपादकीय: जारी हों जीएसटी के आंकड़े
जून 2024 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का कुल संग्रह 1.74 लाख करोड़ रुपये रहा जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7.7 फीसदी अधिक है। परंतु इस जानकारी को सामान्य तरीके से यानी ब्योरों के साथ प्रेस विज्ञप्ति की मदद से नहीं जारी किया गया। इस बार कर संग्रह के आंकड़ों […]
पर्यावरण के अनुकूल बदलाव की राह में जटिलताएं
जीवाश्म ईंधन पर कर में कमी आने के बीच नया राजस्व उत्पन्न करने के क्षेत्र में नाकामी भारत की आर्थिक संभावनाओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। बता रहे हैं लवीश भंडारी अब जबकि जलवायु परिवर्तन की जटिलताएं सामने आने लगी हैं और भारत कम कार्बन उत्सर्जन तथा अपेक्षाकृत हरित अर्थव्यवस्था की दिशा में […]
संपादकीय: कौशल की कमी दूर करना जरूरी
भारत के रोजगार क्षेत्र का एक बड़ा विरोधाभास यह है कि जहां एक ओर बेरोजगारी बड़ी चुनौती बनी हुई है, वहीं देश के संभावित बड़े नियोक्ताओं की शिकायत है कि उन्हें काम करने के लिए श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। गत सप्ताह लार्सन ऐंड टुब्रो (L&T) के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन ने कहा कि इंजीनियरिंग […]
संपादकीय: राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी सलाहकार समिति का पुनर्गठन…आंकड़ों का गणित
केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (एसीएनएएस) सलाहकार समिति का पुनर्गठन किया है। ऐसा विभिन्न सूचकांकों के लिए आधार वर्ष को संशोधित करने और सांख्यिकीय सटीकता बढ़ाने के लिए नए डेटा स्रोतों को शामिल करने के लिए किया गया है। गजट अधिसूचना के अनुसार इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ के पूर्व प्रोफेसर विश्वनाथ […]
Editorial: सतत विकास लक्ष्यों पर भारत की प्रगति: चुनौतियां और अवसर
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के 2030 के एजेंडे के एक हिस्से, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने में छह वर्ष से भी कम समय शेष रह गया है। ऐसे में इसके 17 लक्ष्यों और 169 संबद्ध लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत को अभी बहुत प्रयास करने की आवश्यकता है। इन वैश्विक […]









