देश में दिल और डायबिटीज जैसी बीमारियों से जुड़ी दवाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है और इसका सीधा असर भारत के दवा बाजार पर दिखाई दे रहा है। फरवरी 2026 में भारतीय फार्मा बाजार (IPM) ने मजबूत रफ्तार पकड़ी और सालाना आधार पर करीब 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट के मुताबिक यह ग्रोथ जनवरी 2026 के 12 प्रतिशत के बराबर रही और पिछले साल फरवरी 2025 की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत है, जब बाजार की बढ़त सिर्फ 4 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के अनुसार खास तौर पर कार्डियक, डायबिटीज, विटामिन-मिनरल और न्यूरो से जुड़ी दवाओं की बढ़ती मांग ने पूरे बाजार को तेज गति दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस तेज बढ़त के पीछे कुछ खास थेरेपी सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा। दिल की बीमारी (Cardiac), डायबिटीज (Anti-Diabetic), विटामिन-मिनरल (VMN) और न्यूरो से जुड़ी दवाओं की बिक्री में मजबूत तेजी देखी गई। इन दवाओं की मांग पूरे फार्मा बाजार की औसत वृद्धि से ज्यादा रही, जिसकी वजह से बाजार की कुल ग्रोथ को भी मजबूती मिली।
लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों यानी क्रॉनिक सेगमेंट की दवाओं की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। फरवरी 2026 में क्रॉनिक थेरेपी की दवाओं की बिक्री सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत बढ़ी। वहीं एक्यूट सेगमेंट, जिसमें बुखार, संक्रमण और छोटी अवधि की बीमारियों की दवाएं शामिल होती हैं, उसमें भी 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।
आईक्यूविया (IQVIA) के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में माउनजारो (Mounjaro) सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा रही। इसकी बिक्री लगभग ₹120 करोड़ दर्ज की गई। इसके बाद फोराकॉर्ट (Foracort) दूसरे स्थान पर रही, जिसकी बिक्री करीब ₹90 करोड़ रही और इसमें सालाना आधार पर लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। हालांकि मिक्सटार्ड (Mixtard) की बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई और इसमें करीब 36 प्रतिशत की कमी आई।
फरवरी में कई बड़ी फार्मा कंपनियों ने बाजार की औसत ग्रोथ से बेहतर प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार इंटास, अजंता फार्मा, सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और इप्का जैसी कंपनियों की बिक्री में मजबूत वृद्धि देखी गई। इंटास की बिक्री करीब 20.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अजंता फार्मा की बिक्री 15.5 प्रतिशत और सन फार्मा की बिक्री 14.6 प्रतिशत बढ़ी। इसी तरह डॉ. रेड्डीज में 14.3 प्रतिशत और इप्का में 14.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दूसरी ओर अलेम्बिक, एमक्योर और मैनकाइंड जैसी कंपनियों की ग्रोथ अपेक्षाकृत धीमी रही।
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अगर पिछले 12 महीनों के आंकड़ों को देखें तो भारतीय फार्मा बाजार ने कुल मिलाकर लगभग 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। इस दौरान खास तौर पर दिल, डायबिटीज और सांस से जुड़ी बीमारियों की दवाओं की मांग सबसे तेजी से बढ़ती दिखाई दी, जिसने पूरे सेक्टर की ग्रोथ को सहारा दिया।
भारतीय दवा बाजार में अभी भी घरेलू कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। फरवरी 2026 तक कुल बाजार में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 84 प्रतिशत रही, जबकि बाकी हिस्सा बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के पास है। हालांकि इस बार ग्रोथ के मामले में MNC कंपनियों की वृद्धि 16.7 प्रतिशत रही, जो भारतीय कंपनियों की 11.6 प्रतिशत ग्रोथ से ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक दवाओं की बढ़ती मांग और क्रॉनिक बीमारियों में बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में भी भारतीय फार्मा बाजार की रफ्तार मजबूत बनी रह सकती है।