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लेखक : अमित टंडन

आज का अखबार, लेख

टेस्ला और ओपनएआई विवाद: भारत के लिए गवर्नेंस के दो बड़े सबक

इस महीने की शुरुआत में टेस्ला के शेयरधारकों ने ईलॉन मस्क को 1 लाख करोड़ डॉलर रुपये का सालाना शेयर पैकेज दिए जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। मस्क के लिए टेस्ला की तरफ से प्रस्तावित यह भारी भरकम पैकेज महज सुर्खियां बटोरने वाला कोई घटनाक्रम नहीं हैं। यह कई ऐसे सवाल खड़े करता […]

आज का अखबार, लेख

शेयरधारकों के हितों को वरीयता देने की जरूरत

भारतीय कंपनियों में स्वामित्व ढांचा देश में कंपनी संचालन की दशा-दिशा पर व्यापक प्रभाव डालता रहा है। बीएसई 100 सूचकांक में लगभग 65 फीसदी कंपनियां परिवार नियंत्रित या परिवार संचालित हैं। प्रमुख सूचकांकों से इतर दूसरे सूचकांकों में ऐसी कंपनियों की तादाद और अधिक है जहां परिवार का नियंत्रण अधिक होता है। निफ्टी 500 सूचकांक […]

आज का अखबार, कंपनियां, लेख

वर्ष 2025 में निदेशक मंडलों का एजेंडा

नया साल यानी 2025 उथल-पुथल भरा रह सकता है। ऐसे में निदेशक मंडलों (बोर्ड) पर अपनी कंपनियों को इस नए साल में नई चुनौतियों से उबारने की जिम्मेदारी होगी। नीचे कुछ प्रमुख मुद्दों की चर्चा की जा रही है जो बोर्ड की कार्यसूची या उनके कामकाज में शीर्ष पर रह सकते हैं। भू-राजनीतिः निदेशक मंडलों […]

आज का अखबार, लेख

अदाणी मामला और भारत के समक्ष अवसर

अमेरिका के न्याय विभाग और प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और छह अन्य लोगों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने भारत में अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी और इस बात को अमेरिकी निवेशकों से छिपाया। इन आरोपों से इनकार किया गया है और कहा गया है […]

ऑटोमोबाइल, लेख

बोर्ड के बेहतर कामकाज में समितियों का अहम योगदान

समितियां बोर्ड के लिए खास होती हैं, इसलिए जरूरी है कि वे बोर्ड की भावी प्राथमिकताओं तथा कंपनी की आवश्यकताओं को पूरा करने के मकसद से काम करें। बता रहे हैं अमित टंडन अब कारोबार का काम अधिक से अधिक मुनाफा कमाना ही नहीं रह गया है। उसका काम शेयरधारकों और सभी हितधारकों के लिए […]

आज का अखबार, लेख

टिकाऊ विकास के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा जरूरी, NSE-500 कंपनियों के BRSR आंकड़े पेश करते हैं चिंताजनक तस्वीर

विनिर्माण के गढ़ के रूप में भारत का उभार काफी हद तक भूराजनीतिक बदलावों के कारण है क्योंकि दुनिया भर के कारोबार अपनी आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने का प्रयास कर रहे हैं। किंतु इस उभार या कायाकल्प की बुनियाद वैश्विक बदलावों के पहले ही रखी जा चुकी थी, खास तौर पर 2014 में ‘मेक […]

आज का अखबार, लेख

नियामकीय कदम और इकाइयों पर प्रभाव

हम प्रायः देखते हैं कि नियामकों द्वारा वित्तीय इकाइयों के ‘बहीखाते जब खंगाले’ जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होती है। हाल में नियामकों ने कुछ वित्तीय इकाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाए और उन्हें ऑनलाइन माध्यम से खाता खोलने, को-ब्रांड कार्ड जारी करने, मोबाइल ऐप के माध्यम से नई योजनाएं पेश करने और डेट […]

आज का अखबार, लेख

कंपनियों के लिए अहम है AI की स्वीकार्यता

तेजी से बदलते कारोबारी माहौल में प्रासंगिक बने रहने के लिए कंपनियों के निदेशक मंडल (बोर्ड) को अक्सर तकनीकी प्रगति अपनाने के लिए बाध्य होना पड़ता है। क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल बदलाव जैसे नवाचार बेहद क्रांतिकारी पहल है लेकिन ब्लॉकचेन जैसे अन्य नवाचारों को अभी व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। अब इसमें […]

आज का अखबार, लेख

निवेशकों के भरोसे के लिए जरूरी स्टार्टअप की बेहतर शासन प्रणाली

स्टार्टअप हमारी नजर में तब आती हैं जब उनके बढ़ते मूल्यांकन के आधार पर जश्न मनाया जाता है या जब उनके मूल्यांकन में कमी आती है। तीन साल पहले इस तरह का जश्न थमने का नाम नहीं ले रहा था और इनके मूल्यांकन में लगातार बढ़ोतरी दिख रही थी। हर दूसरे दिन एक नया सूनीकॉर्न […]

आज का अखबार, लेख

उपयुक्त एवं सक्षम बोर्ड का गठन होगा चुनौतीपूर्ण

किसी कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) की संरचना नियामकीय आवश्यकताओं और कंपनी की अपनी आवश्यकताओं के आपसी संबंधों पर निर्भर करती है। मगर पिछले एक दशक के दौरान निदेशक मंडल स्पष्ट और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में बदल गए हैं। यह बदलाव कंपनी अधिनियम 2013, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड नियमन (सूचीबद्धता अनिवार्यता एवं उद्घोषणा आवश्यकता), […]

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