अनुबंध के मुताबिक आरआईएल के पास सिर्फ वही क्षेत्र रह सकते हैं जहां खोज हुई है और उसने इस क्षेत्र के 7,645 वर्ग किलोमीटर में से 5,367 वर्ग किलोमीटर दायरे को छोड़ने की पेशकश की थी।
लेकिन हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय :डीजीएच: आरआईएल से इसके अलावा और 1,130 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र वापस चाहता है। इस क्षेत्र में आठ खोज हुई हैं। डीजीएच के अनुसार इस क्षेत्र को विकसित करने की समयसीमा खत्म हो गई है।
आरआईएल ने पेट्रोलियम मंत्री एम वीरप्पा मोइली और उनके मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष दिये गये प्रस्तुतीकरण में कहा कि उसने उत्पादन बंटवारा अनुबंध का जरा भी उल्लंघन नहीं किया है और उसके पास 1,130 वर्ग किलोमीटर का दायरा अपने पास रखने का अधिकार है।
कंपनी ने कहा कि यदि डीजीएच इस इलाके को लेकर नीलाम करना चाहती है तो नयी कंपनी यहां से आठ से 10 साल से पहले उत्पादन नहीं कर सकेगी।
दूसरी ओर आरआईएल ने छोटी और सीमांत खोजों को क्षेत्र की दूसरी खोज के साथ एकीकृत करने की योजना बनाई है क्योंकि ये छोटी हैं और अलग-अलग हैं इनका परिचालन अव्यवहारिक है। कंपनी ने 2017-18 से यहां से परिचालन शुरू करने की योजना बनाई है।
क्षेत्र के 1,130 वर्ग किलोमीटर में जहां आठ खोज जुई हैं, डीजीएच ने निवेश योजना पर विचार करने से इनकार कर दिया है। डीजीएच ने कहा है कि 4.2 डालर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट को मौजूदा मूल्य पर यहां से उत्पादन वहनीय नहीं होगा।
भाषा