अपने पत्र में सरकार ने राष्ट्रीय प्रसारक के मामलों में मंत्रालय के हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया। माना जाता है कि प्रसार भारती ऐसा संगठन है जो अपने क्रियाकलापों में स्वायत्त है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि सरकार ने अपने पत्र में अन्य मुद्दों के अलावा प्रमुख पदों पर रिक्तियों को भरने की प्र्रक्रिया में मंत्रालय की ओर से मदद का अभाव होने का भी जिक्र किया है।
एक सूत्र ने कहा कि मंत्रालय ने लोगांे को संविदा पर नियुक्त किए जाने पर भी सवाल किए हैं जबकि प्रसार भारती में राय है कि जब नियमित नियुक्तियां नहीं हुयी हैं तो ऐसे कार्यबल की काफी जरूरत है।