अमुंडी इन्वेस्टमेंट इंस्टिट्यूट के मैक्रो पॉलिसी रिसर्च के प्रमुख डिडियर बोरोस्कीने कहा है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी विदेशी पोर्टफोलियो या रणनीतिक निवेश में पर्याप्त रूप से नहीं दिखती है। विश्व स्तर पर अभूतपूर्व वृद्धि दर, कम मुद्रास्फीति और सार्वजनिक वित्त के सुदृढ़ीकरण की दिशा की स्पष्ट राह के बावजूद भारत निवेशकों को आकर्षित करने में मशक्कत कर रहा है क्योंकि निवेशक एआई के मौकों का रुख कर रहे हैं और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
मुंबई में दिए साक्षात्कार में अमुंडी इन्वेस्टमेंट इंस्टिट्यूट के डिडियर बोरोस्की ने कहा, वैश्विक पोर्टफोलियो में भारतीय शेयरों की हिस्सेदारी वह बात नहीं दिखाती, जिसकी कल्पना हम आगामी दशक में भारत के लिए नए युग की कर रहे हैं।
वह संस्थान में मैक्रो पॉलिसी रिसर्च का नेतृत्व करते हैं, जो यूरोप के सबसे बड़े ऐसेट मैनेजर अमुंडी की शोध इकाई है और जिसके पास 2.7 लाख करोड़ डॉलर की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां हैं। भारतीय इक्विटी पर उसका संरचनात्मक रूप से ओवरवेट नजरिया है।
बोरोस्की ने कहा कि भारत के पक्ष में तर्क संरचनात्मक है, न कि इस साल शेयरों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद। उन्होंने कहा कि आगामी दशक के लिए पोर्टफोलियो बना रहे निवेशकों को भारत को शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, घरेलू मांग से आय में वृद्धि की संभावना है। भारत में अभी भी मजबूत आबादी लाभ मौजूद है। घरेलू मांग के कारण अर्थव्यवस्था व्यापारिक झटकों के प्रति कम संवेदनशील है।
जनवरी 2025 और 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने शुद्ध रूप से 23 अरब डॉलर के भारतीय शेयरों की बिकवाली की। इस कारण देश में यह निवेश एक दशक के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते ने पिछले 10 दिनों में कुछ हद तक निवेश वापस लाने में मदद की है। अमेरिका के अलावा भारत ने हाल में यूरोपीय संघ के साथ भी एक व्यापार समझौता किया है। अमुंडी को उम्मीद है कि इन दोनों समझौतों से देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ेगा।
बोरोस्की ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम और वैश्विक व्यापार में बिखराव की चिंताएं निवेशकों को विकसित अर्थव्यवस्थाओं से बाहर मिल रहे मौकों की ओर अपने पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे निवेश पैटर्न में व्यवधान भी विविधीकरण को बढ़ावा दे सकता है, जैसा कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड के मामले में देखा जा रहा है, जो जोखिम वाली संपत्तियों में गिरावट के खिलाफ बचाव के रूप में अपना आकर्षण खो रहे हैं। बोरोस्की ने कहा, पिछले साल उभरते बाजारों के औसत ऋण अमेरिकी ट्रेजरी बाजार की तुलना में कम अस्थिर थे और उनसे ज्यादा रिटर्न मिला।