facebookmetapixel
Advertisement
FPIs बेच रहे हैं शेयर, खरीद रहे हैं बॉन्ड; भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या हैं इसके मायने?भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का भारी पलायन, 2026 में अब तक निकाले ₹2.67 लाख करोड़LPG की कीमत बढ़ने पर सरकार की सफाई: अभी भी सबसे सस्ता गैस यहां, उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान नहींAlphaGrep की म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में एंट्री, जुलाई में लॉन्च होगा पहला फंडपश्चिम एशिया में तनाव व महंगाई के आंकड़े तय करेंगे बाजार की चाल, इस हफ्ते इन बड़े फैक्टर्स पर रहेगी नजरशेयर बाजार की सुस्ती से टॉप 7 कंपनियों को डूबे ₹1.25 लाख करोड़, रिलायंस को हुआ सबसे तगड़ा नुकसानWeekly Economy Wrap: ब्याज दरों पर RBI की ब्रेक, मजबूत GDP के साथ बदले आर्थिक समीकरणप्याज खरीद के नियम तो बदले पर किसान खुश नहीं, मांग: असली समस्या मिल रहे कम दाम से, उसे बढ़ाना जरूरीAnnuity Plan खरीदने का कर रहे हैं विचार? एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे और छिपे हुए सभी रिस्क550% का मोटा डिविडेंड! NBFC सेक्टर से जुड़ी मशहूर कंपनी का बड़ा तोहफा, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्ते

मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन’ में बदलाव मंजूर

Advertisement

ये बदलाव इस साल के अंत में कंपनी की सूचीबद्धता की योजना के तहत किए जा रहे हैं।

Last Updated- January 31, 2025 | 11:30 PM IST
TATA

टाटा संस की प्रमुख वित्तीय सेवा इकाई टाटा कैपिटल के बोर्ड ने कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुरूप अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में बदलावों को मंजूरी दे दी है और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के एक नए सेट को अपनाया है। ये बदलाव इस साल के अंत में कंपनी की सूचीबद्धता की योजना के तहत किए जा रहे हैं।

पोस्टल बैलट के लिए गुरुवार को जारी सूचना में कंपनी ने कहा कि एक एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी) के रूप में, वह पूंजी पर्याप्तता से संबंधित नियमों के अधीन है। इसमें कहा गया, ‘कंपनी अपने ऋण पोर्टफोलियो और परिसंपत्ति आधार को बढ़ाना जारी रखेगी, इसलिए उसे अपने व्यवसाय के संबंध में जरूरी पूंजी पर्याप्तता अनुपात को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी। इसे ध्यान में रखते हुए कंपनी समय-समय पर राइट्स इश्यू के माध्यम से अतिरिक्त पूंजी जुटा सकती है।’
टाटा समूह ने बुधवार को इस संबंध में भेजे गए ईमेल संदेश का कोई जवाब नहीं दिया है।

कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार, धारा 25 में ‘डीम्ड प्रॉस्पेक्टस’ को परिभाषित किया गया है, जिसके अनुसार सार्वजनिक बिक्री के लिए प्रतिभूतियों की पेशकश करने के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी भी दस्तावेज को प्रॉस्पेक्टस माना जाता है, जिसके साथ सभी कानूनी निहितार्थ जुड़े होते हैं। दूसरी ओर, धारा 42 ‘प्राइवेट प्लेसमेंट’ की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है, जो कंपनियों को सार्वजनिक पेशकश के बिना निवेशकों के एक सीमित समूह को प्रतिभूतियां पेश करके पूंजी जुटाने की अनुमति देती है।

टाटा कैपिटल और टाटा संस दोनों को भारतीय रिजर्व बैंक ने ऊपरी स्तर की एनबीएफसी के रूप में टैग किया है, जिससे दोनों कंपनियों के लिए इस साल सितंबर तक सूचीबद्ध होना अनिवार्य हो गया है।

फिलहाल टाटा कैपिटल में टाटा संस की हिस्सेदारी 92.83 प्रतिशत, टाटा समूह की कंपनियों की हिस्सेदारी 2.46 प्रतिशत, आईएफसी (अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम) की हिस्सेदारी 1.91 प्रतिशत और एम्प्लॉई वेलफेयर ट्रस्ट की हिस्सेदारी 1.16 प्रतिशत है, जबकि शेष 1.64 प्रतिशत हिस्सेदारी अन्य के पास है।

Advertisement
First Published - January 31, 2025 | 10:55 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement