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टैरिफ से भारतीय ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट पर ब्रेक, नए ऑर्डर से हिचक रहीं अमेरिकी कंपनियां

US Tariffs: भारत के वाहन पुर्जा उद्योग का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है जिसने पिछले साल भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था।

Last Updated- January 15, 2026 | 8:57 AM IST
Auto parts

अमेरिका और उसके पड़ोसी देशों की वाहन कंपनियां नई परियोजनाओं के लिए भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं के साथ आयात आपूर्ति अनुबंध पर बातचीत से हिचकिचा रही हैं। अमेरिका की ओर से हाल में लगाए गए अधिक टैरिफ के कारण ऐसा हो रहा है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एक्मा) ने आज यह जानकारी दी।

एसोसिएशन ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में भारत से अमेरिका को निर्यात सालाना आधार पर लगभग 3.64 अरब डॉलर के स्तर पर स्थिर रहा। उसने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का असर चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से दिखने के आसार हैं।

भारत के वाहन पुर्जा उद्योग का सबसे बड़ा निर्यात बाजार अमेरिका है जिसने पिछले साल भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक्मा के नामित अध्यक्ष श्रीराम विजी ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत सहित कई देशों पर लगाए गए अधिक टैरिफ ने खरीदारों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है।

उन्होंने कहा, ‘हमने अतीत में ऐसे संकेत देखे हैं, जिनके अनुसार अमेरिका ने दुनिया के अधिकांश देशों और भारत पर जो टैरिफ लगाए हैं, उनके कारण अमेरिका और नाफ्टा (उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार करार) क्षेत्र की कंपनियों में अपनी नई परियोजनाओं के लिए भारत से पुर्जे लेने में काफी हिचकिचाहट हो गई है।’

विजी ब्रेक्स इंडिया के प्रबंध निदेशक भी हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिका के साथ मौजूदा पुर्जा व्यापार निकट भविष्य में जारी रह सकता है, लेकिन बड़ी चिंता भविष्य के ऑर्डर हैं।
उन्होंने कहा, ‘हो सकता है कि वाहन पुर्जों के व्यापार पर शायद तत्काल असर न पड़े, लेकिन आप देखेंगे कि वे लोग एक, दो या तीन साल तक के कारोबार देने से हिचकिचाएंगे। उद्योग के कई लोगों के लिए यह चिंता की बड़ी वजह है।’

विजी ने कहा कि भारत को मुश्किल झेलनी पड़ रही है क्योंकि अमेरिकी व्यापार नियमों के तहत कुछ देशों ने टैरिफ की ज्यादा अनुकूल शर्तें हासिल कर ली हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ देशों ने अनुच्छेद 232 (अमेरिकी व्यापार विस्तार अधिनियम, 1962) के तहत टैरिफ की नई फायदेमंद दरों पर बातचीत की है। इस लिहाज से भारत को नुकसान है, क्योंकि उसे दूसरे देशों से मुकाबला करना पड़ रहा है।’ इस अधिनियम में अनुच्छेद 232 ऐसी शर्त है, जिसके तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर आयात पर टैरिफ या व्यापार प्रतिबंध लगाने की अनुमति है। विजी के अनुसार आयात शुल्कों में छोटे-मोटे अंतर भी आपूर्ति के फैसलों पर काफी असर डाल सकते हैं।

जेके फेनर (इंडिया) के प्रबंध निदेशक और एक्मा के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि टैरिफ के मसलों पर अमेरिका के साथ अनिश्चितता का असर नए ऑर्डरों पर पड़ना शुरू हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘जो नए अनुबंध होने वाले हैं, वे कुछ अनिश्चितता में हैं, जबकि मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला अभी जारी है। किसी वाहन विनिर्माता को पुर्जों की आपूर्ति शुरू करने से पहले आपूर्तिकर्ता को कड़ी योग्यता प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसीलिए आपूर्ति कर्ताओं को तुरंत बदलना आसान
नहीं है।’

First Published - January 15, 2026 | 8:57 AM IST

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