facebookmetapixel
Advertisement
UP Monsoon Session: योगी सरकार पेश करेगी ₹20,000 करोड़ से ज्यादा का अनुपूरक बजट, चुनावी घोषणाओं पर रहेगी नजरLarge Cap Funds: रिटर्न में पिछड़े, फिर भी SIP निवेशकों की पहली पसंद; क्या अब निवेश का सही समय है?NFOs की बहार: 7 दिन में लॉन्च होंगे 7 नए म्युचुअल फंड, ₹500 से इक्विटी और डेट दोनों में मिलेगा निवेश का मौकाग्लोबल FMCG कंपनियों के लिए भारत बना ‘ग्रोथ इंजन’, जून तिमाही में बिक्री और बाजार हिस्सेदारी में भारी उछालRBI MPC Meet: अगस्त में Repo Rate बढ़ेगी, घटेगी या रहेगी स्थिर? 10 अर्थशास्त्रियों ने दिया जवाबUpcoming IPOs This week: इस हफ्ते आ रहे हैं 6 नए IPO, 11 कंपनियों की लिस्टिंग भी होगीइस हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार का हाल? RBI के फैसले, क्रूड ऑयल व SBI-एयरटेल के नतीजों पर टिकी नजरेंMCap: टॉप 10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप ₹2.51 लाख करोड़ बढ़ा, बजाज फाइनेंस रही सबसे आगेशेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की धमाकेदार वापसी, 4 महीने की बिकवाली के बाद जुलाई में लगाए ₹20,200 करोड़दिल्ली में छाए रहेंगे बादल, 23 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें आपके इलाके का कैसा रहेगा हाल

GDP के हिसाब से बढ़ेगा सकल ऋण

Advertisement
Last Updated- April 13, 2023 | 9:17 AM IST
GDP base year revision: Government considering changing the base year for GDP calculation to 2022-23 जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 करने पर विचार कर रही सरकार

वित्त वर्ष 24 से अगले चार वित्त वर्षों तक भारत जीडीपी के अनुपात में ऋण बढ़ने के दायरे में रहेगा जबकि इसमें वित्त वर्ष 23 तक निरंतर दो साल निरंतर गिरावट का रुख रहा था। यह अनुमान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बुधवार को व्यक्त किया।

आईएमएफ ने हालिया राजकोषीय निगरानी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 24 में जीडीपी के अनुपात में भारत का ऋण (केंद्र+राज्यों) थोड़ा बढ़कर 83.2 प्रतिशत हो जाएगा। यह वित्त वर्ष 27 में उच्च स्तर 83.3 फीसदी पर पहुंच जाएगा। इसके बाद इसमें सुधार का दौर शुरू होगा।

कोविड-19 के कारण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ा है। महामारी के कारण राजस्व घटा है और सरकारी खर्च में बढ़ोतरी हुई है। इससे वित्त वर्ष 20 की तुलना में जीडीपी के अनुपात में भारत का सार्वजनिक ऋण 75 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 21 में 88.5 फीसदी हो गया। हालांकि राजस्व और खर्चे के स्थिर होने के कारण वित्त वर्ष 23 में कुछ गिरकर 83.1 फीसदी पर आ गया। आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 21भारत का सकल वित्तीय घाटा (केंद्र+राज्यों) का उच्च स्तर 12.9 फीसदी पहुंच गया और वित्त वर्ष 29 में यह 7.6 फीसदी पर आ जाएगा।

आईएमएफ के राजकोषीय मामलों के विभाग में उप निदेशक पाओलो मौरो ने कहा कि मध्यावधि में वैश्विक सार्वजनिक ऋण-जीडीपी अनुपात में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी होगी लेकिन भारत में स्थिर रहेगी। मौरो ने कहा कि भारत में ऋण का अनुपात 83 फीसदी है जो उच्च है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह व्यापक स्तर पर स्थानीय मुद्रा पर है और घरेलू स्तर पर भी है।

Advertisement
First Published - April 13, 2023 | 8:53 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement