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नए मॉडलों और योजनाओं से इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में जोश, Tata और Hyundai सबसे आगे

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भारत में ईवी की पहुंच कैलेंडर वर्ष 2024 में 2.5 फीसदी थी और मई 2025 में यह दोगुनी होकर 4.4 फीसदी हो गई है।

Last Updated- June 25, 2025 | 10:15 PM IST
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एक ओर जहां केंद्र और राज्य सरकार के प्रोत्साहनों ने भारत में यात्री इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की पहुंच को 2024 के 2.2 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी पर ले जाने में मदद की है, वहीं दूसरी ओर हाइब्रिड वाहन की पहुंच करीब 2-2.5 फीसदी पर स्थिर बनी हुई है। कंपनियों का कहना है कि हाइब्रिड तकनीक के लाभों के बावजूद सरकारी समर्थन की कमी और सीमित नए लॉन्च ने इसकी वृद्धि को धीमा कर दिया है।

थोक बिक्री की संख्या पर आधारित उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, ईवी की पहुंच कैलेंडर वर्ष 2024 में करीब 2.2 फीसदी थी, वह मई 2025 में 4.4 फीसदी (2025 में अब तक 3.7 फीसदी) को पार कर गई, जिसे टाटा मोटर्स, जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और ह्युंडै मोटर इंडिया द्वारा नई पेशकश और आक्रामक विपणन से सहारा मिला। हालांकि दूसरी ओर 2023 में हाइब्रिड की पहुंच लगभग 2 फीसदी थी और 2025 में यह अब तक सिर्फ 2.5 फीसदी को ही छूने में कामयाब रही।

तीन मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम), जिनका मजबूत हाइब्रिड सेगमेंट पर वर्चस्व है, वे हैं टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, मारुति सुजूकी और होंडा कार्स इंडिया। इनके मॉडल पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों द्वारा संचालित हैं। टोयोटा के उत्पादों में इनोवा हाइक्रॉस और वेलफायर एमपीवी, अर्बन क्रूजर हाय राइडर मिडसाइज़ एसयूवी और कैमरी हाइब्रिड सिडैन शामिल हैं। जबकि मारुति सुजूकी के पास इनविक्टो एमपीवी और ग्रैंड विटारा मिडसाइज़ एसयूवी है और होंडा के पास इस सेगमेंट में सिटी ई-एचईवी है।

ह्युंडै मोटर इंडिया के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी तरुण गर्ग ने कहा, भारत में ईवी की पहुंच कैलेंडर वर्ष 2024 में 2.5 फीसदी थी और मई 2025 में यह दोगुनी होकर 4.4 फीसदी हो गई है। उन्होंने कहा कि यह मुख्य रूप से क्रेटा इलेक्ट्रिक जैसी नई पेशकश और अन्य प्रमुख कंपनियों द्वारा ज्यादा ईवी उतारे जाने के साथ-साथ पीएम ई-ड्राइव योजना के कारण है।

उन्होंने कहा, ईवी की पहुंच में वृद्धि इसे लेकर उपभोक्ता के बढ़ते विश्वास, सरकारी नीतियों में स्पष्टता, चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास और बाजार में पैठ वाली हमारी अपनी कार क्रेटा इलेक्ट्रिक सहित नई पेशकश की लहर से प्रेरित है।

विश्लेषकों का मानना है कि ईवी की पैठ में इस वृद्धि के पीछे नई पेशकश का उत्साह है। क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस ऐंड एनालिटिक्स के सीनियर प्रैक्टिस लीडर और डायरेक्टर (कंसल्टिंग) हेमल ठक्कर ने ईवी पैठ में वृद्धि का श्रेय बाजार में हलचल पैदा करने वाली नई पेशकश को दिया। अन्य लोगों ने बताया कि ईवी की तुलना में हाइब्रिड के लिए उच्च कराधान भी एक वजह है। ईवी पर 5 फीसदी कर लगता है जबकि हाइब्रिड वाहनों पर कुल मिलाकर 43 फीसदी कर वसूला जाता है।

हाइब्रिड को प्रोत्साहन देने वाले राज्यों के लिए परिदृश्य काफी अलग है। पिछले साल उत्तर प्रदेश सरकार ने मजबूत और प्लग-इन हाइब्रिड कारों पर 8-10 फीसदी पंजीकरण कर माफ करने का आदेश जारी किया था। इससे इन कारों की ऑन-रोड कीमतों में 4 लाख रुपये तक की कमी आई।

ईवी बाजार की अग्रणी कंपनी टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रबंध निदेशक शैलेश चंद्रा ने चेतावनी दी है कि जब कोई ऐसी तकनीक को सब्सिडी देता है, जिसे अपनाने में कोई बाधा नहीं होती इससे ईवी की पहुंच बाधित होती है।

चंद्रा ने कहा, एक राज्य में जहां हाइब्रिड सब्सिडी की पेशकश की गई, वहां ईवी की पैठ 1.5 फीसदी पर स्थिर रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.5 फीसदी से करीब दोगुना होकर 4 फीसदी हो गया। कुछ राज्य सरकारों ने ऐसा किया है और यह ईवी की पैठ में वृद्धि को दबाने की कीमत पर हुआ है। ऐसा तब होता है जब आप ऐसी तकनीक को सब्सिडी देते हैं जिसमें कोई बाधा नहीं होती है, जिसे स्वाभाविक रूप से अपनाया जाता है और आप कृत्रिम रूप से प्रतिस्पर्धात्मकता में काफी सुधार करते हैं। इसने उस गति को दबा दिया है जिस पर विद्युतीकरण बढ़ सकता था।

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First Published - June 25, 2025 | 10:08 PM IST

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