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JSW और Volkswagen में EV के लिए शुरू हुई बात, कारों की कीमत का भी पता चला

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M&M ने दिसंबर में फोक्सवैगन के MEB प्लेटफॉर्म और एकीकृत सेल के पुर्जों के साथ इलेक्ट्रिक स्पोर्ट यूटिलिटी (SUV) वाहन पेश करने की योजना बनाई है।

Last Updated- February 20, 2024 | 9:44 PM IST
Volkswagen

जेएसडब्ल्यू समूह ने ओडिशा में 40,000 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना के लिए प्रौद्योगिकी और कलपुर्जों की आपूर्ति के लिए जर्मन की वाहन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी फोक्सवैगन एजी के साथ बातचीत शुरू कर दी है।

जेएसडब्ल्यू के साथ यह बातचीत ऐसे समय सामने आई है जब जर्मन की इस कार विनिर्माता ने यह ऐलान किया है कि वह महिंद्रा ऐंड महिंद्रा को इलेक्ट्रिक वाहन के कलपुर्जों और बैटरी सेल की आपूर्ति करेगी। महिंद्रा ने दिसंबर में फोक्सवैगन के एमईबी प्लेटफॉर्म और एकीकृत सेल के पुर्जों के साथ इलेक्ट्रिक स्पोर्ट यूटिलिटी वाहन पेश करने की योजना बनाई है।

घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि फोक्सवैगन एजी की एक उच्च स्तरीय टीम ने कंपनी द्वारा विकसित तकनीक के बारे में मंगलवार को चेयरमैन सज्जन जिंदल और उनके पुत्र पार्थ जिंदल सहित जेएसडब्ल्यू समूह के शीर्ष अधिकारियों के सामने एक प्रस्तुति दी।

जेएसडब्ल्यू समूह की इलेक्ट्रिक वाहन परियोजना जिंदल परिवार की निजी कंपनियों द्वारा स्थापित की गई है और इसमें कोई भी सूचीबद्ध कंपनी शामिल नहीं है। सूत्र ने कहा कि जेएसडब्ल्यू समूह भविष्य में परियोजनाओं के लिए वित्तीय निवेशकों को आमंत्रित करने पर भी विचार करेगा।

संपर्क करने पर फोक्सवैगन समूह के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। जेएसडब्ल्यू समूह के प्रवक्ता ने कहा ‘हम बाजार की अफवाहों और अटकलों पर टिप्पणी करने से बचते हैं।’

समूह ने इलेक्ट्रिक कार निर्माण के लिए 35 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के लिए चीन की एसएआईसी मोटर कॉर्प के स्वामित्व वाली कंपनी एमजी मोटर के साथ संयुक्त उद्यम समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं। फिलहाल परियोजना के लिए जांच-परख की कवायद चल रही है और जेएसडब्ल्यू के अधिकारी एमजी मोटर्स हलोल (गुजरात) इकाई पर विचार कर रहे हैं। एक सूत्र ने कहा कि जेएसडब्ल्यू समूह के साथ कारों, बैटरी विनिर्माण और अन्य कलपुर्जों के लिए अलग-अलग संयुक्त उद्यम होंगे।

ओडिशा परियोजना में 50 गीगावॉट प्रति घंटा की ईवी बैटरी का संयंत्र, ईवी, लीथियम रिफाइनरी, कॉपर स्मेल्टर और संबंधित कलपुर्जा विनिर्माण इकाइयां शामिल हैं। इस परियोजना में वाणिज्यिक वाहनों और यात्री कारों का निर्माण होगा।

उद्योग के अनुमान के अनुसार इलेक्ट्रिक कारों और तेल-गैस इंजन वाले वाहनों के बीच कीमत का अंतर लगभग 30 प्रतिशत है। समूह के एक सूत्र ने कहा कि समूह की योजना ईवी कारों के दाम तेल-गैस वाली कारों के बराबर लाने की है। इन कारों के दाम करीब 20 लाख रुपये होंगे।

साल 2023 में चीन ने एक करोड़ ईवी बेचीं और भारत ने एक लाख से कुछ ही ज्यादा। जिंदल के अनुसार चीन ने 2,000 गीगावॉट बैटरी संयंत्र लगाया है और भारत ने अब तक एक गीगावॉट बैटरी संयंत्र नहीं लगाया। सज्जन जिंदल ने हाल ही में इस अखबार को एक ईमेल में कहा था ‘हम ईवी की पैठ बढ़ाकर लोगों के आवागमन के तरीके को फिर से परिभाषित करना और उनके जीवन को सशक्त करना चाहते हैं।’

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First Published - February 20, 2024 | 9:44 PM IST

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