facebookmetapixel
Advertisement
FY28 की शुरुआत में आ सकते हैं पॉलिमर नोट, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया पूरा प्लान₹100 से रियल एस्टेट में निवेश का मौका, Edelweiss ने लॉन्च किया देश का पहला REITs फोक्स्ड फंड; समझें टैक्स नियमRepo Rate नहीं बदली, लेकिन RBI ने दे दिए बड़े इशारे! जानिए 10 बड़ी बातेंMeta ने मानी गलती, सरकार के सामने सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी; सेफ हार्बर’ पर भी मिला सख्त संदेशFranklin India NFO: कम जोखिम वाले डेट फंड में निवेश का मौका, SIP ₹500 से शुरूRBI MPC Meet: ब्याज दरें, बॉन्ड मार्केट, महंगाई और ग्रोथ पर क्या कहतें हैं म्युचुअल फंड्स?177.9 मिलियन डॉलर के साथ शाहरुख नंबर 1, जानें टॉप 5 रैंकिंग में कौन से सेलिब्रिटी हैं शामिल?PNB दे रहा 6.5% तक ब्याज, FCNR(B) FD पर SBI, HDFC और ICICI का क्या है ऑफर?DLF vs Godrej Properties vs Lotus Developers: किस रियल्टी शेयर में सबसे ज्यादा अपसाइड?एक में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ, दूसरे में करीब 59% अपसाइड: Marico और Emami में कौन आगे?

AI के बढ़ते प्रभाव से नौकरियों में डिग्री से ज्यादा स्किल्स को मिल रही अहमियत

Advertisement

AI के दौर में कंपनियां अब डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल एक्सपर्टीज पर जोर दे रही हैं। जानिए कैसे बदल रहा है हायरिंग का पूरा खेल

Last Updated- March 12, 2025 | 9:30 PM IST
ITI के लिए रैंकिंग की तैयारी, प्रदर्शन में होगा सुधार Preparation for ranking for ITI, performance will improve

एक हालिया सर्वे, जो ग्लोबल जॉब साइट Indeed द्वारा किया गया, ने एक दिलचस्प रुझान दिखाया। इसमें पाया गया कि भारत में अब कंपनियां कर्मचारियों को नौकरी देने के तरीके में बदलाव कर रही हैं। अब वे औपचारिक डिग्री से ज्यादा स्किल्स और अनुभव को महत्व दे रही हैं।

सर्वे के अनुसार, 80% एम्प्लॉयर्स अब स्किल्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो यह दिखाता है कि इंडस्ट्री में प्रैक्टिकल एक्सपर्टीज पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वहीं, जो कंपनियां अभी तक इस तरीके को नहीं अपना पाई हैं, उनमें से 82% जल्द ही ऐसा करने की योजना बना रही हैं। डिजिटल बदलाव और उद्योग की बदलती जरूरतों को देखते हुए, अब कंपनियां स्किल-बेस्ड हायरिंग को रणनीतिक रूप से अपना रही हैं।

तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में यह बदलाव सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। यहां कंपनियां ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिनके पास हैंड्स-ऑन अनुभव हो, न कि सिर्फ डिग्री।

भारत में हर साल 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट निकलते हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम को नौकरी मिल पाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 10% ग्रेजुएट्स को ही जॉब मिलती है। इसलिए, यह बदलाव भारतीय नौकरी बाजार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

AI के आने से यह बदलाव और तेज हो गया है। टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है, लेकिन डिग्री वाले कोर्स का सिलेबस सालों तक नहीं बदलता, जिससे यह इंडस्ट्री की जरूरतों से मेल नहीं खाता। Cognizant के CEO रवि कुमार के अनुसार, अब सिर्फ डिग्री लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग सर्टिफिकेशन कोर्स करना ज्यादा जरूरी हो गया है। उनका मानना है कि लोग अब एप्रेंटिसशिप लेकर काम के दौरान ही सीख सकते हैं।

Indeed इंडिया के रोहन सिल्वेस्टर का कहना है कि अब सिर्फ डिग्री से कुछ नहीं होता, कंपनियों को ऐसे लोग चाहिए जो तेजी से सीख सकें, समस्याएं हल कर सकें और अपनी स्किल्स को असली दुनिया में लागू कर सकें।

Infosys के वाइस प्रेसिडेंट थिरुमला आरोही कहते हैं कि डिग्री भी जरूरी है, लेकिन हमें यह देखना होगा कि डिग्री कोर्स में स्किल्स कैसे जोड़ी जाएं।

इस बदलाव को एडटेक कंपनियां भी महसूस कर रही हैं। Udemy और Coursera जैसी कंपनियों के अनुसार, अब बहुत से छात्र और पेशेवर माइक्रो-क्रेडेंशियल (छोटे प्रमाणपत्र कोर्स) कर रहे हैं ताकि वे नए स्किल्स सीख सकें। IIT गुवाहाटी में 30% छात्र AI और डेटा साइंस जैसे विषयों में अतिरिक्त कोर्स कर रहे हैं ताकि वे बाजार की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार कर सकें।

Advertisement
First Published - March 12, 2025 | 9:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement