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Ola Electric से बाहर निकली Hyundai, Kia ने भी घटाई हिस्सेदारी

Hyundai और Kia ने सबसे पहले 2019 में ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) में $300 मिलियन का निवेश किया था।

Last Updated- June 04, 2025 | 2:09 PM IST
Hyundai
ह्युंडै ने अपनी 2.47 फीसदी हिस्सेदारी ₹50.70 प्रति शेयर के भाव पर बेची। (File Image)

ह्युंडै मोटर (HYUNDAI Motor) ने ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी है, जबकि दक्षिण कोरिया की एक अन्य कार निर्माता किआ (Kia) ने भी EV स्टार्टअप में अपनी हिस्सेदारी कम कर दी है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि दोनों कंपनियों की कुल हिस्सेदारी बिक्री से करीब ₹689 करोड़ (करीब $80 मिलियन) जुटाए गए हैं।

मंगलवार को जारी किए गए एक्सचेंज डेटा (Exchange Data) के मुताबिक, ह्युंडै ने अपनी 2.47 फीसदी हिस्सेदारी ₹50.70 प्रति शेयर के भाव पर बेची। जबकि किआ ने 0.6 फीसदी हिस्सेदारी ₹50.55 प्रति शेयर के हिसाब से बेची। किआ की हिस्सेदारी पहले से 1 फीसदी से कम थी और ताजा बिक्री के बाद उसकी मौजूदा हिस्सेदारी की जानकारी नहीं है क्योंकि एक्सचेंज डेटा 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी को नहीं दिखाते हैं।

दो दिग्गज कंपनियों की ओर से स्टेक सेल के बाद ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) के शेयर की कीमत पर तगड़ा असर देखने को मिला। जो मंगलवार को 8 फीसदी गिर गया। दोनों बिक्री सोमवार के क्लोजिंग प्राइस से करीब 6 फीसदी की छूट पर की गईं, जिससे स्टॉक में गिरावट आई।

यह भी पढ़ें…Maruti Suzuki का बड़ा ऐलान: 2031 तक सोलर पावर में ₹925 करोड़ झोंकने की तैयारी

HYUNDAI और KIA ने 2019 में किया था निवेश

ह्युंडै और किआ ने सबसे पहले 2019 में ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) में $300 मिलियन का निवेश किया था। जिसमें भविश अग्रवाल के स्टार्टअप (Startup) के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) पर सहयोग करने की योजना थी।

यह विनिवेश ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) के लिए एक मुश्किल समय में आया है। कंपनी धीमी बिक्री, नियामक जांच और स्थापित दोपहिया निर्माताओं से बढ़ती प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है। अगस्त 2024 में सार्वजनिक होने के बाद से, इसके शेयरों में 46 फीसदी की गिरावट आई है।

ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) का हाल ही में चौथी तिमाही में नुकसान बढ़ा है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए राजस्व में गिरावट का अनुमान लगाया है। कंपनी प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए भारी छूट दे रही है, जिससे उसकी आय पर और दबाव पड़ा है।

US Tariff से निपटने के लिए टास्क फोर्स

अप्रैल में, ह्युंडै मोटर (HYUNDAI Motor) ने अमेरिकी टैरिफ (Tariff) के असर से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स (Task force) के गठन की घोषणा की। रॉयटर्स (Reuters) ने बताया कि कंपनी ने यह भी पुष्टि की कि उसने अपने टक्सन (Tucson) क्रॉसओवर (Crossover) के कुछ प्रोडक्शन को मेक्सिको (Mexico) से अमेरिका में स्थानांतरित कर दिया है।

इसके अलावा, ह्युंडै इस बात का वैल्यूएशन कर रही है कि क्या अमेरिका जाने वाले कुछ वाहनों के प्रोडक्शन को दक्षिण कोरिया (South Korea) से वैकल्पिक स्थलों पर स्थानांतरित किया जाए।

ह्युंडै, अपनी सहयोगी किआ (Kia) के साथ, बिक्री के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमेकर (Automaker) है। कंपनियों को अमेरिकी टैरिफ (Tariff) से ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनकी ग्लोबल बिक्री का करीब एक तिहाई हिस्सा अमेरिकी बाजार में आता है। कोरिया इन्वेस्टमेंट ऐंड सिक्योरिटीज (Korea Investment & Securities) के आंकड़ों से पता चलता है कि ह्युंडै और किआ की अमेरिकी बिक्री का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयातित वाहनों से आता है।

टास्क फोर्स का मकसद टैरिफ के वित्तीय प्रभाव को कम करना और अमेरिका के भीतर ऑटो पार्ट्स की स्थानीय सोर्सिंग को बढ़ाने के लिए स्ट्रैटजी तैयार करना है। ह्युंडै का यह कदम अमेरिका में अपनी $21 अरब की निवेश योजना के बाद आया है, जिसमें जॉर्जिया (Georgia) में अपने नए प्लांट में प्रोडक्शन का विस्तार करना शामिल है। हालांकि, घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में समय लग सकता है, और टैरिफ के चलते कंपनी को अरबों का नुकसान हो सकता है।

First Published - June 4, 2025 | 2:09 PM IST

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