उम्मीद है। खान व्यवसाय पर राज्य में प्रतिबंध के पहले के निर्णय के कारण प्रदेश में
विभिन्न घाटों और खनन स्थल पर डेढ करोड़ टन से अधिक लौह अयस्क पड़ा हुआ है।
उच्चतम न्यायालय ने कल अपने अंतरिम आदेश में लौह अयस्क के लिए एक निगरानी समिति बनाने को मंजूरी दे दी। यह समिति प्रतिबंध से पूर्व खनन कंपनियों द्वारा निकाले गये लौह अयस्क और पट्टा स्थलों तथा विभिन्न समुद्री घाटों पर पड़े लौह अयस्क भंडार का आकलन करेगा। न्यायालय ने पड़े हुये लौह अयस्क की ई.नीलामी का आदेश दिया है जिसका पैसा बैंक में जमा कर दिया जाएगा और अंतिम निर्णय के बाद उसे उसके वास्तविक हकदारों को दिया जाएगा।
राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पारिक्कर ने कल संवाददाताओं से कहा कि राज्य में करीब 1.53 करोड़ टन लौह अयस्क ऐसा है, जिसकी न्यायालय के आदेश के अनुसार नीलामी की जा सकती है, जिससे कुल 10,000 करोड़ रपये का आय हो सकती है। जिसमें केन्द्र को रॉयल्टी और अन्य कर आदि निकालने के बाद राज्य सरकार को 1,500 करोड़ रपये की आमदनी हो सकती है।
पारिक्कर ने संवाददाताओं को बताया कि विभिन्न घाटों पर करीब 1.148 करोड़ टन पड़ा है। जिसे न्यायालय के आदेश के तहत नीलाम किया जा सकता है। इसी तरह 12.2 लाख टन जब्त किया हुआ लौह अयस्क भी नीलामी पर चढाया जा सकता है।
इसके अलावा 26.8 लाख टन अयस्क विभिन्न व्यापारियों के पास रका पड़ा है। जिसका कोई हिसाब नहीं है, उसकी भी नीलामी की जा सकती है।
भाषा