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सरकारी गारंटी वाले बॉन्डों में निवेश करें मगर सतर्क रहें

संजय कुमार सिंह /  July 05, 2020

सरकार ने 7.75 फीसदी बचत (कर योग्य) बॉन्डों को वापस लेने के बाद अब फ्लोटिंग रेट सेविंग्स बॉन्ड 2020 (कर योग्य) जारी करने की घोषणा की है। ये बॉन्ड 1 जुलाई से उपलब्ध हो गए हैं। पहले के बॉन्ड सात साल के लिए थे और पूरी अवधि के दौरान निवेशकों को एक ही दर पर प्रतिफल हासिल होता था। मगर अब सात साल की अवधि वाले बॉन्डों पर ब्याज की दर हर छह महीने में बदल दी जाएगी। शुरुआती ब्याज दर 7.15 फीसदी रखी गई है। इन बॉन्डों को राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) से जोड़ दिया गया है और इनमें एनएससी से 35 आधार अंक ज्यादा ब्याज मिलेगा। इसका मतलब यह है कि सरकार जब भी एनएससी की ब्याज दर बदलेगी, इन बॉन्डों की दर भी बदलेगी और एनएसी से 35 आधार अंक अधिक ब्याज रहेगा।

इन बॉन्डों के प्रति आकर्षण की सबसे बड़ी वजह यही है कि इन पर सरकार गारंटी दे रही है। लैडरअप वेल्थ मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक राघवेंद्र नाथ ने कहा, 'इस समय निवेेशक को यह नहीं पता कि आर्थिक सुस्ती कब तक बनी रहेगी और अगली बार कौन सी कंपनी या बैंक दिवालिया हो सकती है। ऐसे में उसे सरकारी बॉन्डों पर भरोसा करना अच्छा लगेगा क्योंकि इसमें डिफॉल्ट का जोखिम ही नहीं होता।'

इन बॉन्डों में व्यक्ति कितना भी निवेश कर सकता है। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार कंपनी पर्सनल फाइनैंस प्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव ने कहा, 'वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (पीएमवीवीवाई) जैसी सरकारी योजनाओं में 15 लाख रुपये तक का ही निवेश किया जा सकता है। मगर इन बॉन्डों में निवेश की कोई भी सीमा नहीं रखी गई है।' एससीएसएस और पीएमवीवीवाई केवल वरिष्ठ नागरिकों के लिए हैं मगर इन फ्लोटिंग रेट बॉन्डों में कोई  भी व्यक्ति निवेश कर सकता है। मगर इनकी खामी यह है कि निवेशक किसी निश्चित ब्याज दर पर पूंजी निवेश नहीं कर सकता। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और अरविंद राव ऐंड एसोसिएट्स के संस्थापक अरविंद राव ने कहा, 'एससीएसएस, पीएमवीवीवाई और बैंक सावधि जमाओं में ब्याज दर वही बनी रहती है, जो निवेश के समय थी। लेकिन इन बॉन्डों में ऐसा नहीं है।'

इस समय ब्याज दरों में गिरावट का माहौल है, इसलिए हर महीने में दर फिर से तय होना निवेशकों के लिए नुकसानदेह रहेगा। यह अलग बात है कि ब्याज दर बढ़ी तो उनके नुकसान की भरपाई हो सकती है।

इन बॉन्डों में आप मनचाहे तरीके से निवेश नहीं निकाल सकते। वरिष्ठ नागरिक ही परिपक्वता से पहले निकासी कर सकते हैं। मगर उन्हें भी उम्र की कुछ शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। तीन महीने के ब्याज पर परिपक्वता से पहले निकासी का जुर्माना अधिक है। जिन निवेशकों को अगले सात साल तक मूलधन की जरूरत नहीं पड़ेगी या जिन्होंने अन्य लिक्विड योजनाओं में निवेश कर रखा है, उन्हें ही इन बॉन्डों में निवेश करना चाहिए।

तीनों योजनाओं - एससीएसएस, पीएमवीवीवाई और ये नए फ्लोटिंग रेट बॉन्ड पर कर लगता है। राव ने कहा, 'वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले एससीएसएस और पीएमवीवीवाई की अपनी सीमा का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि उनमें ब्याज की दर अधिक होता है। उसके बाद जरूरत हो तभी इन बॉन्डों में निवेश करना चाहिए।'

अगर आप इन बॉन्डों और एफडी के बीच चुनाव नहीं कर पा रहे हैं तो दोनों के कर बाद प्रतिफल की तुलना कर लें। एफडी का प्रतिफल निवेशक की उम्र, अवधि और बैंक आदि के आधार पर बदलता रहता है। इस समय इन बॉन्डों का प्रतिफल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से वरिष्ठ नागरिकों को मिल रहे प्रतिफल से काफी बेहतर नजर आ रहा है। निवेशकों में यह जानने की उत्सुकता हो सकती है कि ये बॉन्ड द्वितीयक बाजार में उपलब्ध कर मुक्त बॉन्डों की तुलना में कैसे हैं। इन बॉन्डों का कर बाद प्रतिफल 4.8 से 7.15 फीसदी तक रह सकता है। प्रतिफल इस बात पर निर्भर करता है कि निवेशक किस कर श्रेणी में आता है। इस समय कर मुक्त बॉन्डों की परिपक्वता पर प्रतिफल भी पांच फीसदी से नीचे है। अगर कर बाद प्रतिफल लगभग समान ही है तो कर मुक्त बॉन्डों को चुनें क्योंकि इनमें प्रतिफल की दर में घट-बढ़ नहीं होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन बॉन्डों की सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई) से सीधे तुलना नहीं की जा सकती। एसएसवाई बेटी की शिक्षा या शादी जैसे लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए पैसा एकत्रित करने की खातिर है। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) भी एक ऐसी योजना है, जिसमें निवेशक 15 साल के लिए पैसा एकत्रित करता है। हालांकि यह विस्तार के चरण में आय योजना का भी काम कर सकता है। लेकिन एक व्यक्ति पीपीएफ में किसी एक वित्त वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक ही निवेश कर सकता है।

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