facebookmetapixel
Advertisement
अप्रैल से लागू होगा भारत-यूके के बीच हुआ CETA समझौता, व्हिस्की और कारें होंगी सस्ती: रिपोर्टशेयर बाजार में बरसेगा पैसा! इस हफ्ते HAL और Coal India समेत 63 कंपनियां देने जा रही हैं तगड़ा डिविडेंडInd vs Pak, T20 WC 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले से पहले फिर गरमाया ‘हैंडशेक’ विवाद, क्या बदलेगा भारत का रुख?Lodha Developers का बड़ा दांव, पुणे की कंपनी में ₹294 करोड़ का निवेश₹10 से ₹2 होगी फेस वैल्यू! बायोलॉजिकल प्रोडक्ट से जुड़ी कंपनी करेगी स्टॉक स्प्लिट, रिकॉर्ड डेट इसी हफ्तेइस हफ्ते इन 2 कंपनियों के निवेशकों की लगेगी लॉटरी, फ्री में मिलेंगे बोनस शेयर; चेक करें डिटेलशेयर बाजार में FPI का कमबैक: अमेरिका-भारत ट्रेड डील ने बदला माहौल, IT शेयरों में ‘एंथ्रोपिक शॉक’ का असरग्लोबल मार्केट में दोपहिया कंपनियों की टक्कर, कहीं तेज तो कहीं सुस्त निर्याततीन महीनों की बिकवाली के बाद FPI की दमदार वापसी, फरवरी में बरसे ₹19,675 करोड़Lenovo India Q3 Results: एआई और इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूत मांग से कमाई में उछाल, राजस्व 7 फीसदी बढ़कर ₹8,145 करोड़ पर

फेस्टिवल होम-लोन ऑफर: लंबी अवधि की बचत पर दें ध्यान, टीजर रेट से बचें

Advertisement

ब्याज दरों पर ही न टिकें नजर; प्रोसेसिंग, लीगल और इंश्योरेंस सहित पूरे लोन की लागत की तुलना करें

Last Updated- September 26, 2025 | 6:15 PM IST
Home
प्रतीकात्मक तस्वीर

नवरात्रि को संपत्ति खरीदने के लिए शुभ समय माना जाता है। इसकी शुरुआत के साथ ही बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) ने होम लोन पर विशेष फेस्टिवल ऑफर लॉन्च किए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उधारकर्ताओं को आकर्षक ऑफर देखने के बजाय इन्हें गहराई से परखकर ही फैसला करना चाहिए।

क्या ऑफर हैं

बैंकों और HFCs ने ब्याज दरों में कमी, प्रोसेसिंग शुल्क में छूट या माफी, लंबी रीपेमेंट अवधि और आसान टॉप-अप लोन जैसे ऑफर पेश किए हैं। कुछ ऋणदाता लीगल और वैल्यूएशन चार्ज भी घटा रहे हैं। नए ग्राहकों को मुख्य रूप से टारगेट किया गया है, लेकिन बैलेंस ट्रांसफर के जरिए मौजूदा ग्राहक भी लाभ उठा सकते हैं।

किन बातों को प्राथमिकता दें

  • लंबी अवधि की बचत:ब्याज दर में कमी और प्रोसेसिंग शुल्क की माफी जैसे लाभ चुनें। ब्याज में कटौती एक बार की छूट से ज्यादा मायने रखती है।
  • रीफाइनेंसिंग:मौजूदा उधारकर्ता ब्याज दर में बड़ी गिरावट (करीब 50 बेसिस पॉइंट) पर ही रीफाइनेंस करें। 10-20 बेसिस पॉइंट की कमी फायदेमंद नहीं होती।
  • टीजर ऑफर से बचें:केवल शुरुआती एक-दो साल के लिए कम दर वाले ऑफर भविष्य में महंगे पड़ सकते हैं।
  • कैशबैकगिफ्ट वाउचरफ्री कार्ड:इनका असर न्यूनतम होता है।
  • प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर फीस:ऐसे ऑफर से बचें जिनमें ये शुल्क शामिल हों।

Also Read: GST Free Insurance India: बीमा पर GST छूट के बाद कंपनियां ग्राहकों को पूरा लाभ देने को तैयार

अन्य जरूरी पहलू

  • पूरी लागत की तुलना करें:प्रोसेसिंग, लीगल और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज मिलकर कुल लागत बढ़ा सकते हैं।
  • लोन-टू-वैल्यू रेशियो (LTV):60-65% LTV पर ब्याज दरें 80% LTV से कम हो सकती हैं।
  • टेन्योर:छोटी अवधि में ब्याज घटता है लेकिन EMI बढ़ती है।
  • बंडल्ड इंश्योरेंस:बैंक इसे अनिवार्य नहीं बना सकते। बेहतर है कि लोन राशि को कवर करने वाला अलग टर्म इंश्योरेंस लिया जाए।

ध्यान रखने वाली बातें

सबसे अच्छे ऑफर उन्हीं को मिलते हैं जिनकी क्रेडिट स्कोर मजबूत हो। ऋणदाता प्रॉपर्टी का प्रकार, लोकेशन, आय की स्थिरता और EMI-टू-इनकम रेशियो जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देते हैं। कुछ ऑफर केवल चुनिंदा कंपनियों या सरकारी विभागों के कर्मचारियों के लिए होते हैं और समयसीमा के भीतर डिस्बर्स न होने पर लाभ खत्म हो सकता है।

सावधानियां

  • कई ऑफर्स की तुलना करें और वही चुनें जो आपके बजट व जरूरतों के अनुकूल हो।
  • जरूरत से अधिक कर्ज न लें। अपनी रीपेमेंट क्षमता और डेब्ट-टू-इनकम रेशियो का आकलन करें।
  • केवल भरोसेमंद बैंकों और HFCs से ही लोन लें। फर्जी ऑफर से सतर्क रहें।

Advertisement
First Published - September 26, 2025 | 6:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement