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महामारी ने पीछा छोड़ा मगर हीरे की राह में जंग बनी रोड़ा

Last Updated- December 11, 2022 | 7:52 PM IST

देश का हीरा उद्योग कोरोना महामारी के झटकों से तो उबर गया है मगर अच्छे दिन लौटने की कारोबारियों की उम्मीद पर रूस और यूक्रेन की जंग पानी फेरती दिख रही है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिनका असर भारतीय हीरा उद्योग पर पडऩे की आशंका जताई जा रही है क्योंकि यहां करीब 40 फीसदी कच्चे हीरे रूस की कंपनी अलरोसा से ही आते हैं। फिलहाल कच्चे हीरे के भाव में गिरावट से हीरा उद्योग उत्साहित है मगर भुगतान के झंझट और बड़ी कंपनियों की सांठगांठ के कारण कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव की आशंका उसे परेशान कर रही है।
कारोबारियों के हिसाब से हीरा उद्योग पर कोरोना महामारी का असर बिल्कुल भी नहीं रहा है। कुछ हफ्ते पहले कच्चे हीरों की कमी और ऊंचे भाव से परेशान हीरा उद्योग को अचनाक सब कुछ सही लग रहा है। कच्चे हीरे की आपूर्ति सामान्य होने से कीमतों में 20 फीसदी तक गिरावट आ गई। कारोबारी यह भी कह रहे हैं कि दाम में गिरावट की वह रूस-यूक्रेन संघर्ष है और आगे कीमतें और भी गिरेंगी, जिसका फायदा भारतीय उद्योग को मिलेगा। भारत में कच्चे हीरे की सबसे ज्यादा आपूर्ति रूस की कंपनी अलरोसा करती है, जिस पर अमेरिका और यूरोप ने र्क तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। हीरा कारोबारियों का कहना है कि वहां के प्रतिबंधों के कारण कंपनी छूट के साथ माल बेच रही है। इसीलिए दो-तीन हफ्ते में कच्चे हीरे 20-30 फीसदी तक सस्ते हो गए हैं। लड़ाई चलती रही तो कीमत और भी गिरेंगी।
लियो डायमंड के चेयरमैन अदिश शाह कहते हैं कि चीन और हॉन्गकॉन्ग में कोरोना फैलने से वहां पर्यटन और जवाहरात उद्योग की हालत खराब है। अमेरिका और ब्रिटेन में महंगाई के साथ ब्याज दर बढऩे से हीरों की खरीदारी कम हो गई है। इसीलिए हीरा खनन कंपनियों के लिए भारत का बाजार सबसे अनुकूल है। हल्के और कच्चे हीरों की पॉलिश भारत में सबसे अच्छे ढंग से होती है, इसलिए अलरोसा जैसी कंपनी को अपना ज्यादातर माल भारत में ही भेजना पड़ेगा। कुछ हीरा कारोबारियों का कहना है कि इस समय कच्चे हीरे के ऑनलाइन दाम में बहुत ज्यादा गिरावट नहीं दिखी है मगर मोलभाव चरम पर है और कंपनियां अपनी शर्तों पर कीमत तय कर रही हैं।
हालांकि मुंबई में हीरा कारोबार के पुराने गढ़ पंचरत्न के सचिव नरेश मेहता प्रतिबंधों की वजह से कच्चा हीरा सस्ता होने की बात नहीं मानते। उनका कहना है कि दीवाली के बाद कीमतें अचानक 30 फीसदी चढ़ गई थीं और अब अचानक गिरावट दिख रही है। मेहता के हिसाब से आपूर्ति का संकट कभी नहीं था और कंपनियों की सांठगांठ की वजह से ही दाम घट-बढ़ रहे हैं, जिसका खमियाजा छोटे कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है। वह कहते हैं कि भारत का हीरा कारोबार महामारी से पहले के स्तर पर पर पहुच चुका है मगर रूस-यूक्रेन युद्घ के कारण लगे प्रतिबंधों से भारत का हीरा उद्योग बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ तो मामला बेपटरी भी हो सकता है। प्रतिबंधों के कारण रूस का केंद्रीय बैंक और दो प्रमुख बैंक स्विफ्ट प्रणाली से अलग कर दिए हैं। इससे भारत में रत्नाभूषण उद्योग के लिए रकम का लेनदेन दिक्कत भरा हो गया है। अगर भारत में तराशे गए रूसी हीरों के निर्यात पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा दिया तो देसी हीरा उद्योग के लिए नया संकट पैदा हो जाएगा। मेहता कहते हैं कि कच्चे हीरों की आपूर्ति करने वाली रूसी कंपनी अलरोसा को फिलहाल डॉलर में भुगतान नहीं हो पा रहा है। भुगतान रूबल में करना है, जो चीन के रास्ते हो रहा है और यह भारतीय हीरा कारोबारियों के लिए मुश्किल काम है।
बहरहाल हीरा उद्योग की चमक बढऩे का फायदा हीरे को तराशने और चमकाने वाले कारीगरों को नहीं मिल रहा है। ज्वैल मेकर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शाह ने कहा कि कोरोना महामारी का उद्योग पर खास असर नहीं पड़ा था मगर कारीगरों का काम बिल्कुल छिन गया। काम पर पटरी पर लौटा तो रूस-यूक्रेन जंग की बात कहकर कारीगरों के काम में कटौती की जा रही है। यह भी तब है, जब दुनिया के लगभग 95 फीसदी हीरे भारत में ही तराशे जाते हैं। सूरत और मुंबई को दुनिया भर में हीरों की कटिंग और पॉलिशिंग का सबसे बड़ा ठिकाना माना जाता है। पिछले वित्त वर्ष में भारत से करीब 25.47 अरब डॉलर के तराशे हीरो का निर्यात किया था।
प्रतिबंध का खटका देसी हीरा कारोबारियों को ज्यादा साल रहा है। उनका कहना है कि अभी तक अलरोसा से माल मिल रहा है लेकिन प्रतिबंध बढ़े तो मुश्किल हो जाएगी। चूंकि भारत में तैयार हीरे के सबसे बड़े बाजार अमेरिका और यूरोप हैं, इसलिए प्रतिबंध की आशंका हमेशा बनी रहती है। दुनिया भर में करीब 30 फीसदी कच्चे हीरे अलरोसा से ही जाते हैं और भारत के लिए भी यह हीरे का सबसे अहम स्रोत है। देश में तराशे जाने वाले 30-40 फीसदी कच्चे हीरे वहीं से मिलते हैं। कंपनी ने पिछले साल 4.2 अरब डॉलर की बिक्री की थी।

First Published - April 14, 2022 | 11:48 PM IST

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