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दीवाली पर मिले ज्यादा ऑर्डर लेकिन शिवकाशी को राहत नहीं

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Last Updated- December 11, 2022 | 1:12 PM IST

तमिलनाडु के शिवकाशी में स्थित पटाखा उद्योग को महामारी के दो साल के नुकसान के बाद इस बार 30 फीसदी बढ़ोतरी के साथ ऑर्डर मिले, लेकिन इससे कारोबार अभी पटरी पर नहीं आ पाया है। देश में सबसे अधिक पटाखे शिवकाशी में ही बनाए जाते हैं।  निर्माता चाहते हैं कि सरकार बेरियम नाइट्रेट के उपयोग पर प्रतिबंध हटा दे और दीवाली के दौरान पटाखे जलाने की अनुमति दे। उन्होंने कहा कि पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले ऑक्सीकरण एजेंट बेरियम नाइट्रेट पर प्रतिबंध से फुलझड़ी (स्पार्कलर), घूमने वाली चकरी और अनार जैसे पटाखों के निर्माण पर असर पड़ा है।
सोनी फायरवर्क्स के निदेशक और तमिलनाडु फायरवर्क्स अमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पी गणेशन ने कहा कि बेरियम के बिना इन उत्पादों की गुणवत्ता कम हो जाती है। इसके अलावा, प्रतिबंध लगने के कारण इस वर्ष अवैध पटाखों की बिक्री में भी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि हालांकि, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस वर्ष उनकी बिक्री में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। ।
गणेशन ने उम्मीद जताई कि दीवाली के उत्सव के बाद सर्वोच्च न्यायालय और सरकार बेरियम पर फैसला लेंगे। पटाखा उद्योग के लगभग 60 फीसदी उत्पाद बेरियम नाइट्रेट का उपयोग करके बनाए जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 2021 में इसपर प्रतिबंध की पुष्टि की और उद्योगों को इसका उपयोग न करने के लिए कहा।
एसोसिएशन के अनुसार, शिवकाशी और उसके आसपास लगभग 1,070 विनिर्माण इकाइयां हैं, जो लगभग 6,000 करोड़ रुपये का उद्योग का हिस्सा हैं। एसोसिएशन के अनुमानों के आधार पर, शिवकाशी में कम से कम आठ लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पटाखे और इसके संबद्ध उद्योगों जैसे- छपाई और पैकिंग से जुड़े हैं। उद्योग की कंपनियों ने कहा कि बेरियम पर सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिबंध के कारण, कोविड -19 से पहले के स्तर की तुलना में कुल व्यापार की मात्रा कम हो गई है।
शिवकाशी फायरवर्क्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के मुरली असैतंबी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बेरियम और नो ज्वाइन क्रैकर के बगैर केवल हरित पटाखों के साथ नैतिक रूप से व्यवसाय कर रहा है तो उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद व्यवसाय में कुल 30-60 फीसदी की कमी आती है। हालांकि इस क्षेत्र में अवैध विनिर्माण में वृद्धि हुई है लेकिन इसकी निगरानी के लिए प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है। 
कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि से उद्योग को काफी घाटा हो रहा है। पोटैशियम और स्ट्रॉन​शियम नाइट्रेट की कीमतों में दो गुना और अन्य वस्तुओं की कीमतों में लगभग 50 फीसदी की वृद्धि हुई है। असैतंबी ने कहा कि इस साल, बाजार असंगठित क्षेत्र में स्थानांतरित हो गया है, क्योंकि वे हरित दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं, और इसके साथ उनकी कोई जवाबदेही भी नहीं है। चाहे वह विस्फोटक विभाग हो, पुलिस या सरकार के अन्य विभाग, इस बढ़ते अवैध क्षेत्र की जांच कोई भी नहीं कर रहा है।
पिछले तीन वर्षों से, पटाखा उद्योग राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर केवल ग्रीन पटाखे बना रहा है, जिससे वायु प्रदूषण में 30 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है।

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First Published - October 25, 2022 | 11:25 PM IST

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