facebookmetapixel
Advertisement
अगर युद्ध एक महीने और जारी रहा तो दुनिया में खाद्य संकट संभव: मैट सिम्पसनहोर्मुज स्ट्रेट खुला लेकिन समुद्री बीमा प्रीमियम महंगा, शिपिंग लागत और जोखिम बढ़ेपश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर गहरा असर, रियल्टी और बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव मेंगर्मी का सीजन शुरू: ट्रैवल और होटल कंपनियों के ऑफर की बाढ़, यात्रियों को मिल रही भारी छूटबाजार में उतार-चढ़ाव से बदला फंडरेजिंग ट्रेंड, राइट्स इश्यू रिकॉर्ड स्तर पर, QIP में भारी गिरावटपश्चिम एशिया संकट: MSME को कर्ज भुगतान में राहत पर विचार, RBI से मॉरेटोरियम की मांग तेजRCB की बिक्री से शेयरहोल्डर्स की बल्ले-बल्ले! USL दे सकती है ₹196 तक का स्पेशल डिविडेंडतेल में बढ़त से शेयर और बॉन्ड में गिरावट; ईरान का अमेरिका के साथ बातचीत से इनकारगोल्डमैन सैक्स ने देसी शेयरों को किया डाउनग्रेड, निफ्टी का टारगेट भी घटायाकिधर जाएगा निफ्टीः 19,900 या 27,500; तेल और भू-राजनीति तनाव से तय होगा रुख

क्या कृषि भारत की ताकत है या कमजोरी? विशेषज्ञ बोले—कम आय और आयात निर्भरता बड़ी चुनौतियां

Advertisement

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने दी चेतावनी—खाद्य तेल आयात पर निर्भरता खतरनाक, जीएम फसलों और नई तकनीक से मिल सकता है समाधान

Last Updated- March 01, 2025 | 7:05 AM IST
BS Manthan

बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन कार्यक्रम में शामिल हुए विशेषज्ञों ने कहा कि भले ही कृषि भारत की ताकत है, लेकिन उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और किसानों की आय बढ़ाना इनमें मुख्य रूप से शामिल है, क्योंकि सरकारी कर्मचारियों की तुलना में यह (आय) यह बेहद मामूली है।

‘क्या कृषि भारत की ताकत है या कमजोरी’ विषय पर आयोजित परिचर्चा के दौरान नीति आयोग के सदस्य और प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री रमेश चंद ने कहा कि भारत खाद्य तेल की अपनी बढ़ती जरूरतें या तो खपत घटाकर या जीन संवर्द्धित (जीएम) फसल जैसी नई तकनीक अपनाकर पूरी कर सकता है।

चंद की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत एक बार फिर घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आयोग ने तिलहन और दलहन, दोनों पर सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ट्रांसजीन जैसी नई प्रौद्योगिकियों को जल्द अपनाने की बात कही गई है।

चंद ने कहा, ‘कृषि भारत की ताकत है। इसकी वजह यह है कि कृषि में बढ़ते मशीनीकरण के बावजूद, श्रम प्रमुख इनपुट बना हुआ है। कृषि के बारे में वैश्विक बातचीत ‘खाद्य प्रणालियों या ‘कृषि-खाद्य प्रणालियों की ओर केंद्रित हो गई है। इसके विपरीत, भारत सदियों से मिश्रित फसल-पशुधन प्रणाली पर जोर देता रहा है।’ भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़ ने कहा कि हम किसान अपने काम पर गर्व करते हैं, लेकिन इससे बहुत आहत भी हैं कि सरकार की नीतियों ने हमारे साथ कैसा व्यवहार किया है।

Advertisement
First Published - March 1, 2025 | 7:05 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement