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राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बना रहा है भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम: ISRO प्रमुख

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डॉ. नारायणन ने बताया कि 1962 से इसरो की गतिविधियों को पांच हिस्सों में बांटा गया है—स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर व सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस एप्लिकेशंस

Last Updated- September 20, 2025 | 2:59 PM IST
Dr V Narayanan
ISRO Chairperson Dr V Narayanan

The Blueprint Discourse: भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम न सिर्फ वैज्ञानिक शोध में बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने शनिवार को यह बात कही।

नारायणन ने द ब्लूप्रिंट डिस्कोर्स के समापन सत्र में बोल रहे थे, जिसका संचालन बिजनेस स्टैंडर्ड की सतरूपा भट्टाचार्य ने किया। डॉ. नारायणन ने बताया कि 1962 से इसरो की गतिविधियों को पांच हिस्सों में बांटा गया है—स्पेस ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, स्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर व सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, स्पेस एप्लिकेशंस, क्षमता निर्माण और हाल ही में जुड़ा स्पेस साइंस व एस्ट्रोनॉमी।

उन्होंने कहा कि आज 55 से ज्यादा स्पेस एप्लिकेशन देश के लोगों की जीवनशैली बेहतर बनाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं। सैटेलाइट्स सुरक्षित संचार, आपदा प्रबंधन और रणनीतिक निगरानी के लिए अहम हैं। उन्होंने कहा ,”हमारी जिम्मेदारी हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है और सैटेलाइट इसमें बड़ा योगदान दे सकते हैं।”

चंद्रयान से मंगल तक

डॉ. नारायणन ने बताया कि भारत का पहला चंद्र मिशन चंद्रयान-1 अमेरिका के साथ मिलकर चांद पर पानी के अणु खोजने में सफल रहा। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के सुझाव पर भारत ने चांद की सतह पर तिरंगा भी फहराया।

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उन्होंने मंगलयान मिशन की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि 680 मिलियन किलोमीटर की यात्रा के बाद भारत पहली कोशिश में ही मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला देश बना।

चंद्रयान-2 ने जहां चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं की, वहीं इसकी उच्च-रिजॉल्यूशन कैमरे ने हजारों तस्वीरें भेजीं। चंद्रयान-3 ने अगस्त 2023 में ऐतिहासिक सफलता पाई और चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरकर आठ खनिजों की खोज के साथ तापीय और भूकंपीय अध्ययन किया।

मानव मिशन की तैयारी

डॉ. नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने और सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डॉकिन्ग और डि-डॉकिन्ग जैसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन की 75-80 फीसदी तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके तहत मानव-रेटेड रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और सुरक्षा प्रणालियां स्वदेशी तकनीक से विकसित हो रही हैं। तीन बिना मानव वाले मिशन पहले भेजे जाएंगे। इसी साल दिसंबर में व्योममित्रा नामक हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

अंतरिक्ष स्टेशन का लक्ष्य

इसरो प्रमुख ने यह भी पुष्टि की कि भारत 2035 तक 52 टन वजनी स्पेस स्टेशन स्थापित करेगा। इसका पहला मॉड्यूल 2028 तक कक्षा में भेजने की योजना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का निर्देश है कि यह परियोजना क्षमता और सुरक्षा—दोनों को ध्यान में रखकर पूरी की जाए, क्योंकि सुरक्षित संचार राष्ट्रीय रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

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First Published - September 20, 2025 | 2:56 PM IST

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