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बंगाल SIR: गलत साबित हुई मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की बात

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एक बड़ा डर जो मुस्लिम मतदाताओं के बीच था कि उनके नाम सबसे ज्यादा सूची से हटाए जाएंगे, यह बेबुनियाद रहा और आंकड़े इससे उलट बात कहते हैं।

Last Updated- December 26, 2025 | 9:02 AM IST
special intensive revision (SIR)
Representational Image

West Bengal SIR:  भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में हाल ही में संपन्न हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 58 लाख मतदाताओं के नाम अस्थायी रूप से हटा दिए हैं। यह आंकड़ा 2014 से 2024 तक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के माध्यम से हटाए गए कुल 62 लाख नामों के करीब है।

एसआईआर पर हुई बहस में बांग्लादेश से कथित घुसपैठियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इससे यह बात भी सामने आई कि मुस्लिम मतदाताओं के बीच एसआईआर के माध्यम से बड़ी संख्या में अपने नाम हटाए जाने का डर बैठ गया। लेकिन वर्तमान एसआईआर के आंकड़े इस भय को निर्मूल साबित करते हैं।

पिछले दस वर्षों के दौरान संयुक्त एसएसआर की तुलना में इस बार के मसौदा एसआईआर अभियान में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। एक खास बात यह भी देखने को मिली कि इस प्रक्रिया में जहां सबसे अधिक नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए, वहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं के नाम हटे हैं।

एक बड़ा डर जो मुस्लिम मतदाताओं के बीच था कि उनके नाम सबसे ज्यादा सूची से हटाए जाएंगे, यह बेबुनियाद रहा और आंकड़े इससे उलट बात कहते हैं। सूची से नाम काटे जाने की दर और कम से कम 25 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले निर्वाचन क्षेत्रों में इसका कोई सीधा संबंध नहीं मिला।

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First Published - December 26, 2025 | 9:02 AM IST

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