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वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल का निधन, 90 साल की उम्र में ली आ​खिरी सांस

पूर्व केंद्रीय मंत्री ​शिवराज पाटिल ने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत दर्ज की और 1991 से 1996 तक 10वें लोकसभा अध्यक्ष रहे।

Last Updated- December 12, 2025 | 10:17 AM IST
Shivraj Patil Death
वरिष्ठ कांग्रेस नेता पाटिल ने केंद्र में रक्षा, वाणिज्य और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स

Shivraj Patil Death: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और देश के पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके गृह नगर में निधन हो गया। परिवार के सूत्रों ने बताया कि पाटिल (90) का निधन उनके निवास ‘देवघर’ में संक्षिप्त बीमारी के बाद हुआ। उनका अंतिम संस्कार शनिवार को किया जा सकता है। वे अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना (जो पिछले वर्ष लातूर शहर से कांग्रेस के अमित देशमुख के खिलाफ बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव हार गई थीं) और दो पोतियों को छोड़ गए हैं।

Shivraj Patil का राजनीतिक सफर

12 अक्टूबर 1935 को जन्मे पाटिल ने राजनीति में कदम 1966–1970 के बीच लातूर नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में रखा। इसके बाद वे दो बार विधायक चुने गए। उन्होंने 1977 से 1979 के बीच महाराष्ट्र विधानसभा में उपाध्यक्ष और अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले।

इसके बाद पाटिल ने लातूर लोकसभा सीट से सात बार जीत दर्ज की और 1991 से 1996 तक 10वें लोकसभा अध्यक्ष रहे। वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में वे बीजेपी की रूपाताई पाटिल निलंगेकर से हार गए। वे राज्यसभा सदस्य भी रहे।

केंद्र सरकार में भूमिकाएं

वरिष्ठ कांग्रेस नेता पाटिल ने केंद्र में रक्षा, वाणिज्य और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। वे 2004 से 2008 तक केंद्रीय गृह मंत्री रहे और 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पाटिल 2010 से 2015 तक पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक भी रहे।

कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने बताया कि पाटिल अपनी गरिमामय व्यवहार, संतुलित भाषा और शालीनता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत हमले नहीं किए, न सार्वजनिक भाषणों में, न निजी बातचीत में। वे एक गहन अध्ययनशील, अधिक पढ़ने वाले और स्पष्ट अभिव्यक्ति वाले नेता थे। मराठी, हिंदी और अंग्रेजी पर उनकी मजबूत पकड़ और संवैधानिक मामलों की गहरी समझ ने उन्हें अपने समय का बहुत सम्मानित सांसद बनाया।

First Published - December 12, 2025 | 9:46 AM IST

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