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बिहार में सुधर रही सड़कों की हालत

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Last Updated- December 10, 2022 | 12:20 AM IST

हर साल बाढ़ से जूझने वाले बिहार में सड़कों की समस्या बनी रहती है। राज्य सरकार ने पिछले तीन साल में सड़कों के  सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, और ज्यादातर सड़कों के गङ्ढे दूर हुए हैं और उसमें चमक आई है।
हालांकि ग्रामीण इलाकों में अभी भी पूरी तरह से संपर्क स्थापित नहीं हो सका है। राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत आने वाली 701 किलोमीटर सड़कों के सुधार का काम 2007-08 में पूरा कर लिया गया है।
679 किलोमीटर सड़कों के सुधार का काम जारी है और इसे मार्च 2009 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके अलावा राज्य राजमार्ग के तहत आने वाली सभी सड़कों को दो लेन का करने का फैसला किया गया है और इस फैसले के बाद 2955 किलोमीटर सड़कों के सुधार का काम जारी है।
इसके साथ ही 18,00 किलोमीटर की राज्य की अन्य सड़कों को राज्य राजमार्ग के तहत घोषित कर दिया गया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक और हुडको के सहयोग से इस घोषित राजमार्ग को दो लेन में बदलने का काम भी शुरू हो चुका है।
पटना उच्च न्यायालय में वकालत का काम करने वाले शांतनु कहते हैं, ‘बदलाव का जितना प्रचार किया जा रहा है, स्थिति वैसी नहीं लगती। गांवों में सड़कों की स्थिति अभी भी खराब है। सब कुछ यहां पर शून्य से शुरू करना था उस लिहाज से तो काम हुआ है, लेकिन विकसित राज्यों, जैसे पंजाब, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र से तुलना करें तो हम कहीं नहीं ठहरते।’
अगर हम जिला स्तर की सड़कों की बात करें तो साल 2007-08 में 620 किलोमीटर लंबी सड़कों के सुधार का काम पूरा किया गया। इसके साथ ही 2008-09 में 2073 किलोमीटर सड़कों के सुधार का काम पूरा किया गया है और 3610 किलोमीटर सड़कों का स्तर सुधारने का काम अभी चल रहा है।
यह लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2009 तक 25,00 किलोमीटर सड़कों में सुधार का काम पूरा कर लिया जाएगा। राज्य के पथ निर्माण मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा, ‘राज्य में तेजी से सड़कों का संजाल बिछाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इसके अलावा हर काम के लिए जवाबदेही तय की गई है, जिससे पहले से तय समय में लक्ष्य हासिल किया जा सके।’
मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना के तहत बिहार राज्य पुल निर्माण निगम और जिला प्रशासन को 2006-07 में 300 करोड़ रुपये, 2007-08 में 4,00 करोड़ रुपये और 2008-09 में 4,00 करोड़ रुपये दिया गया है।
खास बात यह है कि 1975 के बाद पहली बार पुल निगम इस स्थिति में पहुंचा है कि उसका काम लाभ में चल रहा है और सरकार को उसने लाभ में से 35 लाख रुपये की हिस्सेदारी भी दी है।
सड़कों के निर्माण में निजी क्षेत्र को शामिल करने के लिए राज्य सरकार के अधीन आने वाली 6 प्रमुख सड़कों को 4 लेन करने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी की व्यवस्था की गई है और इसके कार्यों के लिए आईडीएफसी और आईएल ऐंड एफएस को काम सौंपा गया है। (समाप्त)

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First Published - February 8, 2009 | 8:27 PM IST

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