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देर रात तक गुलजार रहने वाले बाजारों से रौनक गायब

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Last Updated- December 15, 2022 | 7:54 PM IST

नवाबों के शहर लखनऊ में जो बाजार देर रात तक गुलजार रहते थे, वहां अब दिन में भी सन्नाटा पसरा दिख रहा है। कोरोनावायरस ने बाजारों की सूरत ही बदल दी है। दो महीने से भी ज्यादा अरसे तक बंद रहने के बाद जब बाजार खुले तो पहले जैसी रौनक नजर नहीं आई। न तो ग्राहक हैं, न कर्मचारी और न ही दुकानें ढंग से खुल रही हैं। जिन कारोबारियों ने दुकानें खोली भी हैं, वे ग्राहकी नहीं होने और माल फंसने से परेशान हैं।
ग्राहक नहीं हैं तो दुकानें भी खानापूरी के लिए ही खुल रही हैं। हजरतगंज इलाके के बाजार में आधी से ज्यादा दुकानें ग्राहकों व कर्मचारियों की कमी से बंद हैं और कंटेनमेंट जोन के करीब होने के कारण कई हफ्तों से बंद अमीनाबाद के बाजार पिछले हफ्ते खुले तो लगा ही नहीं कि ये बाजार हैं। अमीनाबाद और साथ में लगे गणेशगंज, फतेहगंज, रानीगंज के बाजारों में रोजाना 200 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जो अब घटकर 30-40 करोड़ रुपये रह गया है।
शहर के पुराने चौक में सराफा बाजार है, जहां कोई फटक ही नहीं रहा और बजाजे में सहालग की खरीदारी चौपट हो चुकी है। 40 करोड़ रुपये रोज के कारोबार वाले सराफा बाजार में अब 40 लाख रुपये का कारोबार भी नहीं हो रहा। कारोबारियों की मानें तो कोरोनावायरस के डर से खरीदार चौक के तंग बाजारों को तौबा करके ब्रांडेड ज्वैलरी शोरूम में ही जा रहे हैं। सराफ इस बात से परेशान हैं कि सहालग लॉकडाउन में चला गया, सोना-चांदी अब भी महंगे हैं और गहने गढऩे वाले अपने घर लौट गए, जो जल्द वापस नहीं आएंगे।
फतेहगंज गल्ला मंडी में जरूर रौनक है मगर आटा, चावल, दाल की दुकानों पर फुटकर ग्राहकों की। कारोबारियों का कहना है कि लोग वायरस के डर से मंडी आने के बजाय आसपास परचून की दुकानों से ही सामान खरीद रहे हैं। उन्हें माल की किल्लत से भी जूझना पड़ रहा है क्योंकि परिवहन सुविधा बहाल नहीं हुई है। कारोबारियों की दिक्कतें बहुत हैं। कर्मचारी नहीं हैं, माल की ढुलाई नहीं है, कीमत ज्यादा है, पिछला एडवांस फंसा है, पूंजी की कमी हो गई है। जहां से माल मंगाते हैं, वहां लॉकडाउन से पहले का एडवांस फंस गया है और नया माल उधारी पर मिल नहीं रहा। व्यापारी नेता गुलशन अरोरा ने बताया कि लखनऊ के रेडीमेड कपड़ा कारोबारियों के करीब 1,200 करोड़ रुपये दिल्ली में निर्माताओं के पास फंसे हैं और दवा कारोबारियों का 2,000 करोड़ रुपये का एडवांस फंस चुका है।
व्यापारी नेताओं का कहना है कि लंबे-चौथे आर्थिक पैकेज से खुदरा व्यापारियों को कुछ हाथ नहीं लगा। दो महीने से तगड़ी चपत झेल रहे व्यापारियों को राहत पैकेज में शामिल ही नहीं किया गया। उस पर रोज नए सरकारी निर्देशों ने कारोबार करना मुश्किल कर दिया है। तमाम सरकारी महकमों से लेकर पुलिस तक दुकानों की यूं जांच करती है मानो इंसपेक्टर राज लौट आया है। मिठाई कारोबारी तो इन सबसे परेशान होकर नाममात्र की ही दुकान खोल रहे हैं।
सोमवार से मॉल तो खुल गए, लेकिन पहले दिन दुकानें नहीं खुलीं। वहां के व्यापारियों की मांग है कि लॉकडाउन के दौरान का किराया और मेंटेनेंस शुल्क माफ किया जाए और अगले 12 महीने तक इनमें कुछ कटौती भी की जाए। आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि दो महीने पूरी तरह धंधा बंद रहने पर कोई भारीभरकम किराया और शुल्क कैसे दे सकता है। इसे माफ किया ही जाना चाहिए। हालांकि मॉल में कुछ दुकानें खुलने लगी हैं, लेकिन धंधा ठप है क्योंकि ग्राहक केवल पूछताछ कर लौट जा रहे हैं।’

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First Published - June 10, 2020 | 10:34 PM IST

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