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बोले कारोबारी, चुनाव में कोई तो सुने हमारी

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:46 AM IST

उत्तर प्रदेश के कारोबारी इस बात से नाखुश हैं कि राष्ट्रीय पार्टी हो या क्षेत्रीय पार्टी, उनकी जरूरतों को कोई तवज्जो नहीं देती है।
राज्य के कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि किसी भी पार्टी के घोषणापत्र में उद्योगों की बात ही नहीं होती है। मंदी के इस समय में भी किसी भी पार्टी ने राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निवेश में मदद और कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने की बात नहीं की है।
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के स्थानीय निदेशक ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अमिताभ ने बताया, ‘किसी भी पार्टी के घोषणापत्र में उद्योग को लेकर कोई तय नीति ही नहीं है। इन पार्टियों के घोषणापत्रों में वित्त, कर, औद्योगिक और कारोबारी नीतियों का जिक्र तक नहीं है।’
उन्होंने कहा कि देश की जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा अभी काफी जवान है। लेकिन सभी पार्टियों ने उन्हें लुभाने के लिए कुछ भी खास नहीं किया है। घोषणापत्रों में आर्थिक नीति को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो बिजली, कर सुधार, लालफीताशाही से मुक्ति जैसे मुद्दे इन पार्टियों के लिए सबसे जरूरी होने चाहिए।
दरअसल, इन्हीं क्षेत्रों में सुधार कर राज्य के आर्थिक विकास को और तेज किया जा सकता है। भारतीय उद्योग परिसंघ के राज्य परिषद के चेयरमैन जयंत कृष्णा ने बताया कि घोषणापत्रों में उद्योगों को पूरी तवज्जो नहीं दी गई है।
उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक पार्टियों के घोषणापत्रों में उद्योगों और कारोबार पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। खासतौर पर आज के समय में जबकि कृषि समेत देश की अर्थव्यवस्था भी उद्योगों पर ही निर्भर हो रही है।’ राज्य से सबसे अधिक लगभग 80 सांसद चुने जाते हैं।
राज्य के कुल उद्योग उत्पादन में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योगों (एमएसएमई) की हिस्सेदारी लगभग 60 फीसदी है। राज्य में 1 लाख से भी अधिक छोटे एवं मझोली इकाइयां हैं। इसी दौरान एसोचैम के महासचिव एस बी अग्रवाल ने बताया कि कई पार्टियों के घोषणापत्रों में तो उद्योगों के खिलाफ नीतियां हैं।
उन्होंने कहा, ‘राजनीतिक पार्टियों के पास कोई आर्थिक एजेंडा नहीं है। सभी पार्टियां चुनाव के समय वोट बैंक हथियाने के लिए वहीं पुराना राग अलापती हैं।’ अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष संदीप बंसल का कहना है, ‘हम कारोबारी और उद्यमियों के लिए सुरक्षा और इंस्पेक्टर राज का पूरी तरह से खात्मा चाहते हैं। इसके अलावा खाद्य अपमिश्रण अधिनियम (पीएफए) और जरूरी सेवा रखरखाव अधिनियम (एस्मा) की पुरानी धाराओं को हटा देना चाहिए।’
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष और राज्य सभा के सांसद बनवारी लाल कंछल ने देश भर के कारोबारियों के लिए वेतन कर घटाने और दुर्घटना बीमा योजना लागू करने की मांग की है। अवध चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के सचिव चंद्र कुमार छाबड़ा ने शिकायत की कि राजनीतिक पार्टियां उद्योग और कारोबारियों को हल्के में ले रही हैं।

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First Published - April 15, 2009 | 10:37 PM IST

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