facebookmetapixel
Advertisement
Gold ETF में निवेश पर रोक! क्या सोने में बन गया है बबल? खरीदें, बेचें या होल्ड करें?लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग, 15 छात्रों के मौत की खबर; रेस्क्यू ऑपरेशन जारीमई में सुस्त पड़ी बुनियादी ढांचे की रफ्तार, कोर सेक्टर्स की ग्रोथ 7 महीने के निचले स्तर 0.5% पर आईचीन ने अमेरिका पर किया बड़ा पलटवार, लॉकहीड मार्टिन समेत 10 दिग्गज डिफेंस कंपनियों पर लगाया प्रतिबंधक्या टैरिफ पर झुकेगा अमेरिका? अन्य एशियाई देशों से बेहतर डील चाहता भारत, ग्रीर से बातचीत में लगाएगा दांवकौन हैं ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ एंडी बर्नहैम, जो ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहे हैंDefence Exports: अमेरिकी हथियारों के विकल्प तलाश रहा यूएई, भारत से ब्रह्मोस खरीदने पर बातचीतTata MF NFO: बदलते सेक्टर ट्रेंड्स से कमाई का मौका, मल्टी-सेक्टर पैसिव FoF में ₹5000 से निवेश शुरूBJP का पहला बंगाल बजट: 1 लाख नौकरियां, DA में 20% इजाफा, अन्नपूर्णा योजना के लिए ₹36,000 करोड़; देखें बड़े ऐलानपश्चिम बंगाल सरकार ने DA/DR 20% बढ़ाया: इससे कर्मचारियों के ‘इन हैंड’ सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी?

दिल्ली में घटा योजनाओं पर खर्च

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 7:01 AM IST

दिल्ली सरकार विकास कार्यों पर बजट खर्च करने में काफी पिछड़ गई है। चालू वित्त वर्ष के 10 महीनों में सरकार बजट में विकास कार्यक्रमों के लिए आवंटित राशि का करीब 42 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च कर पाई है। ऐसे में इस वित्त वर्ष खर्च में 40 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। कोरोना महामारी को देखते हुए जनस्वास्थ्य मद में जरूर सरकार ने बजट में आवंटित राशि से ज्यादा खर्च किया है। ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, नागरिक आपूर्ति, खेल व युवा कल्याण जैसे विभागों में बजट में आवंटित राशि का 10 फीसदी हिस्सा भी खर्च नहीं हुआ है।
दिल्ली सरकार ने वर्ष 2020-21 के बजट में विकास कार्यक्रम-योजनाओं पर खर्च के लिए 29,500 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस वित्त वर्ष शुरुआती 10 महीनों में 12,040 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं, जो आवंटित राशि का 42 फीसदी है। कम खर्च के बारे में दिल्ली सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना के कारण इस वित्त वर्ष विकास कार्यों पर काम बाधित रहा। जिससे खर्च में कमी आई है। सरकार से खर्च में सुस्ती को देखते हुए खर्च के अनुमान को 29,500 करोड़ रुपये से घटाकर 23,270 करोड़ रुपये संशोधित कर दिया था। हालांकि इस संशोधित खर्च का भी 10 महीनों में 51.74 फीसदी हिस्सा ही खर्च हो पाया है। अब तक खर्च के माहौल को देखते हुए इस वित्त वर्ष खर्च में 40 फीसदी तक कमी आ सकती है।
तमाम विभागों के खर्च में सुस्ती के बीच जनस्वास्थ्य के मद में खर्च 10 महीने में ही बजट आवंटन से भी ज्यादा हो चुका है। बजट में 6,69 करोड़ रुपये आवंटन की तुलना में 7,87 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। हालांकि सरकार ने कोरोना के कारण इस मद में आवंटन बढ़ाकर 1,419 करोड़ रुपये कर दिया है।
विकास कार्यक्रमों के मामले में बजट में सबसे ज्यादा 5,721 करोड़ रुपये सामान्य शिक्षा के मद में आवंटित हुए थे, इस आवंटन का 43 फीसदी ही खर्च हुआ है। ग्रामीण विकास विभाग के आवंटित 408 करोड़ रुपये में से महज 1.55 करोड़ रुपये, उर्जा विभाग के लिए आवंटित 125 करोड़ रुपये में से 7.98 करोड़ रुपये, उद्योग विभाग के लिए आवंटित 61 करोड़ रुपये में से 3.98 करोड़ रुपये, परिवहन विभाग के लिए आवंटित 4,328 करोड़ रुपये में से 1,383 करोड़ रुपये, शहरी विकास के लिए आवंटित 3,329 करोड़ रुपये में से 9,68 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं।

Advertisement
First Published - March 15, 2021 | 11:49 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement