facebookmetapixel
Advertisement
Upcoming IPOs This week: इस हफ्ते आ रहे हैं 6 नए IPO, 11 कंपनियों की लिस्टिंग भी होगीइस हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार का हाल? RBI के फैसले, क्रूड ऑयल व SBI-एयरटेल के नतीजों पर टिकी नजरेंMCap: टॉप 10 में से 9 कंपनियों का मार्केट कैप ₹2.51 लाख करोड़ बढ़ा, बजाज फाइनेंस रही सबसे आगेशेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की धमाकेदार वापसी, 4 महीने की बिकवाली के बाद जुलाई में लगाए ₹20,200 करोड़दिल्ली में छाए रहेंगे बादल, 23 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; जानें आपके इलाके का कैसा रहेगा हाल8th Pay Commission की तैयारी तेज, कर्मचारियों से सुझाव लेने कई राज्यों का करेगा दौरा; जानें पूरा प्लान5 महीने बाद खत्म होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? ट्रंप बोले: शांति समझौते के पैरामीटर्स तय, हमले पर लगाई रोकपश्चिम एशिया में तनाव चरम पर, ईरान बोला: अमेरिका ने और हमला किया तो खाड़ी देशों के तेल ठिकाने होंगे राखHDFC Bank ने FCNR डिपॉजिट पर बढ़ाया ब्याज, RBI स्वैप स्कीम के बीच NRI निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदाDividend Stocks: एक शेयर पर ₹270 का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की कंपनी का तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्स

मप्र: बकाया भुगतान पर सहमति

Advertisement
Last Updated- December 09, 2022 | 6:45 PM IST

मध्य प्रदेश के कर्मचारियों ने बकाया राशि पर तुरंत भुगतान नहीं किए जाने के सरकारी फैसले को स्वीकार करने के लिए अपनी सहमति व्यक्त कर दी है। यह राशि छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बाद दिए जाने थे।


कर्मचारियों की बकाया राशि जनवरी 2006 से लेकर 31 अगस्त 2008 तक बाकी है। राज्य सरकार के सामने अपने कर्मचारियों की बकाया राशि के भुगतान के लिए 8000 करोड़ रुपये धनराशि की व्यवस्था करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।

तृतीय श्रेणी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण कैलासिया ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम लोगों ने हाल ही में राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की है और उन्होंने कहा है कि मौजूदा आर्थिक मंदी के बीच उनकी सरकार बकाया राशि का नकद भुगतान करने में सक्षम नहीं हैं।’

कैलासिया ने बताया, ‘इस महीने के 9 तारीख को हम लोगों ने सभी कर्मचारी संघों की एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में हम लोग उन कर्मचारी संघों को बताएंगे कि कर्मचारियों के हित के लिए हम लोगों को बकाया राशि की नकद भुगतान की मांग को छोड़ देना चाहिए और इसके बदले उस बकाया राशि को कर्मचारियों के सामान्य भविष्य निधि खातों में जमा हो जाना चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इस बकाया राशि की निकासी पांच वर्षों के लिए वर्जित होना चाहिए। लेकिन जो सेवानिवृत हो जाएंगे वे अपने बकाया राशि निकालने के  लिए हकदार होंगे।

कैलासिया ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि इस वक्त राज्य बहुत कठिन वित्तीय परिस्थितियों  से गुजर रहा है।

Advertisement
First Published - January 7, 2009 | 8:45 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement