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Editorial: कायम होगा अमन?

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हमास के पास अभी भी 94 बंधक हैं। बदले में इजरायल करीब 1,000 फिलीस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। इनमें से कुछ तो एक दशक से जेल में हैं।

Last Updated- January 16, 2025 | 11:22 PM IST
Israel-Lebanon Conflict
प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनिया भर में प्रसन्नता की लहर के बावजूद इजरायल और हमास के बीच 15 महीनों से चल रहे संघर्ष में स्थायी शांति की संभावना बहुत कम नजर आती है। इस संघर्ष में अब तक 1.20 लाख लोग हताहत हो चुके हैं। इनमें अनेक महिलाएं और बच्चे हैं। इस दौरान 19 लाख गाजावासी विस्थापित हुए। तीन चरणों वाले संघर्ष विराम समझौते में सद्भाव की कमी नजर आती है। खबरों के मुताबिक इजरायल और हमास कतर और अमेरिका की कठिन अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद इसके लिए सहमत हुए लेकिन दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास कायम है। फिलहाल इजरायल की कैबिनेट ने अंतिम हस्ताक्षर करने में देरी की है जबकि इस पर गुरुवार को हस्ताक्षर होने थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जो अपने देश में अत्यधिक अलोकप्रिय हैं, उन्होंने कहा है कि इजरायल की कैबिनेट तब तक बैठक नहीं करेगी जब तक हमास अपने दावे के मुताबिक ‘अंतिम समय की रियायत’ से पीछे नहीं हट जाता। संघर्ष विराम पर सहमत होने को लेकर नेतन्याहू की अनिच्छा का कारण घरेलू राजनीतिक अनिवार्यताओं में शामिल है।

वह 2022 से ही दक्षिणपंथी कट्‌टरपंथी दलों के साथ वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं और उनका सत्ता में बने रहना हमास के साथ संघर्ष को लंबा खींचने पर निर्भर है। अक्टूबर 2023 में इजरायली नागरिकों पर हमास के हमले के बाद उनकी सरकार ने कहा था वह हमास को नष्ट कर देगी। उस हमले में 1,200 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया था। संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर इजरायल द्वारा गाजा पर हमला किया गया जिसमें 70 से अधिक लोग मारे गए। यह भी बताता है कि समझौते का सम्मान होना मुश्किल नजर आ रहा है।

संघर्ष विराम के रविवार से प्रभावी होने की उम्मीद है। इसे लेकर फिलिस्तीन के लोगों ने राहत की सांस ली है क्योंकि अमेरिका में ट्रंप की सरकार बनने के बाद उन्हें अधिक राहत की उम्मीद नहीं है। ईरान को भी राहत मिली है जो लेबनान स्थित समूह हिजबुल्ला की मदद से इस जंग में छद्म रूप से शामिल है। हालांकि इस बारे में विस्तृत घोषणा होनी बाकी है लेकिन समझौते में बंधकों का आदान प्रदान, इजरायली सैनिकों की वापसी, गाजा के पुनर्निर्माण के लिए प्रतिबंधरहित सहायता और विस्थापित फिलिस्तीनियों की वापसी शामिल है। हमास के पास अभी भी 94 बंधक हैं। बदले में इजरायल करीब 1,000 फिलीस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा। इनमें से कुछ तो एक दशक से जेल में हैं। सैनिकों की वापसी और कैदियों की अदला बदली इस समझौते के पहले दो चरण होंगे और तीसरे चरण में गाजा का पुनर्निर्माण शामिल होगा। यह समझौता 84 दिन तक के लिए लागू है लेकिन यह कई अनुत्तरित सवालों का केवल एक पहलू है।

उदाहरण के लिए इजरायल संघर्ष विराम के पहले चरण में गाजा में एक बफर जोन में मौजूदगी बनाए रखेगा। इजरायली रक्षा बलों का फिलिस्तीनी भूभाग में लगातार बने रहना कैदियों की अदला बदली के पहले विश्वास बहाल करने में मदद नहीं करेगा। इस समझौते की जटिलताएं भी युद्ध विराम को नाजुक बना रही हैं। कोई छोटी सी घटना भी शत्रुता को दोबारा हवा दे सकती है। इजरायली पक्ष की शिकायत है कि हमास की बंधकों को रिहा करने की प्रतिबद्धता अस्पष्ट है। इसी तरह संघर्ष विराम फिलिस्तीन की चिंताओं को भी पूरी तरह दूर करने वाला नहीं है।

अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद से ही इजरायल ने पश्चिमी तट पर पर बड़ी संख्या में फिलिस्तीनियों को मारा और विस्थापित किया है। इस क्षेत्र में फिलिस्तीनियों की सुरक्षा के आश्वासन के बिना संघर्ष विराम कायम रहना मुश्किल है। इस लंबे और निराश करने वाले संघर्ष में जहां लाखों लोग अपने घरों से विस्थापित हुए वहीं इतिहास बताता है कि संघर्ष विराम अस्थायी ही साबित हुए हैं। उम्मीद करनी चाहिए कि इस बार कुछ अलग होगा।

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First Published - January 16, 2025 | 10:56 PM IST

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