facebookmetapixel
Bonus Stocks: अगले हफ्ते दो कंपनियां देंगी बोनस, निवेशकों को बिना लागत मिलेंगे एक्स्ट्रा शेयरअंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए राहत, रेड चैनल पर कस्टम्स अधिकारी अब हर कदम करेंगे रिकॉर्ड!Zomato CEO ने गिग वर्क मॉडल का बचाव किया, कहा 10.9% बढ़ी कमाईApple ने भारत में बनाई एंकर वेंडर टीम, ₹30,537 करोड़ का निवेश; 27 हजार से अधिक को मिलेगा रोजगारप्राइवेट बैंक बने पेंशन फंड मैनेजर, NPS निवेशकों को मिलेंगे ज्यादा विकल्पअश्लील AI कंटेंट पर सरकार सख्त: Grok की व्यापक समीक्षा करें X, 72 घंटे में रिपोर्ट पेश करने का आदेशमहिंद्रा समूह के CEO अनिश शाह का जरूरी संदेश: बड़ा सोचो, कम करो लेकिन उसे अच्छे से क्रियान्वित करोAdani Total ने घटाई CNG और PNG की कीमतें, आम उपभोक्ताओं को मिलेगी सीधी राहतछोटे निर्यातकों को बड़ी राहत: सरकार ने ₹7,295 करोड़ का निर्यात सहायता पैकेज और ऋण गारंटी योजना का किया ऐलानदेवयानी-सफायर के विलय को मिली मंजूरी, भारत में केएफसी-पिज्जा हट के नेटवर्क को करेगा मजबूत

Editorial: 8वें वेतन आयोग को मिली मंजूरी, केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन भत्तों में संशोधन की प्रक्रिया शुरू

वेतन में इस संशोधन से केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा

Last Updated- October 29, 2025 | 9:47 PM IST
8th pay commission

केंद्र सरकार ने मंगलवार को आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस यानी उसके काम करने के नियम-शर्तों और दायरे को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन भत्तों में संशोधन की प्रक्रिया आरंभ हो गई। वेतन में इस संशोधन से केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा। इसके अलावा करीब 69 लाख पेंशनभोगियों को भी इसका फायदा मिलेगा जिनमें सैन्य कर्मी भी शामिल हैं।

सीपीसी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। भारतीय प्रबंध संस्थान बेंगलूरु के पुलक घोष इसके अंशकालिक सदस्य होंगे जबकि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पंकज जैन आठवें सीपीसी के सदस्य सचिव होंगे। उम्मीद है कि यह आयोग 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट पेश कर देगा। संभव है वह अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत करे और उम्मीद है कि इसकी सिफारिशों को एक जनवरी 2026 से ही लागू कर दिया जाएगा।

सरकार ने 8वें वेतन आयोग के लिए एक व्यापक खाका तैयार किया है ताकि वह वेतन ढांचे की समीक्षा कर सके। इसे पूरे देश के समग्र आर्थिक हालात को ध्यान में रखना होगा और राजकोषीय विवेक का भी पालन करना होगा। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि विकास कार्यों के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध हों। पिछले सीपीसी की अनुशंसाओं का क्रियान्वयन करने में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की राशि व्यय हुई थी। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि 8वें वेतन आयोग को राज्य सरकारों की वित्तीय सेहत पर भी नजर रखने की जरूरत होगी क्योंकि मोटे तौर पर वे भी सीपीसी की सिफारिशों को लागू करेंगे। उसे पेंशन की लागत को भी ध्यान में रखना होगा।

इतना ही नहीं, 8वें सीपीसी से यह भी उम्मीद होगी कि वह सरकारी और निजी क्षेत्र के मौजूदा हालात को भी ध्यान में रखे। इन पर ध्यान देना बहुत महत्त्वपूर्ण है। सरकारी क्षेत्र के वेतन व्यापक आर्थिक हालात या अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में काम करने वालों के हालात से बहुत अधिक अलग नहीं होने चाहिए।

हालात पर गौर करें तो निचले स्तर की सरकारी नौकरियों के लिए भी बड़ी तादाद में आवेदन आना यह बताता है कि निजी क्षेत्र की ऐसी ही नौकरियों की तुलना में ये अधिक वेतन प्रदान कर रहे हैं। निजी क्षेत्र बहुत ऊंचे स्तर की नौकरियों में ही सरकारी क्षेत्र से बेहतर वेतन भत्ते प्रदान करता है। वास्तव में, यह विभिन्न प्रकार की नौकरियों के लिए श्रम की मांग और आपूर्ति को दर्शाता है और उत्पादकता पर भी निर्भर करता है।

सरकार के लिए बाजार व्यवस्था का पालन करना हमेशा कठिन रहेगा, लेकिन व्यवस्थाओं को व्यापक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना आवश्यक है। उच्च वेतन और अन्य लाभों के कारण केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर सरकार के लिए नियुक्तियां करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। सरकारें अब कुछ क्षेत्रों में अनुबंधित श्रमिकों पर निर्भर हो रही हैं। एक और प्रमुख मुद्दा, जो लगातार वेतन आयोगों के दौरान चर्चा के बावजूद अब तक अनसुलझा है, वह है सरकारी कर्मचारियों के मूल्यांकन की उचित प्रणाली का अभाव। इसलिए, 8वें वेतन आयोग को केवल वेतन की समीक्षा ही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर भी विचार करना चाहिए।

यह बात ध्यान देने लायक है कि ऐसे तमाम मुद्दे केवल केंद्र सरकार के काम तक सीमित नहीं हैं। जैसा कि हमने पहले भी कहा है। 8वें सीपीसी से यह उम्मीद है कि वह राज्य सरकारों के वित्तीय हालात को भी ध्यान में रखेगा क्योंकि आमतौर पर वे सीपीसी की अनुशंसाओं को अपनाते हैं।

राज्यों की वित्तीय हालात से संबंधित देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022-23 में देश के 16 राज्यों ने अपने बजट का करीब 20 फीसदी हिस्सा वेतन पर खर्च किया। इसी प्रकार कई राज्यों ने अपने बजट का अहम हिस्सा पेंशन पर खर्च किया। ऐसे में 8वें सीपीसी को वेतन और पेंशन की मौजूदा तथा भविष्य की देनदारियों पर ध्यान देना होगा। भारत को खुद को ऐसी हालत में नहीं डालना चाहिए जहां आबादी का एक हिस्सा तो सामान्य से बहुत अच्छा वेतन भत्ता पाए जबकि सरकार आम नागरिकों को बुनियादी सेवाएं देने में संघर्ष करे।

First Published - October 29, 2025 | 9:41 PM IST

संबंधित पोस्ट