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EPFO के सस्पेंस खातों में बढ़ता पैसा बना सिरदर्द, समिति ने 31 मार्च तक रोडमैप तैयार करने को कहा

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ईपीएफओ की वित्त समिति ने सस्पेंस खातों में बढ़ती करोड़ों की अवर्गीकृत राशि पर चिंता जताते हुए इसे 31 मार्च तक निपटाने के लिए ठोस रोडमैप मांगा है

Last Updated- March 06, 2026 | 9:55 PM IST
EPFO
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की वित्त एवं लेखा समिति (एफऐंडएसी) ने सामाजिक सुरक्षा संगठन के सस्पेंस खाते या अवर्गीकृत खातों में जमा राशि को खत्म करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने को कहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने यह जानकारी दी है कि इस प्रक्रिया के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य तय करने का सुझाव दिया गया है।

सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति ने सस्पेंस खातों में बढ़ती राशि पर चिंता जताई है। समिति ने इन लंबित प्रविष्टियों का उम्र के आधार पर विवरण भी मांगा है जिसे ईपीएफओ के विभिन्न जोनल कार्यालयों से जुटाया जाएगा। सस्पेंस खाते अस्थायी लेखा खाते होते हैं, जिनमें वह पैसा रखा जाता है जिसे तुरंत सही खाते में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। ऐसा कई कारणों से होता है जैसे सदस्य की जानकारी में गलती, बैंकिंग लेन-देन में किसी तरह की गड़बड़ी या किसी छूट प्राप्त ट्रस्ट द्वारा अपनी छूट छोड़कर धनराशि ईपीएफओ को स्थानांतरित करना आदि।

वित्त वर्ष 2022-23 में अस्थायी खातों में 53.9 करोड़ रुपये की राशि दर्ज की गई थी। यह जानकारी वर्ष 2022-23 की वार्षिक लेखा रिपोर्ट में दी गई है जो ताजा आधिकारिक डेटा है। यह राशि वित्त वर्ष 2022 के 44 करोड़ रुपये की तुलना में वित्त वर्ष 2023 और वित्त वर्ष 2022 के बीच 22.3 प्रतिशत अधिक थी।

जनवरी 2026 में हुई बैठक में समिति ने वित्त वर्ष 2023 से वित्त वर्ष 2024 के बीच सस्पेंस खातों की राशि में और बढ़ोतरी पर भी चर्चा की। वित्त वर्ष 2024  में इसमें लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सूत्रों के अनुसार, इसका मुख्य कारण यह था कि कुछ संस्थानों ने अपनी छूट वापस कर दी थी, लेकिन उस समय छूट प्राप्त संस्थानों से पूंजी हस्तांतरण के लिए इस्तेमाल होने वाली ऑनलाइन प्रणाली काम नहीं कर रही थी। हालांकि संबंधित कार्यालय ने बाद में जून 2025 में इस राशि को समायोजित कर दिया फिर भी समिति ने ऐसे मामलों के बने रहने पर चिंता जाहिर की।  

बैंकों द्वारा खाते के हस्तांतरण में होने वाली तकनीकी या मानवीय त्रुटियां भी एक समस्या बनी हुई हैं। सूत्रों का कहना है कि कई बार बैंक गलती से गलत खाते में पैसा जमा या डेबिट कर देते हैं। बाद में इन्हें ठीक कर दिया जाता है लेकिन ऐसी गलतियों के कारण सस्पेंस खातों में राशि अस्थायी रूप से बढ़ जाती है। सस्पेंस खातों का मुद्दा पहले भी वित्त एवं लेखा समिति की बैठकों में उठ चुका है।

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First Published - March 6, 2026 | 9:55 PM IST

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