वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि सरकार पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को राहत देने के लिए काम कर रही है। आईआईएफटी के वाइस चांसलर्स कॉन्क्लेव के मौके पर केंद्रीय मंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘दो दिन पहले ही मैंने निर्देश दे दिए हैं। हम अपने निर्यातकों को राहत देने के कुछ ठोस तरीके अपनाएंगे।’
गोयल ने कहा, ‘हमने सहायता केंद्र स्थापित किया है। हर दिन अंतर-मंत्रालयी समूह निर्यातकों से बात कर उनकी प्रतिक्रिया लेता है। चाहे वस्तु हो अथवा सेवा, हमें सभी खरीदारों से किए गए वादे पूरे करने चाहिए। सरकार निर्यातकों का समर्थन करने के लिए हर नीतिगत उपाय करेगी और निर्यात संवर्धन मिशन का उपयोग करेगी।’
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष की निगरानी, क्षेत्रवार निर्यात और आयात से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का आकलन करने तथा इनसे निपटने के उपाय करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी समूह बनाया है। वित्त मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय और तेल मंत्रालय के अधिकारियों वाली समिति से सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय होगा और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ संपर्क बनेगा।
इसके अतिरिक्त, युद्ध से उपजे संकट और चुनौतियों पर नजर रखने के लिए विदेश व्यापार महानिदेशालय में आंतरिक समन्वय तंत्र स्थापित किया गया है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद से शिपमेंट की आवाजाही में बाधा आई है। इससे निपटने में मदद करने के लिए तमाम निर्यातक केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
निर्यातक रसद संबंधी चुनौतियों के अलावा निर्यात घरेलू बंदरगाहों पर पश्चिम एशिया जाने वाले कार्गो के अटकने से खड़े होने वाले संकट के प्रति आगाह कर रहे हैं। कुछ शिपिंग कंपनियां उच्च युद्ध-जोखिम शुल्क की मांग कर रही हैं, जबकि कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। उन्हें कंटेनरों की कमी, पश्चिम एशिया के लिए पोत कॉल के निलंबन या रद्द होने और तेजी से उच्च रसद लागत बढ़ने का भी सामना करना पड़ रहा है।
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गोयल ने कहा, ‘हालात से निपटने के लिए हम शिपिंग मंत्रालय और सभी शिपिंग कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। सरकारी विभाग और मंत्रालय फंसे हुए कार्गो का मुद्दा हल करेंगे।’