घरेलू शेयर बाजार में आज बड़ी गिरावट दर्ज की गई और बेंचमार्क सूचकांकों में एक साल से ज्यादा समय की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट देखी गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की हौसले को कमजोर किया है। सेंसेक्स 1097 अंक या 1.37 फीसदी की गिरावट के साथ 78,918 पर बंद हुआ। निफ्टी 315 अंक या 1.27 फीसदी के नुकसान के साथ 24,450 पर बंद हुआ।
इस हफ्ते दोनों सूचकांकों में करीब 3 फीसदी की गिरावट आई। फरवरी 2025 के बाद निफ्टी का यह सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन है जबकि सेंसेक्स में दिसंबर 2024 के बाद सबसे तेज साप्ताहिक गिरावट आई है। दोनों सूचकांक पिछले साल अप्रैल के बाद सबसे निचले स्तर पर बंद हुए।
ईरान युद्ध के 7वें दिन में पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति में व्यापक स्तर पर रुकावट आने के डर से निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों में बिकवाली कर रहे हैं। ब्रेंट क्रूड इस हफ्ते करीब 20 फीसदी चढ़कर 87.7 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया जो उसका 20 महीने का उच्च स्तर है। मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद किसी हफ्ते तेल के दाम में यह सबसे बड़ी उछाल है।
तेल की ज्यादा कीमतें भारत के लिए बुरी खबर है क्योंकि इससे व्यापार घाटा बढ़ता है, महंगाई में इजाफा होता है और देश के चालू खाता घाटे तथा राजकोष पर दबाव बढ़ता है। विश्लेषकों ने कहा कि तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के वृहद आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
फ्रैंकलिन टेंपलटन की मुख्य निवेश अधिकारी सोनल देसाई ने कहा कि मौजूदा संकट एक बार फिर तेल निर्यातकों और आयातकों के बीच की खाई को दिखाता है, जिसमें आयातक की हालत कहीं ज्यादा खराब है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई जितनी लंबी चलेगी वैश्विक वृद्धि पर खतरा उतना ही बढ़ेगा।
डीएसपी एमएफ ने एक नोट में कहा है कि अगर कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचता है और भारत वित्त वर्ष 2027 तक उसी स्तर पर आयात करता रहता है तो देश का तेल व्यापार घाटा 220 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है। तेल व्यापार घाटा बढ़ने से चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.1 फीसदी के पार पहुंच जाएगा। डीएसपी एमएफ ने कहा कि इससे रुपये में भी काफी गिरावट आएगी और महंगाई बढ़ सकती है तथा बाजार में नकदी की कमी हो सकती है।
आईटी और रसायन को छोड़कर ज्यादातर सेक्टर सूचकांक गिरावट पर बंद हुए। बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 1,895 शेयर लाभ में और 2,304 नुकसान में रहे।
सेंसेक्स और निफ्टी में सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग शेयरों में दिखा। आईसीआईसीआई बैंक में 3.4 फीसदी, एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक में 2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।
विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से उधारी की लागत बढ़ने और मार्जिन घटने के डर से बैंकों और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों पर दबाव दिखा।
तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट रही क्योंकि कच्चे तेल के ऊंचे दाम से उनका मार्जिन घट सकता है। इंडिगो की प्रवर्तक कंपनी इंटरग्लोब एविएशन और लार्सन ऐंड टुब्रो में 2-2 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के प्रबंध निदेशक और संस्थागत इक्विटीज के सह-प्रमुख संजीव प्रसाद ने कहा कि बिगड़ती भू-राजनीतिक स्थिति घरेलू शेयरों के लिए मौजूदा चिंताओं को बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, ‘ईरान और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ना, पश्चिम एशिया में व्यापक संघर्ष और तेल के बढ़ते दाम भारत में निवेश के माहौल को और कमजोर कर देंगी। बाजार पहले से ही ज्यादा मूल्यांकन और आईटी पर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के संभावित खतरे से जूझ रहा है।’