सरकार ने कर सूचना साझा करने के वित्तीय संस्थानों के दायरे का विस्तार किया है। इसके तहत वित्तीय संस्थानों को अब वित्तीय खातों के साथ ही क्रिप्टो संपत्तियों, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) और इलेक्ट्रॉनिक मनी उत्पादों की भी जानकारी देनी होगी।
1 जनवरी, 2026 से प्रभावी संशोधनों में वित्तीय परिसंपत्तियों की परिभाषा का विस्तार करके इसमें ‘प्रासंगिक क्रिप्टो संपत्तियों’ को शामिल किया गया है और अमेरिकी विदेशी खाता कर अनुपालन अधिनियम (फाटका) तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के साझा रिपोर्टिंग मानक के तहत विदेशी कर निवासियों के खातों में की पहचान करने और रिपोर्ट करने के लिए वित्तीय संस्थानों द्वारा उपयोग किए जाने वाले ढांचे में सीबीडीसी और निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक मनी उत्पादों को शामिल किया गया है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने गुरुवार को आयकर (संशोधन) नियम, 2026 के जरिये ये बदलाव अधिसूचित किए हैं। इसके तहत आयकर कानून के नियम 114एफ, 114जी और 114एच में बदलाव किया गया है। अधिसूचना में प्रासंगिक क्रिप्टो संपत्ति को किसी भी क्रिप्टो संपत्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जो कि सीबीडीसी या निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक मनी उत्पाद नहीं है और जिसका उपयोग निवेश उद्देश्यों के लिए भुगतान के लिए किया जा सकता है।
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ध्रुव एडवाइजर्स के पार्टनर संदीप भल्ला के अनुसार आयकर कानून के नियम में संशोधन भारत के कर पारदर्शिता ढांचे को मजबूत करते हैं और यह ओईसीडी द्वारा किए गए वैश्विक विकास को दर्शाते हैं।
भल्ला ने कहा, ‘रिपोर्टिंग की व्यवस्था के भीतर क्रिप्टो संपत्तिया, इलेक्ट्रॉनिक मनी उत्पादों और सीबीडीसी को लाकर भारत विदेश में कर पारदर्शिता जाने तथा तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल वित्तीय लेनदेन के साथ तालमेल बनाने का प्रयास कर रहा है।’
वित्तीय संस्थानों को गैर-अमेरिकी रिपोर्ट करने योग्य खातों के लिए अतिरिक्त जानकारी देनी होगी, जिसमें यह भी शामिल है कि खाताधारक ने वैध स्व-प्रमाणीकरण प्रदान किया है या नहीं, खाता संयुक्त है या नहीं और खाते का प्रकार तथा स्थिति।
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वित्तीय संस्थानों को वित्तीय परिसंपत्तियों की बिक्री या उसे भुनाने से प्राप्त सकल आय को अलग से रिपोर्ट नहीं करना होगा अगर इस तरह के लेनदेन की जानकारी पहले से ही क्रिप्टो संपत्ति रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क के तहत दी गई हो।