सिक्योरिटीज अपील पंचाट (सैट) ने इंडसइंड बैंक के पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना की अपील को खारिज कर दिया है। खुराना ने भेदिया कारोबार की जांच में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के रिकॉर्ड की जानकारी मांगी थी।
खुराना ने सेबी के 17 दिसंबर, 2025 के पत्र को चुनौती दी थी। पत्र में उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाया गया था। उन्होंने पंचाट से सेबी की जांच रिपोर्ट में बताए गए दस्तावेजों के निरीक्षण और प्रतियां मांगने के साथ-साथ अपना जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने का भी अनुरोध किया था।
लेकिन पंचाट ने व्यवस्था दी कि खुराना को वे दस्तावेज पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं जिन पर नियामक भरोसा कर रहा है। जांच के दौरान जुटाए गए संपूर्ण डेटा तक पहुंच के लिए उनका अनुरोध कार्यवाही के मौजूदा चरण में उचित नहीं है।
पीठासीन अधिकारी न्यायमूर्ति पीएस दिनेश कुमार और तकनीकी सदस्य मीरा स्वरूप और धीरज भटनागर के पीठ ने 5 मार्च के अपने आदेश में कहा, निर्णय के चरण में नोटिस पाने वाले व्यक्ति को संबंधित सामग्री प्राप्त करने का अधिकार होगा। चूंकि मामला अभी तक निर्णय के चरण तक नहीं पहुंचा है, इसलिए हमारी राय में संपूर्ण डेटा की अपीलकर्ता की मांग विचार करने लायक नहीं है।
खुराना ने तर्क दिया था कि सेबी ने उनके खिलाफ एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने के लिए चुनिंदा ईमेलों और दस्तावेजों पर भरोसा किया है और नियामक के कब्जे में मौजूद सभी सामग्रियों तक पहुंच से उन्हें यह साबित करने में मदद मिलेगी कि निकाले गए निष्कर्ष गलत थे।
सेबी के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि नियामक ने इंडसइंड बैंक से लगभग 1.7 टेराबाइट का ईमेल डंप एकत्र किया था, जिसमें 26 अधिकारियों और 14 सामान्य ईमेल खातों से संबंधित ईमेल का बैकअप शामिल है।
उन्होंने बताया कि प्रासंगिक संदेशों की पहचान के लिए कीवर्ड फिल्टर का उपयोग करके डेटा की खोज की गई थी और अंतरिम आदेश में जिन ईमेल पर भरोसा किया गया था, उन्हें जांच के अवसरों के साथ अपीलकर्ता के साथ साझा किया गया था।