अबैकस म्युचुअल फंड के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि लगभग 50 प्रतिशत स्मॉलकैप शेयर इस समय अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर से लगभग 40 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे हैं। फंड हाउस का कहना है कि बाजार में इस तरह के बदलाव से रिटेल निवेशकों को अक्सर टिकाऊ मूल्यांकन पर अच्छी संभावना वाले शेयर खरीदने का मौका मिलता है।
मूल्यांकन में व्यापक सुधार हुआ है और अब यह बहुत अधिक नहीं है। मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी गौरव भंडारी का कहना है, ‘2023 और 2024 की शुरुआत में दिखने वाली बुलबुले जैसी ज्यादातर हलचल अब ठहर गई है।’
सूचकांक स्तर पर बात करें तो मूल्यांकन पांच वर्षीय औसत के मुकाबले अभी भी थोड़े से महंगे दिख रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत शेयरों के स्तर पर तस्वीर अलग है। संवित्ति कैपिटल के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (पीएमएस) के निदेशक एवं प्रमुख अधिकारी प्रभाकर कुडवा कहते हैं, ‘कई अच्छी क्वालिटी वाले स्मॉलकैप अब आगामी पीई के आधार पर सब-20 मूल्यांकन मल्टीपल्स पर उपलब्ध हैं।’
वित्त वर्ष 2025 के गिरावट वाले चक्र के बाद कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर कहते हैं, ‘घरेलू टैक्स सुधार, ज्यादा सरकारी और निजी खर्च, और वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं में कमी इस रुझान को मजबूत करने में मदद कर सकती है।’
कुडवा कहते हैं, ‘अगर टैरिफ और भूराजनीतिक अशांति थम जाती है और वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता वापस आती है, तो स्मॉलकैप को बहुत ज्यादा फायदा हो सकता है।’ निर्माण, रक्षा और पूंजीगत वस्तु जैसे क्षेत्रों ने पिछली बार तेजी को रफ्तार देने में मदद की।
साथ ही साथ, कई घटनाक्रम सकारात्मक बदलाव को रोक सकते हैं। भंडारी कहते हैं, ‘देरी से दरों में कटौती और तरलता में कमी मुख्य जोखिम हैं।’कई स्मॉलकैप कंपनियां निर्यातक हैं, इसलिए वैश्विक मंदी का उन पर असर पड़ेगा। वैश्विक कारक मौजूदा रिस्क-ऑफ माहौल को भी बढ़ा सकते हैं, जिससे विदेशी निवेश और जोखिम की क्षमता में कमी आएगी। ऐसे माहौल से घरेलू कमाई में बढ़ोतरी धीमी हो जाएगी। कुडवा कहते हैं, ‘इससे स्मॉलकैप को री-रेटिंग के लिए जरूरी फंडामेंटल समर्थन खत्म हो जाएगा।’
हालात बिना सोचे-समझे खरीदने के लिए सही नहीं हैं। भंडारी कहते हैं, ‘निवेशकों को अच्छी बैलेंस शीट और कमाई की संभावना पर ध्यान देना चाहिए।’ नायर का कहना है कि डोमेस्टिक-फोकस्ड प्राइवेट बैंक, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट, पूंजीगत वस्तु और ऑटो में कुछ खास मौके मौजूद हैं।
स्मॉलकैप सेगमेंट उतार-चढ़ाव वाला है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसेफ थॉमस कहते हैं, ‘पिछले 10-15 साल में इस सेगमेंट में लगभग हर दो साल में एक बार 20-30 फीसदी का करेक्शन देखा गया है। सिर्फ उन कीमतों पर निवेश करें जो आंतरिक वैल्यू के नजरिए से सही हों।’ कई स्मॉलकैप में कम तरलता के कारण मामूली बिक्री भी तेज गिरावट ला सकती है।
सिर्फ उन्हीं शेयरों को खरीदें जिनमें काफी तरलता हो ताकि बेचने में दिक्कत न आए। प्रमोटर होल्डिंग भी मायने रखती है। थॉमस कहते हैं, ‘अच्छी-खासी हिस्सेदारी से दिलचस्पी और लंबी अवधि की प्रतिबद्धता का संकेत मिलता है।’ नियामकीय अनुपालन भी कोई मुद्दा नहीं होना चाहिए।
इस उतार-चढ़ाव वाले सेगमेंट में सीमित निवेश की करें। थॉमस कहते हैं, ‘बहुत ज्यादा कंजर्वेटिव निवेशकों को छोड़कर दूसरे लोग अपने पोर्टफोलियो का 10–20 फीसदी हिस्सा स्मॉलकैप में लगाने के बारे में सोच सकते हैं।’
(लेखिका मुंबई स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं)