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शेयर बाजार में रिकॉर्ड वैल्यूएशन, केप अनुपात से कम रिटर्न की चेतावनी

भारत के शेयर सूचकांकों के नौ महीने पहले के सर्वकालिक उच्चस्तर से नीचे रहने के बावजूद शेयर बाजार शायद ही कभी इतना महंगा रहा हो, जितना कि एक विशेष पैमाने पर अब है।

Last Updated- June 20, 2025 | 10:01 PM IST
Stock Market

भारत के शेयर सूचकांकों के नौ महीने पहले के सर्वकालिक उच्चस्तर से नीचे रहने के बावजूद शेयर बाजार शायद ही कभी इतना महंगा रहा हो, जितना कि एक विशेष पैमाने पर अब है। ‘पूर्वानुमान या भ्रम? शिलर का सीएपीई यानी केप : भारतीय इक्विटी में बाजार और स्टाइल फैक्टर फॉरवर्ड रिटर्न’ नामक एक अध्ययन पर आधारित आंकड़ों के अनुसार, बीएसई सेंसेक्स के लिए 10 साल का चक्रीय रूप से समायोजित मूल्य आय (सीएपीई) अनुपात 35.2 गुना है। यह अध्ययन मूल रूप से जुलाई 2024 में भारतीय प्रबंध संस्थान, अहमदाबाद के प्रोफेसर जोशी जैकब और सिंगापुर स्थित पारिवारिक कार्यालय, इन्वेस्पार के निदेशक राजन राजू ने किया था।

ये संख्याएं हर महीने अपडेट की जाती हैं। मई 2025 के लिए नवीनतम मूल्यांकन आमतौर पर भविष्य में कम अपेक्षित रिटर्न बताते हैं। पारंपरिक मूल्य-आय (पी/ई) अनुपात उन मूल्यांकनों पर नजर डालता है जो आमतौर पर तत्कालिक अतीत या निकट भविष्य पर आधारित होते हैं, वहीं केप दीर्घकालिक कारोबारी चक्र को ध्यान में रखता है और मुद्रास्फीति के लिहाज से आय को समायोजित करता है।

इस अनुपात को नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री आर जे शिलर के नाम पर शिलर पीई कहा जाता है, जिन्होंने जॉन कैंपबेल के साथ इस पैमाने पर काम किया है। शिलर ने 2000 में डॉट-कॉम बुलबुले के फटने से ठीक पहले यह संकेत देने के लिए इस पैमाने का इस्तेमाल किया था कि इक्विटी का मूल्यांकन ज्यादा है।

राजन राजू ने लिखा कि केप अनुपात अभी 90 पर्सेंटाइल से ऊपर है और यह 2003 से अब तक के आंकड़ों के अनुसार 90 फीसदी से अधिक है। उन्होंने कहा, मौजूदा स्तरों पर मूल्यांकन ऐतिहासिक रूप से पांच साल की होल्डिंग अवधि के लिए एक अंक के आगे के अपेक्षित सालाना रिटर्न के अनुरूप हैं। अगर दस साल की लंबी होल्डिंग अवधि हो तो इसे कम किया जा सकता है, जो औसतन पांच साल की होल्डिंग अवधि के सापेक्ष उच्च रिटर्न के अनुरूप रहा है।

लेखकों ने लिखा कि केप अहम जानकारी मुहैया करता है, लेकिन निवेश निर्णयों में यही तय करने का एकमात्र पैमाना नहीं होना चाहिए। जोशी जैकब ने लिखा कि भारतीय फर्मों की बदलती प्रकृति, जहां प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप की ज्यादा सूचीबद्धता हो रही है, से मूल्यांकन बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा, भारतीय फर्मों की उत्पादकता में कुछ हद तक सुधार हुआ है। जैकब के अनुसार, फिर भी केप अनुपात और भविष्य में अपेक्षित रिटर्न के बीच व्यापक विपरीत संबंध बरकरार रहेगा। अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में ऐसा देखा गया है। बीएसई सेंसेक्स ने सितंबर 2024 में अब तक के सर्वोच्च स्तर 85,978 अंक को छुआ था। शुक्रवार को यह 82,408 अंक पर बंद हुआ।

टाटा म्युचुअल फंड के वरिष्ठ फंड मैनेजर चंद्रप्रकाश पडियार कहते हैं कि आय वृद्धि की गुंजाइश अभी भी है, जिससे महंगा मूल्यांकन कम हो सकता है। 2008-09 के शीर्ष समय के दौरान कंपनियों का लाभ सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 6.8 फीसदी था। यह अभी करीब 5.3 फीसदी है। अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने जैसे संरचनात्मक परिवर्तनों के कारण इस चक्र में शिखर ऊंचा हो सकता है, जिससे सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कारोबार ज्यादा हो सकता है। साथ ही कंपनियों को पहले की तुलना में बिक्री के हर रुपये पर अधिक लाभ मिल सकता है।

पडियार ने कहा, 2008-09 की तुलना में आज कंपनियों का आय से कहीं अधिक मुनाफा मार्जिन (400 आधार अंक तक) है। समय के साथ गिरावट के एक वर्ष में आय में सुधार के साथ मूल्यांकन कहीं बेहतर दिख सकते हैं। पडियार ने कहा कि अल्पावधि में रिटर्न कम हो सकता है, लेकिन तीन से पांच साल की अवधि में ज्यादा उचित लाभ मिल सकता है।

निफ्टी-500 इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स के मुकाबले ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है, जो बताता है कि छोटी कंपनियों का मूल्यांकन उनकी आय की तुलना में ज्यादा है।

लेखकों ने बाजार की गतिशीलता को दर्शाते हुए कहा कि व्यापक बाजार में महत्त्वपूर्ण निवेश ने निफ्टी 500 सूचकांक और बीएसई सेंसेक्स के बीच अंतर बढ़ाने में योगदान दिया होगा। ब्लूचिप की तुलना में छोटी कंपनियों के अपेक्षाकृत कम फ्लोट और सीमित व्यापारिक गतिविधियों (यानी ‘तरलता प्रीमियम’) ने मूल्यांकन अंतर को बढ़ाने में योगदान दिया हो सकता है।

अध्ययन के अनुसार केप वैल्यू और ड्रॉडाउन के बीच सीधा संबंध है। ड्रॉडाउन शिखर से अधिकतम गिरावट है। केप जितना ऊंचा होगा, गिरावट या संभावित नुकसान उतना ही अधिक होगा। अध्ययन के अनुसार मूल्य और कम अस्थिरता वाले शेयर गिरावट के दौरान ज्यादा सुदृढ़ होते हैं।

First Published - June 20, 2025 | 10:01 PM IST

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