Market This Week: शेयर बाजार के प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए। इसी के साथ निफ्टी -50 और सेंसेक्स ने एक साल से ज्यादा समय की सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। इसकी मुख्य वजह अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ता युद्ध तनाव रहा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं और वैश्विक निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ।
ब्रेंट कच्चा तेल शुक्रवार को 20 महीने के उच्च स्तर 87.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इस हफ्ते इसमें करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जो मार्च 2022 के बाद सबसे तेज साप्ताहिक उछाल है। उस समय रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद तेल की कीमतें बढ़ी थीं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है। इसलिए तेल की कीमत बढ़ना आमतौर पर देश के लिए नकारात्मक माना जाता है। बाजार को डर है कि अगर एनर्जी सप्लाई में बड़ा झटका लगता है तो इससे महंगाई बढ़ सकती है और भारत के चालू खाते तथा राजकोषीय संतुलन पर दबाव पड़ सकता है।
इस बीच, निफ्टी 50 इंडेक्स शुक्रवार को 1.27 प्रतिशत गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ। जबकि बीएसई सेंसेक्स 1.37 प्रतिशत गिरकर 78,918.9 पर आ गया। इस गिरावट में सबसे ज्यादा दबाव फाइनेंशियल कंपनियों के शेयरों पर रहा।
इस सप्ताह (2 मार्च से 6 मार्च) निफ्टी और सेंसेक्स दोनों लगभग 2.9 प्रतिशत गिर गए। निफ्टी के लिए यह 28 फरवरी 2025 के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। जबकि सेंसेक्स के लिए 20 दिसंबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट रही।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ”पिछले सेशन में आई राहत भरी तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार में गिरावट फिर बढ़ गई। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। इससे मिडिल ईस्ट में तेल और गैस की अहम सप्लाई प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे निवेशकों की भावना कमजोर हो सकती है और भारत के दोहरे घाटे, महंगाई के रुझान और रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।”
इस दौरान रुपया भी थोड़ा कमजोर होकर बंद हुआ और उसने एक महीने से ज्यादा समय की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। इस सप्ताह 16 में से 15 प्रमुख सेक्टर गिरावट में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी रही, जहां स्मॉलकैप लगभग 2.5 प्रतिशत और मिडकैप करीब 2.9 प्रतिशत गिर गए।
सरकारी बैंकों के शेयरों में लगभग 6.5 प्रतिशत गिरावट आई। बाजार को डर है कि तेल की कीमतें बढ़ने से सरकार की उधारी लागत बढ़ सकती है। इससे बॉन्ड यील्ड ऊपर जा सकती है और बैंकों की ट्रेजरी आय कम हो सकती है। वित्तीय और बैंकिंग शेयरों में भी करीब 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई।
तेल और गैस सेक्टर का इंडेक्स लगभग 3.9 प्रतिशत गिरा। इस वजह, तेल विपणन कंपनियों बीपीसीएल, एचपीसीएल और आईओसी के शेयरों में भारी गिरावट रही। अन्य शेयरों में लार्सन एंड टुब्रो शुक्रवार को 2.2 प्रतिशत गिरा और पूरे सप्ताह में लगभग 7.7 प्रतिशत टूट गया। मिडिल ईस्ट में कंपनी के कारोबार को लेकर निवेशकों की चिंता के कारण यह गिरावट आई।
इंटरग्लोब एविएशन (Indigo) का शेयर शुक्रवार को 2.4 प्रतिशत और पूरे सप्ताह में 8.8 प्रतिशत गिरा। निवेशकों को चिंता है कि ईंधन महंगा होने और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा की रफ्तार धीमी होने से कंपनी की तिमाही कमाई पर असर पड़ सकता है।
हालांकि कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। एस्क्वायर कैपिटल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सम्राट दासगुप्ता ने कहा कि अमेरिका पहले ही साफ कर चुका है कि वह जमीन पर सैनिक नहीं भेजेगा। इससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष बहुत लंबे समय तक नहीं चलेगा। ऐसे में निवेशकों के लिए उचित मूल्य पर अच्छे शेयर खरीदने का मौका भी बन सकता है।
बाजार में इस हफ्ते आई बड़ी गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप शुक्रवार (6 मार्च) को घटकर 4,49,79,341 करोड़ रुपये पर आ गया। जबकि पिछले शुक्रवार (27 फरवरी) को यह 46,325,200 करोड़ रुपये था।