Budget 2026 stock market expectations: यूनियन बजट 2026 आज यानी रविवार को पेश होना जा रहा है। लेकिन भारतीय शेयर बाजारों की तरफ से बजट में बड़े सुधारों की ज्यादा उम्मीद नहीं की जा रही है। बाजार पहले से ही यह मानकर चल रहे हैं कि बजट में कोई बड़े सुधारात्मक कदम नहीं होंगे।
एनालिस्ट्स की माने तो बजट 2026 में लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय फिस्कल डिसिप्लिन पर ज्यादा जोर रहेगा। इसकी वजह यह है कि सरकार पहले ही डायरेक्ट टैक्स कोड में बदलाव कर चुकी है, जो पिछले साल के बजट के जरिए किए गए थे और इस साल से लागू हो चुके हैं। वहीं, अप्रत्यक्ष करों में बदलाव जीएसटी के युक्तिकरण के जरिए किए गए हैं, जो सितंबर 2025 से प्रभावी हैं।
हालांकि, एनालिस्ट्स को गैर-पारंपरिक या उभरते सेक्टरों—जैसे रक्षा और उससे जुड़े क्षेत्रों में कैपेक्स बढ़ने की गुंजाइश नजर आती है। उनका कहना है कि चूंकि कर राजस्व की वृद्धि सीमित है, ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए विनिवेश का रास्ता अपना सकती हैं। इसके अलावा, बजट 2026 में रक्षा, रेलवे और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों के प्रदर्शन को मजबूत करने पर भी जोर दिए जाने की संभावना है।
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जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार के अनुसार, बजट फिस्कल कंसोलिडेशन के रास्ते पर कायम रहेगा और वित्तीय घाटे को जीडीपी के करीब 4.2 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य रखा जा सकता है।
Motilal Oswal
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, अमेरिका के टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के बीच बजट 2026 को करीब 10.1 प्रतिशत नाममात्र जीडीपी ग्रोथ के अनुमान पर तैयार किया जा सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि FY27 का बजट खर्च पर नियंत्रण (फिस्कल कंसॉलिडेशन) दिखाने और साथ ही पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को बढ़ावा देने के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।
ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 में जीडीपी के मुकाबले कैपेक्स 3.1 प्रतिशत रखा जाएगा। इसका मतलब है कि कुल कैपेक्स बजट करीब 12.4 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसमें डिफेन्स और उससे जुड़े उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा विनिर्माण, फार्मा, बिजली, परमाणु ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, महत्वपूर्ण खनिज और टैरिफ से प्रभावित श्रम-प्रधान सेक्टरों पर ज्यादा खर्च होने की संभावना है।
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि कुल सरकारी खर्च की वृद्धि दर सालाना आधार पर करीब 7 प्रतिशत रह सकती है। इसमें कैपेक्स 12.4 लाख करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी) रहने का अनुमान है। जबकि राजस्व खर्च में करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY27 में वित्तीय घाटा जीडीपी का करीब 4.3 प्रतिशत रह सकता है। वहीं, केंद्र सरकार की कुल उधारी 16.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो FY26 में 14.6 लाख करोड़ रुपये थी।
Nomura
नोमुरा का मानना है कि आगे भी मैक्रो आर्थिक स्थिरता सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी और बजट में खर्च बढ़ाने (फिस्कल प्रोफ्लिगेसी) पर निर्भर रहने के बजाय सुधारों पर आधारित कदमों पर जोर दिया जाएगा। ब्रोकरेज के मुताबिक, संभावित फोकस क्षेत्रों में प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का विस्तार, एमएसएमई और निर्यातकों को समर्थन, नियामकीय सुधार, लक्षित सेक्टरों के लिए एक्सेलरेटेड डिप्रिसिएशन, रक्षा क्षेत्र के लिए अधिक पूंजीगत अलॉटमेंट, महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करना और कस्टम ड्यूटी स्लैब का रेशनलाइजेशन शामिल हो सकता है।
ब्रोकरेज का मानना है कि आर्थिक मोर्चे पर वित्त वर्ष 2027 के बजट में केंद्र सरकार वित्तीय घाटे के बजाय कर्ज स्तर को लक्ष्य बनाएगी। नोमुरा को उम्मीद है कि FY27 में कर्ज का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 55 प्रतिशत रखा जा सकता है, जो FY26 में 56 प्रतिशत था। यह लक्ष्य जीडीपी के 4.2 प्रतिशत के वित्तीय घाटे के अनुरूप होगा। वहीं, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को जीडीपी के 3.2 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा जाएगा।
ICICI Securities
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 के लिए यूनियन बजट में सरकार खर्च को सीमित रख सकती है। डेवेलपमेंट की तरफ झुकाव वाले क्षेत्रों जैसे विनिर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित कर सकती है और उम्मीद से पहले डेट-टू-जीडीपी रेश्यो में कमी ला सकती है। इससे निजी क्षेत्र में कर्ज (प्राइवेट क्रेडिट) की वृद्धि को बल मिल सकता है।
ब्रोकरेज को उम्मीद है कि पीएलआई (प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव) और अन्य केंद्रीय योजनाओं के तहत बजट अलॉटमेंट स्थानीय विनिर्माण गतिविधियों पर केंद्रित होंगे। इनमें ऑटोमोबाइल, अंतरिक्ष, ऊर्जा, रक्षा, सेमीकंडक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, फार्मा, केमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए पीएलआई योजना अपनी शुरुआत के बाद से मिली सफलता को देखते हुए या तो विस्तारित की जा सकती है या नए रूप में पेश की जा सकती है। इसके अलावा, अमेरिका की टैरिफ नीतियों से प्रभावित श्रम-प्रधान विनिर्माण क्षेत्रों जैसे टेक्सटाइल्स और ज्वेलरी को भी सरकार की ओर से लगातार समर्थन मिलने की संभावना जताई गई है।